दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में छात्रों के लिए संचालित एक पीजी भवन के ढहने से हुई सात मौतों के मामले में जांच लगातार नए खुलासे कर रही है. दिल्ली पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि हादसे से पहले इमारत में मरम्मत और निर्माण कार्य चल रहा था. बेसमेंट को समतल करने के लिए उसमें भारी मात्रा में मलबा भरा गया था और ग्राउंड फ्लोर पर दुकान के लिए जगह बनाने के उद्देश्य से एक दीवार भी तोड़ दी गई थी. पुलिस का मानना है कि इन्हीं बदलावों के कारण इमारत का ढांचा कमजोर हुआ और वह अचानक भरभराकर गिर गई.
पूछताछ में सामने आया हादसे का कारण
दिल्ली पुलिस के अनुसार मामले में गिरफ्तार मजदूर ठेकेदार सानोज कुमार ने पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारी दी है. सानोज को उत्तर प्रदेश के कासगंज से गिरफ्तार किया गया था. पुलिस के मुताबिक सानोज ने बताया कि करीब 10 दिन पहले इमारत के मालिक पक्ष से जुड़े महेश गुप्ता ने उसे भवन में मरम्मत और निर्माण कार्य के लिए लगाया था. बेसमेंट को ग्राउंड फ्लोर के बराबर करने के लिए वहां लगभग तीन ट्रक मलबा डाला गया था. सानोज को इस काम के लिए प्रतिदिन 2,800 रुपये का भुगतान किया जा रहा था.
दुकान बनाने के लिए हटाई गई दीवार
जांच में सामने आया है कि हादसे वाले दिन ग्राउंड फ्लोर पर दुकान के लिए अतिरिक्त जगह बनाने के उद्देश्य से एक दीवार तोड़ दी गई थी. पुलिस का कहना है कि पहले से बेसमेंट में भरे गए भारी मलबे और दीवार हटाने से इमारत की भार वहन क्षमता प्रभावित हुई. ढांचे पर अचानक बढ़े दबाव को भवन सहन नहीं कर सका और पूरी इमारत ढह गई.
PG संचालक सुधांशु लवनीश भी गिरफ्तार
मामले में पुलिस ने पीजी संचालक सुधांशु लवनीश को भी गिरफ्तार किया है. भजनपुरा निवासी सुधांशु ने वर्ष 2019 में दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी. पुलिस के अनुसार वह वर्ष 2022 से अपने मित्र शुभम त्यागी के साथ "Hostel Daze" नाम से पीजी संचालन कर रहा था. वर्तमान में उसके संचालन में इलाके के सात पीजी बताए गए हैं. जांच में पता चला है कि हादसे वाली इमारत की चार मंजिलें अगस्त 2025 में 1.05 लाख रुपये मासिक किराये पर ली गई थीं.
जर्जर इमारत की जानकारी होने का दावा
पुलिस का कहना है कि सुधांशु को इमारत की खराब हालत की जानकारी थी. पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि भवन अपेक्षाकृत कम किराये पर मिला था क्योंकि उसकी स्थिति अच्छी नहीं थी. जांच एजेंसियों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान भवन को संभावित खतरे की जानकारी होने के बावजूद उसने कोई आपत्ति नहीं जताई और न ही पीजी में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर कोई कदम उठाया.
तीनों आरोपियों को पुलिस हिरासत
पुलिस ने महेश गुप्ता, सानोज कुमार और सुधांशु लवनीश को अदालत में पेश किया. कोर्ट ने तीनों को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है. उधर पुलिस शुभम त्यागी की तलाश में भी जुटी हुई है, जो फिलहाल फरार बताया जा रहा है.
पहले भी हुई थीं गिरफ्तारियां
इस मामले में इससे पहले भवन की मालकिन 75 वर्षीय उर्मिला गुप्ता, उनके पति और वायुसेना से सेवानिवृत्त हरिराम गुप्ता तथा उनके बेटे महेश गुप्ता को भी गिरफ्तार किया जा चुका है. रविवार को हुए इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे. मलबे से कुल 12 लोगों को बाहर निकाला गया था.
MCD का शहरभर में अभियान
हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने राजधानी में खतरनाक इमारतों, अवैध निर्माण और भवन नियमों के उल्लंघन के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया है. नगर निगम ने 7 से 9 सितंबर के बीच 1,252 पीजी भवनों का सर्वेक्षण किया. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 9 सितंबर के बीच 1,053 तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई, 491 संपत्तियां सील की गईं और हजारों नोटिस जारी किए गए. लक्ष्मी नगर, जगतपुरी, पांडव नगर, शाहीन बाग, जामिया नगर, करोल बाग, चांदनी चौक और मुखर्जी नगर समेत कई इलाकों में कार्रवाई जारी है.
यह भी पढ़ें : दिल्ली सत्य निकेतन हादसे में बिल्डिंग का ऑपरेटर भी हुआ गिरफ्तार
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं