Bengal Election Result 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 206 सीटें जीतकर तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत कर दिया है. 2021 के विधानसभा चुनाव में 215 सीटें जीतने वाली तृणमूल कांग्रेस महज 81 सीटों पर सिमट गई है. बीजेपी को पिछले चुनाव में 77 सीटें मिली थीं और इस बार उसने ढाई गुना ज्यादा सीटें जीतकर पहली बार सरकार बनाने का रास्ता तैयार किया है.हालांकि चुनावी हार के बाद भी तीखे तेवरों से ममता बनर्जी ने दिखा दिया है कि वो इस सियासी लड़ाई को आगे तक ले जाएंगी. ममता बनर्जी ने बीजेपी पर चुनाव आयोग से साठगांठ कर 100 सीटों पर वोट लूटने का आरोप लगाया है. वो आज शाम को अभिषेक बनर्जी के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करने वाली हैं.
28 साल पुरानी पार्टी दोराहे पर खड़ी
ममता बनर्जी ने कांग्रेस के नरम रुख से नाराज होकर 1998 में तृणमूल कांग्रेस बनाई थी और लेफ्ट के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए सड़क पर उतरी थीं.फिर नंदीग्राम और सिंगूर ने तृणमूल कांग्रेस को ऐसा ब्रह्मास्त्र दिया, जिससे लेफ्ट के 34 साल पुराने किला ध्वस्त होने में देर नहीं लगी. हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बंगाल में वाम मोर्चे से टीएमसी में सत्ता परिवर्तन तो हुआ, लेकिन सिंडिकेट, राजनीतिक हिंसा का दौर वैसे ही जारी रहा. बंगाल विधानसभा चुनाव में इसका नुकसान टीएमसी को हुआ.
टीएमसी का वोट बैंक बरकरार
ममता बनर्जी सड़क की राजनीति और अपने जुझारू स्वभाव के लिए जानी जाती हैं. बंगाल में बीजेपी को 45 और तृणमूल को करीब 40 फीसदी वोट मिला है. ये संकेत देता है कि टीएमसी का काडर वोट कायम है और पार्टी जन आंदोलनों के जरिये भाजपा सरकार को घेरने की कोई कसर नहीं छोड़ेगी. सत्ता खोने के बाद वो फिर से स्ट्रीट फाइटर की भूमिका में लौट सकती हैं.ममता ने चुनाव परिणामों को सीटों की लूट करार दिया है और 90 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने जैसे मुद्दों को लेकर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ने का संकेत दिया है
संगठन में बड़ा बदलाव संभव
ममता बनर्जी बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी के हार के कारणों की समीक्षा के बाद कड़े कदम उठा सकती हैं. पार्टी में बुजुर्ग नेताओं की जगह युवा तुर्क को आगे लाने की पुरानी मांग फिर उभर सकती है. भतीजे अभिषेक बनर्जी को ममता बनर्जी का उत्तराधिकारी माना जाता है.वो डायमंड हार्बर लोकसभा सीट से सांसद भी हैं और पार्टी की युवा शाखा के अध्यक्ष भी हैं.
बीजेपी ने भ्रष्टाचार और सिंडिकेट राज को मुद्दा बनाया
भाजपा ने बंगाल चुनाव में भय, भ्रष्टाचार, माफियाराज, सिंडिकेट राज को बड़ा मुद्दा बनाया था. सत्ता विरोधी असंतोष का सामना कर रही तृणमूल के लिए ऐसे आरोपों ने काफी नुकसान पहुंचाया और शहरी भद्रलोक का वोटर भी बीजेपी की ओर शिफ्ट कर गया.

Mamata Banerjee
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अभिषेक बनर्जी की भूमिका बढ़ेगी
71 साल की ममता बनर्जी की जगह अभिषेक बनर्जी की जिम्मेदारी बढ़ाई जा सकती है. संगठन चुनाव से पहले ही उन्होंने एक व्यक्ति, एक पद और आईपैक के जरिये डेटा सुधारों की शुरुआत की थी. अब पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने की पूरी जिम्मेदारी उन पर हो सकती है. ममता बनर्जी के करिश्मे के साथ-साथ अभिषेक की अलग शैली और आक्रामक चुनावी प्रबंधन भाजपा के डबल इंजन के नैरेटिव से मुकाबला करने में मदद कर सकता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 की हार के बाद ममता बनर्जी पर्दे के पीछे मार्गदर्शक की भूमिका में जा सकती हैं. युवा वोटरों को साधने के लिए अभिषेक बनर्जी को पार्टी की रणनीति का मुख्य सूत्रधार बनाया जा सकता है.
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TMC की चुनौतियां बढ़ीं
भाजपा की बड़ी जीत के बाद TMC के बचे हुए विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं को साथ जोड़े रखना पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी. इस चुनाव में मुस्लिम वोट बैंक का बिखराव ISF, AJUP और AIMIM के बीच बंटवारा पार्टी की हार का एक बड़ा कारण रहा है. इस भरोसे को दोबारा जीतना पार्टी के लिए जरूरी होगा.
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सीबीआई और ईडी के केस चुनौती बनेंगे
अभिषेक बनर्जी समेत टीएमसी के कई बड़े नेताओं के खिलाफ मामले चल रहे हैं. केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED/CBI) के भ्रष्टाचार के मामलों से निपटना भी पार्टी नेताओं के लिए मुश्किल भरा होगा.TMC के लिए अब अस्तित्व की लड़ाई शुरू हो गई है, जहां ममता बनर्जी पार्टी का चेहरा बनी रहेंगी, वहीं अभिषेक बनर्जी को संगठन की ऑपरेशनल कमान सौंपी जा सकती है, ताकि2029 के लोकसभा चुनावों में पार्टी दोबारा वापसी कर सके. ममता की हार बंगाल में कमजोर पड़ चुके उसके विरोधियों लेफ्ट और कांग्रेस के लिए उभरने का मौका है. अगर टीएमसी कमजोर रवैया दिखाती है, तो दूसरे विपक्षी दलों को और उभरने का मौका मिलेगा, जिससे भाजपा विरोधी वोटों में और ज्यादा सेंध लगेगी.
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