- इंडिया गठबंधन की बैठक में लगभग 20 विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए और यह गठबंधन की 8वीं बैठक थी
- विपक्ष चुनाव आयोग और SIR के खिलाफ करेगी रैलियां
- कांग्रेस को सहयोगी दलों ने चुनावी रणनीति पर पुनर्विचार करने की सलाह दी
INDIA ब्लॉक की बैठक में करीब 20 विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया. करीब तीन घंटे चली यह बैठक गठबंधन की तीन सालों में आठवीं बैठक थी. बैठक का मुख्य फोकस चुनाव आयोग, SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे रहे.
बैठक में लिए गए बड़े फैसले
- 2 से 8 अक्टूबर तक देश के सभी जिलों में रैलियां और प्रदर्शन.
- 6 अक्टूबर को संसद सदस्यों का चुनाव आयोग तक मार्च.
- अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति से मुलाकात.
- देशभर में पांच मेगा रैलियां आयोजित की जाएंगी.
- 1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली होगी.
- सुप्रीम कोर्ट से चुनाव संबंधी लंबित याचिकाओं के जल्द निपटारे की मांग.
- पुराने मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराए जाने की मांग.
- बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग को भी दोहराया गया.
बैठक में कांग्रेस को सहयोगियों की नसीहत
इस बैठक उन नेताओं ने बढ़चढ़ कर बोला जो चुनाव में हार गए है. इनमें ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव और उद्धव ठाकरे प्रमुख रहे. हालांकि केवल उन्हीं नेताओं ने नहीं, बल्कि अन्य सहयोगी दलों ने भी कांग्रेस को अपनी राजनीतिक शैली पर पुनर्विचार की सलाह दी.
उद्धव ठाकरे ने सवाल उठाया कि कांग्रेस ने हाल में जो देशव्यापी विरोध कार्यक्रम किए, उनमें सहयोगी दलों को पर्याप्त रूप से शामिल क्यों नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी 'एकला चलो' नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए. ठाकरे ने 4 अक्टूबर को मुंबई में होने वाली बैठक के लिए INDIA गठबंधन के सभी दलों को आमंत्रित भी किया.
सपा की गैरमौजूदगी पर चर्चा
समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव या रामगोपाल यादव के नहीं आने से कुछ दल मायूस भी नजर आए. कुछ ने कहा कि यदि वो दोनों नहीं आ सकते थे तो धर्मेंद्र यादव को भेज सकते थे. लेकिन बैठक में जो आए वो भी कांग्रेस को नसीहत दे गए. बैठक में शामिल सपा सांसद हरेन्द्र मलिक ने कहा कि कांग्रेस को बड़ा भाई का दिल दिखाना चाहिए. उन्हें कुछ त्याग भी करना सीखना पड़ेगा.
विजय की पार्टी TVK भी नहीं पहुंची
इंडिया गठबंधन की इस बैठक में तमिलनाडु से उनकी सहयोगी एक्टर विजय की पार्टी टीवीके के कोई नहीं आया. विजय तमिलनाडु में उपचुनाव के प्रचार में व्यस्त हैं. इंडिया गठबंधन के एक नेता ने चुटकी लेते हुए कहा के वो क्यों आऐगें वो तो चुनाव जीते हुए हैं. हालांकि तमिलनाडु से एमडीएमके के वाईके और वीसीके जैसी पार्टियां जरूर शामिल हुई. इंडिया गठबंधन की पुरानी सहयोगी डीएमके ने पहले ही किनारा कर लिया था.
AAP की दूरी, लेकिन समर्थन का भरोसा
यही हाल आम आदमी पार्टी का रहा जिन्होंने बैठक में आने से मना कर दिया मगर संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त के महाभियोग में साथ देने का वादा जरूर किया है.
नए सहयोगियों की तलाश
इंडिया गठबंधन की बैठक में गैर बीजेपी घटक दलों को जोड़ने पर भी चर्चा हुई जैसे बीजू जनता दल,बीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस को भी शामिल करने की कोशिश की जानी चाहिए. लेकिन कांग्रेस के साथ दिक्कत है कि वह राज्यों में जिन पार्टियों से लड़ती है, उन्हीं का समर्थन केंद्र में या कहें संसद में बीजेपी से लड़ने के लिए चाहती हैं. ओडिशा में बीजू जनता दल हो,तेलंगाना में केसीआर की पार्टी हो या आंध्र प्रदेश में जगन मोहन.
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के रिश्ते वैसे ही खराब रहते हैं. हरियाणा में अपनी हार के लिए कांग्रेस केजरीवाल को ही दोषी मानती है. दिल्ली तो कांग्रेस की दुखती रग है ही और अब पंजाब में उन्हें लड़ना है.
दरअसल राज्यों में एकदूसरे के खिलाफ लड़ेंगे और दिल्ली में साथ रहेंगे वाली बात एकसाथ चल नहीं पाती, कहीं ना कहीं एक अविश्वास वाली बात रह ही जाती है. इसलिए क्षेत्रीय दल कांग्रेस से बराबर बड़ा दिल दिखाने की बात करते रहते हैं. जब तक ममता बनर्जी सत्ता में थी तब उनका भी कांग्रेस के प्रति यही व्यवहार था.
INDIA गठबंधन फिर क्यों हुआ सक्रिय?
लेकिन चुनाव आयोग के बारे में जो नई जानकारी सामने आई है उसने इंडिया गठबंधन के दलों को फिर से जोड़ दिया है यही वजह है कि देश भर में आंदोलन पर सब सहमत हो गए हैं और इन आंदोलनों की सफलता ही इंडिया गठबंधन की सफलता मानी जाएगी.
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