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This Article is From Dec 07, 2025

शव के साथ सड़क जामकर किया प्रदर्शन तो जाना पड़ेगा जेल, इस राज्य में लागू हुआ ये सख्त नियम

इस संबंध में सरकार ने अधिसूचना जारी की है. इसके मुताबिक, शव का राजनीतिक प्रदर्शन या विरोध करने पर 6 माह से 5 वर्ष तक की कैद और जुर्माने की सजा होगी.

शव के साथ सड़क जामकर किया प्रदर्शन तो जाना पड़ेगा जेल, इस राज्य में लागू हुआ ये सख्त नियम
विरोध-प्रदर्शन करने लोग.
  • राजस्थान में मृत शरीर सम्मान अधिनियम, 2023 लागू कर शव के साथ विरोध प्रदर्शन पर सख्त पाबंदी लगाई गई है.
  • अधिनियम के तहत शव के साथ प्रदर्शन करने पर छह महीने से पांच वर्ष तक कैद और जुर्माने की सजा होगी.
  • परिवार के सदस्य अगर शव के साथ विरोध में भाग लेते हैं तो उन्हें दो वर्ष तक जेल हो सकती है.

हादसा हो या हत्या, लापरवाही हो या साजिश... भारत के कई इलाकों में शव के साथ विरोध-प्रदर्शन करने का चलन है. हादसे में जान गई, मृतक का पार्थिव देह सड़क पर रखकर हजारों लोग विरोध करने उतर जाते हैं. किसी की हत्या हुई, जांच सही नहीं चल रही, लोग अपनी मांग पूरी करने तक शव का दाह-संस्कार रोक देते हैं. लेकिन अब ऐसा करना मुश्किल होगा. क्योंकि लाश के साथ प्रदर्शन करने पर नकेल कसने के लिए सरकार ने सख्त अधिनियम बना दिया है. इस अधिनियम का नाम है- मृत शरीर सम्मान अधिनियम. इस अधिनियम के तहत शव के साथ विरोध और राजनीतिक प्रदर्शन करने पर 6 महीने से 5 साल तक की कैद और जुर्माने की सजा होगी. 

राजस्थान में मृत शरीर सम्मान अधिनियम लागू

इस नियम को लागू किया गया है राजस्थान में. राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है, जहां मृत शरीर सम्मान अधिनियम, 2023 को पूर्ण रूप से लागू कर दिया गया है. इस नए कानून से सड़कों या सार्वजनिक स्थानों पर मृतकों के शव रखकर विरोध प्रदर्शन की प्रथा हमेशा के लिए बंद हो गई है. 

मृतक के परिजन को भी जाना पड़ेगा जेल 

इस संबंध में भाजपा सरकार ने अधिसूचना जारी की, जो हाल के घटनाक्रमों के बीच सख्त सजाओं का प्रावधान करती है. अधिनियम के तहत गैर-परिवार सदस्य द्वारा शव का राजनीतिक प्रदर्शन या विरोध करने पर 6 माह से 5 वर्ष तक की कैद और जुर्माने की सजा होगी. परिवार के सदस्य अगर ऐसा करने की अनुमति दें या भाग लें तो अधिकतम 2 वर्ष की जेल हो सकती है. 

शव लेने से इनकार पर भी होगी सजा

अधिसूचना के मुताबिक, कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा 24 घंटे का नोटिस मिलने के बाद शव लेने से इनकार करने पर परिवारजनों को 1 वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है. इसके बाद पुलिस शव कब्जे में लेगी, आवश्यक वीडियोग्राफी युक्त पोस्टमार्टम कराएगी और लोक प्राधिकारियों से अंतिम संस्कार करवाएगी.

हॉस्पिटल के लिए भी प्रावधान

पुलिस थाने संदिग्ध दुरुपयोग वाले शव जब्त करेंगे, मजिस्ट्रेट और जिला एसपी को सूचित करेंगे और अधिकृत अस्पतालों में जांच कराएंगे. अस्पताल बकाया बिलों के कारण शव रोक नहीं सकेंगे. जबकि लावारिस शवों का राजस्थान एनाटॉमी एक्ट, 1986 के तहत निपटारा होगा, जिसमें जेनेटिक डेटाबैंक और अज्ञात मौतों का डिजिटल ट्रैकिंग शामिल है.

पूर्व कांग्रेस सरकार के दौरान पारित हुआ कानून

गौरतलब है कि यह कानून जुलाई 2023 में पूर्व कांग्रेस सरकार के दौरान पारित हुआ था. तत्कालीन संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने 2014-2018 में 82 घटनाओं के 306 तक बढ़ने का हवाला दिया था, जो अक्सर नौकरी या मुआवजे की मांग पर आधारित थीं. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे मृत शरीर की गरिमा और मानवाधिकारों की रक्षा बताया.

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