
सुप्रीम कोर्ट ने मलयालम उपन्यास मीशा पर बैन लगाने से इनकार कर दिया है.
नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने मलयालम उपन्यास मीशा पर बैन लगाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने किताब पर बैन लगाने वाली याचिका को भी खारिज कर दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि लेखक की कल्पना को स्वतंत्रता का आनंद लेना चाहिए. दरसअल उपन्यास में मंदिर जाने वाली हिंदू महिलाओं के चरित्र को लेकर उठाए सवाल उठाये गए थे. इसी आधार पर उपन्यास पर पाबंदी लगाने की याचिका दाखिल हुई थी. कोर्ट ने कहा कि साहित्य पर पाबंदी लगाने की संस्कृति तब तक सही नहीं जब तक वो अश्लील न हो. कोर्ट ने मलयालम के दैनिक समाचार पत्र मातृभूमि से उन तीन एपिसोड काकथासार मांगा था. वहीं केंद्र और केरल सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक नहीं लगाई जा सकती. वैसे उपन्यास बाजार में आ चुका है.
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