- बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने कुछ खास महिलाओं को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारा और वे विजयी रहीं
- रत्ना देबनाथ, जो आरजी कर जूनियर डॉक्टर की मां हैं, पानीहाटी सीट से टीएमसी उम्मीदवार को हरा दिया है
- संदेशखाली गैंगरेप की पीड़िता रेखा पात्रा ने हिंगलगंज विधानसभा सीट से टीएमसी उम्मीदवार को पराजित किया
बंगाल में उन महिलाओं को भी न्याय और इज्जत से जीने का अधिकार मिल गया है, जिन्होंने ममता राज में कभी बेतहाशा दर्द और जिल्लत सही थी. बीजेपी ने इन पर भरसा जताया और टिकट देकर चुनाव में उतारा. विधानसभा चुनावों में संदेशखाली की रेप पीड़िता रेखा पात्रा, आर जी कर जूनियर डॉक्टर की मां रत्ना देबनाथ और घरेलू सहायिका का काम करने वाली कलिता माजी ने जीत हासिल कर मानो अपने हक की लड़ाई जीत ली है. इन महिलाओं को टीएमसी के खिलाफ बीजेपी ने चुनावी मैदान में उतारा था. ये महिलाएं अब विधानसभा में दूसरों के हक की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं.
आरजी कर की पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ की जीत
रत्ना देवनाथ आरजीकर मेडिल कॉलेज में रूप और हत्या का शिकार हुई जूनियर डॉक्टर की मां हैं. ममता बनर्जी के सीएम रहते उनकी बेटी के साथ हुई दरिंदगी ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. अपनी बेटी के लिए न्याय की गुहार लगाने वाली मां रत्ना देबनाथ को बीजेपी ने उत्तर 24 परगना जिले की पानीहाटी विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा था. रत्ना ने TMC उम्मीदवार तीर्थंकर घोष को 28,836 वोटों के भारी मार्जिन से हरा दिया. वहीं, CPI(M) के उम्मीदवार कलतन दासगुप्ता भी काफी पीछे छूट गए. बता दें कि रत्ना देबनाथ को कुल 87,977 वोट मिले.

रत्ना देबनाथ ने चुनाव प्रचार के दौरान अपनी इस निजी त्रासदी को बंगाल की महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक नैतिक लड़ाई बना दिया. उन्होंने भावुक अंदाज में कहा था कि यह चुनाव सिर्फ वोटों के लिए नहीं, बल्कि उनकी बेटी के न्याय और बंगाल की बहनों की सुरक्षा के लिए है. रत्ना ने आरोप लगाया कि बंगाल की महिलाएं एक ऐसी सरकार के तहत पीड़ित हैं जो उनकी चीखों को अनसुना कर देती है.
संदेशखाली गैंगरेप रेखा महापात्रा बनी विधायक
रेखा महापात्रा संदेशखाली गैंगरेप की पीड़िता हैं. बीजेपी ने उनको हिंगलगंज से चुनावी मैदान में उतारा था. रेखा ने टीएमसी उम्मीदवार आनंद सरकार को 5421 वोटों से शिकस्त दे डाली. बता दें कि बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भी रेखा पात्रा को बशीरहाट लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था. तब वह जीत नहीं सकी थीं. लेकिन विधानसभा चुनाव में रेखा पात्रा ने टीएमसी उम्मीदवार को हरा दिया है.

दूसरों के घरों में बर्तन धोने वाली कालिता माजी चुनाव जीतीं
दूसरों के घरों में बर्तन धोकर अपने परिवार का गुजारा करने वाली मालिता माझी अब दूसरे कमजोरों की आवाज को बंगाल विधानसभा में उठाएंगी. ऑसग्राम से बीजेपी के टिकट पर चुनवा लड़ने वाली कालिता माझी ने टीमसी उम्मीदवार श्यामा प्रसन्ना लोहार को 12535 वोटों के अंदर से हरा दिया है. 2500 रुपये के बदले दूसरे के घरों का काम करने वाली कालिता अब विधायक बन गई हैं. 2021 में भी उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा था. लेकिन वह टीएमसी के अभेदानंद थांडर से 11,815 वोटों से हार गई थीं. अब विधानसभा में वह कमजोरों और गरीबों की आवाज बनेंगी.

बता दें कि 294 विधानसभा सीटों वाले बंगाल में बीजेपी गठबंधन ने 206 सीटें के साथ प्रचंड जीत हासिल कर ली है. वहीं टीएमसी को 81 सीटें मिली हैं. आरजीकर रेप पीड़िता की मां रत्ना का चुनावी सफर चुनौतियों से भरा रहा. कैंपेन के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेरकर डराने-धमकाने और परेशान करने की कोशिश की. हालांकि इन धमकियों ने उनके संकल्प को और मजबूत किया. उन्होंने कहा था कि बंगाल की जनता TMC के शासन से तंग आ चुकी है और यह चुनाव उनके लिए पलटवार करने का एक सुनहरा मौका है.
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