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पंजीकरण, फंडिंग और दैनिक शाखाएं... कैसे काम करता है RSS? समझिए इसकी पूरी प्रक्रिया

आरएसएस एक पंजीकृत संस्था नहीं है. संघ का कहना है कि वह एक अनौपचारिक सांस्कृतिक संगठन है, इसलिए उसका कोई केंद्रीय पंजीकरण, बैंक खाता या पैन कार्ड नहीं है.

पंजीकरण, फंडिंग और दैनिक शाखाएं... कैसे काम करता है RSS? समझिए इसकी पूरी प्रक्रिया
गांधी की हत्या के बाद संघ पर पहली बार प्रतिबंध लगाया गया था
  • RSS का औपचारिक पंजीकरण कभी नहीं कराया गया, क्योंकि इसे Body of Individuals के रूप में माना गया.
  • संघ पर सरकारों ने तीन बार प्रतिबंध लगाया, जिन्हें अदालतों ने हटाया और इसकी कानूनी स्थिति स्पष्ट की है.
  • आरएसएस स्वयंसेवकों से गुरु दक्षिणा एक रुपए से प्रारंभ होती है, जिसका पूरा लेखा-जोखा रखा जाता है.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खरगे द्वारा आरएसएस के रजिस्ट्रेशन पर उठाए गए सवाल के बाद संगठन फिर सुर्खियों में आ गया है. इस बयान के बाद आरएसएस की कार्यशैली को लेकर नई बहस छिड़ गई है. अब लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं कि आरएसएस किस तरह काम करता है, उसका पंजीकरण कैसे होता है और उसकी फंडिंग व संचालन की प्रक्रिया क्या है.

संघ के वरिष्ठ नेता समय-समय पर इन सवालों का जवाब देते रहते हैं. संघ नेताओं के अनुसार आरएसएस एक Body of Individuals है और विभिन्न अदालतों के फैसलों में भी इसे इसी रूप में मान्यता दी गई है. संघ एक वैचारिक संगठन है. खुले मैदान में लगने वाली शाखाओं का संचालन और देखभाल स्वयंसेवक करते हैं. संघ अपने आनुषंगिक संगठनों के माध्यम से विभिन्न गतिविधियां संचालित करता है. हर संगठन अपने स्तर पर स्वतंत्र होता है और सरकारी नियमों का पालन करते हुए काम करता है.

क्या आरएसएस एक पंजीकृत (Registered) संगठन है?

संघ का कभी औपचारिक पंजीकरण नहीं कराया गया. संघ प्रमुख मोहन भागवत के अनुसार आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई थी. उस समय अंग्रेजों का शासन था, इसलिए पंजीकरण का सवाल ही नहीं उठता था, क्योंकि संघ अंग्रेजों के खिलाफ सक्रिय था. आजादी के बाद भी भारतीय कानूनों में पंजीकरण अनिवार्य नहीं था और इसे Body of Individuals के रूप में माना गया. उन्होंने यह भी कहा कि सरकारों ने तीन बार संघ पर प्रतिबंध लगाया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि संघ को सरकार द्वारा एक इकाई के रूप में मान्यता दी गई थी. हर बार अदालत ने यह प्रतिबंध हटाया, जिससे इसकी कानूनी स्थिति स्पष्ट होती है.

आरएसएस में 'गुरु दक्षिणा' की प्रक्रिया क्या है?

आयकर विभाग द्वारा आरएसएस पर कर लगाने की बात उठाई गई थी, लेकिन अदालत ने कहा कि यह Body of Individuals है, इसलिए गुरु दक्षिणा पर कर नहीं लगेगा. हर साल गुरु पूर्णिमा के अवसर पर स्वयंसेवक गुरु दक्षिणा देते हैं, जो एक रुपए से शुरू होती है. इसी धन से संघ के कार्यक्रम चलाए जाते हैं और इसका पूरा हिसाब रखा जाता है.

स्वयंसेवकों का भी पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है

महात्मा गांधी की हत्या के बाद संघ पर पहली बार प्रतिबंध लगाया गया था. बाद में प्रतिबंध हटाने के लिए यह शर्त रखी गई कि संघ का एक लिखित संविधान होना चाहिए. संघ ने यह शर्त स्वीकार की और यह भी स्पष्ट किया कि वह राजनीतिक गतिविधियों में भाग नहीं लेगा. इसी संविधान के आधार पर संघ का संगठन चलता है. सरसंघचालक को छोड़कर अन्य पदाधिकारियों का चुनाव होता है. राष्ट्रीय स्तर से लेकर संभाग स्तर तक नियमित बैठकें आयोजित की जाती हैं. शाखाओं और स्वयंसेवकों का भी पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है.

संघ की सबसे महत्वपूर्ण और सर्वोच्च निर्णय लेने वाली बैठक अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की होती है, जो हर साल मार्च में आयोजित होती है. इसके अलावा अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक साल में दो बार होती है. प्रांत और क्षेत्र स्तर पर भी बैठकें आयोजित की जाती हैं. हर साल गर्मियों में संघ शिक्षा वर्ग (ओटीसी) का आयोजन किया जाता है, जिसमें स्वयंसेवकों को वैचारिक और शारीरिक प्रशिक्षण दिया जाता है.

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लेखक के बारे में
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अखिलेश शर्मा
एक्ज़ीक्यूटिव एडिटर, NDTV इंडिया
पत्रकारिता में तीन दशक का अनुभव. राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक विषयों पर गहरी पकड़. BJP, संसद, सरकार से जुड़े विषयों पर पैनी नज़र. BBC वर्ल्ड सर्विस, आ... और पढ़ें
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