दिल्ली हाईकोर्ट ने ड्रग्स से जुड़े एक मामले में आरोपी ऋषभ बसोया को ब्रिटेन से भारत लौटने की अनुमति देने के लिए उसके खिलाफ जारी रेड कॉर्नर नोटिस यानी RCN और लुक आउट सर्कुलर यानी LOC को सीमित तौर पर निलंबित करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने साफ किया है कि यह राहत सिर्फ इसलिए दी जा रही है ताकि ऋषभ बसोया भारत आ सके. इसका मतलब यह नहीं है कि उसके खिलाफ चल रही जांच या कानूनी कार्रवाई खत्म हो गई है. भारत पहुंचते ही जांच एजेंसी को उसे पूछताछ करने या कानून के मुताबिक गिरफ्तार करने की पूरी आजादी होगी. यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट ने 19 अगस्त 2026 को दिया.
मामला दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में 2024 में दर्ज FIR से जुड़ा है. इस FIR में NDPS एक्ट की धारा 8, 20, 21, 25 और 29 के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस के मुताबिक इस केस में बड़ी मात्रा में कोकीन, मेफेड्रोन और गांजा बरामद किया गया था और जांच के दौरान एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल से जुड़े होने की बात सामने आई थी.दिल्ली पुलिस का का आरोप है कि ऋषभ बसोया इस कथित साजिश से जुड़ा हुआ था और उसने एक सह-आरोपी को एक गाड़ी दी थी, जिससे बाद में कोकीन बरामद हुई.
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ऋषभ बसोया भारतीय नागरिक, 2022 से ब्रिटेन में रह रहा
अर्जी में कहा गया कि ऋषभ बसोया भारतीय नागरिक है और उसके पास भारतीय पासपोर्ट है. वह साल 2022 से ब्रिटेन में रह रहा है और वहां University of West London से LL.B. (Hons.) की पढ़ाई कर रहा था. वह जून से सितंबर 2024 के बीच छुट्टियों में भारत आया था और इसके बाद दोबारा लंदन लौट गया था. जांच एजेंसी के मुताबिक इसके बाद वह जांच में शामिल होने के लिए भारत नहीं आया और विदेश में ही रहा.
जांच में शामिल नहीं होने के बाद उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी. दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने 7 जनवरी 2025 को उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया. इसके बाद 19 मई 2025 को उसे घोषित अपराधी यानी Proclaimed Offender घोषित कर दिया गया. इसके बाद जांच एजेंसी के अनुरोध पर इंटरपोल के जरिए उसके खिलाफ 2025 में रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया गया
ऋषभ बसोया ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस रेड कॉर्नर नोटिस को निलंबित या रद्द करने की मांग की थी. उसकी तरफ से कहा गया कि वह भारत वापस आना चाहता है, ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर करना चाहता है और जांच एजेंसी के सामने जांच में शामिल होना चाहता है. उसका दावा था कि उसे इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है और उसके खिलाफ अपराध से जोड़ने वाला कोई स्वतंत्र और ठोस सबूत नहीं है.
हालांकि राज्य की तरफ से इस मांग का विरोध किया गया. सरकारी वकील ने कहा कि RCN या LOC को सिर्फ भारत आने के लिए चुनिंदा तरीके से निलंबित नहीं किया जा सकता. राज्य की दलील थी कि अगर रेड कॉर्नर नोटिस पूरी तरह निलंबित कर दिया गया तो अंतरराष्ट्रीय अलर्ट हट जाएगा और आरोपी भारत आने के बजाय किसी दूसरे देश में भी जा सकता है. CBI ने भी, जो भारत और इंटरपोल के बीच समन्वय करने वाली एजेंसी है, अपने 16 जुलाई 2026 के जवाब में RCN को अस्थायी तौर पर निलंबित करने और दुबई स्थित भारतीय दूतावास में सीधे सरेंडर करने की सिफारिश नहीं की थी.
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बीच का रास्ता निकाला. कोर्ट ने माना कि राज्य की यह चिंता पूरी तरह नजरअंदाज नहीं की जा सकती कि RCN में राहत मिलने के बाद आरोपी किसी दूसरे देश की तरफ निकल सकता है. लेकिन कोर्ट ने यह भी देखा कि आरोपी ने भारत लौटकर जांच एजेंसी और अदालत के सामने पेश होने की इच्छा जताई है. इसलिए कोर्ट ने ऐसी व्यवस्था बनाई जिसमें वह भारत तो लौट सके, लेकिन उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी पूरी तरह सुरक्षित रहे.
भारत लौटने के रास्ते में आने वाली बाधा को किया गया सीमित
दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि ऋषभ बसोया के खिलाफ जारी RCN और LOC को सिर्फ उतनी ही सीमा तक निलंबित रखा जाएगा, जितनी जरूरत उसे भारत आने और देश में प्रवेश करने के लिए होगी. यह निलंबन किसी दूसरे मकसद के लिए नहीं होगा. यानी रेड कॉर्नर नोटिस या LOC को पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है, बल्कि सिर्फ भारत लौटने के रास्ते में आने वाली बाधा को सीमित समय और सीमित उद्देश्य के लिए हटाया गया है.
कोर्ट ने ऋषभ बसोया को आदेश दिया कि वह सात दिनों के भीतर अपनी पूरी यात्रा की जानकारी संबंधित अथॉरिटी को दे, जिसमें वह किस रास्ते से भारत आएगा और उसकी भारत पहुंचने की जानकारी शामिल होगी. यह जानकारी मिलने के बाद दिल्ली पुलिस संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी करेगी ताकि RCN और LOC के सीमित निलंबन के आधार पर उसे भारत में प्रवेश करने दिया जा सके.
ऋषभ के भारत आते उसे गिरफ्तार भी किया जा सकता है
लेकिन यहां सबसे अहम बात यह है कि भारत पहुंचते ही ऋषभ बसोया को गिरफ्तार किए जाने या उससे पूछताछ किए जाने का रास्ता खुला रहेगा. हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि जांच एजेंसी और दिल्ली पुलिस कानून के मुताबिक भारत पहुंचने पर उसे पूछताछ या गिरफ्तार कर सकती है. यानी कोर्ट ने उसे कोई गिरफ्तारी से सुरक्षा या मामले में क्लीन चिट नहीं दी है.
ऋषभ बसोया ने कोर्ट के सामने यह भी भरोसा दिया है कि अगर उसे भारत आने की अनुमति मिलती है तो वह अदालत की अनुमति के बिना भारत से बाहर नहीं जाएगा. उसने यह भी कहा कि वह अपनी यात्रा की पूरी जानकारी जांच एजेंसी को पहले से देगा और जांच में सहयोग करेगा. कोर्ट ने उसके इस आश्वासन को आदेश का हिस्सा बना दिया है.
कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर ऋषभ बसोया अपने दिए हुए आश्वासन का उल्लंघन करता है या कोर्ट को दी गई यात्रा की जानकारी के मुताबिक भारत नहीं आता है, तो उसके लिए दी गई यह सीमित राहत बिना किसी और आदेश के खत्म हो जाएगी. इसके बाद संबंधित एजेंसियां कानून के मुताबिक उसकी मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठा सकती हैं.
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