सत्य निकेतन इलाके हॉस्टल बिल्डिंग हादसे के बाद इलाके की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. हादसे वाली इमारत से महज 80 मीटर की दूरी पर एक और चार मंजिला जर्जर इमारत भी लोगों के लिए खतरे की घंटी बना हुआ है. NDTV के रियलिटी चेक में सामने आया कि इस इमारत की हालत बेहद खराब है. इस बिल्डिंग के कई खंभों और बीम में कमजोरी साफ दिखाई देती है, जबकि पूरी संरचना भी जर्जर नजर आती है. ऐसे में स्थानीय लोगों को डर है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो यहां भी बड़ा हादसा हो सकता है.
'जमीनी हालात देखकर उनका भरोसा डगमगा गया'
इमारत के आसपास रहने वाले छात्रों में भय और नाराजगी दोनों है. बड़ी संख्या में UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र इस इलाके में रहते हैं. पास की एक इमारत में रहने वाले UPSC अभ्यर्थी रुद्र ने बताया कि हालिया हादसे के बाद प्रशासन से त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद थी, लेकिन जमीनी हालात देखकर उनका भरोसा डगमगा गया है.
उनका कहना है कि अब वे जल्द से जल्द दिल्ली छोड़ने के बारे में सोच रहे हैं. अन्य छात्रों ने भी चिंता जताते हुए कहा कि रोजाना इस इमारत के पास से गुजरना असुरक्षित महसूस होता है और हर समय किसी अनहोनी का डर बना रहता है.
खतरा अभी भी टला नहीं
हालांकि प्रशासन ने एहतियाती कदम के तौर पर जर्जर भवन को खाली करा दिया है, लेकिन खतरा अभी भी टला नहीं है. इमारत घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके के बीच खड़ी है, जहां हर दिन सैकड़ों लोग आवाजाही करते हैं.
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन खुद मान चुका है कि भवन असुरक्षित है, तो फिर उसे गिराने या संरचनात्मक रूप से सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं. लोगों की मांग है कि किसी और हादसे का इंतजार करने के बजाय प्रशासन तत्काल कार्रवाई करे, ताकि आसपास रहने वाले छात्र और परिवार सुरक्षित महसूस कर सकें.
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