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माधव, मुधोल हाउंड, शिकारी पक्षी.. इस बार गणतंत्र दिवस होगा बेहद खास, देखिएगा जरूर

गणतंत्र दिवस परेड इस बार बेहद खास रहने वाला है. इस बार कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना बेहद खास जानवरों के साथ दिखने वाले हैं. खास नस्ल के कुत्ते से लेकर शिकारी पक्षी तक यहां आपको दिखेंगे.

माधव, मुधोल हाउंड, शिकारी पक्षी.. इस बार गणतंत्र दिवस होगा बेहद खास, देखिएगा जरूर
कर्तव्य पथ पर देश की शान
  • गणतंत्र दिवस परेड के लिए भारतीय सेना की तैयारी लगातार जारी है
  • इस बार के परेड बेहद खास रहने वाला है, क्योंकि इस बार आपको कर्तव्य पथ पर दिखेंगे कुछ खास जानवर
  • कुत्ते, शिकारी बाज से लेकर जास्कर पोनी आपको इसबार लुभाने वाले हैं
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नई दिल्ली:

दिल्ली में कड़ाके की ठंड के बीच दिल्ली के परेड ग्राउंड पर बूटों की गरमाहट है. धुंध और ठंड से ढकी सुबह. सूबेदार जब परेड करने वाले जवानों से पूछते हैं. जोश कैसा है  तो जवाब परेड की कदम कदम बढ़ाए जा की लय के साथ ऊंची आवाज में एक सुर में जवान जी. सर बोलकर देते हैं. घनी मूंछ से ढ़के सूबेदार के चेहरे पर हल्की मुस्कुराहट और जबान में और सख्ती आ जाती है. परेड ग्राउंड में जाट रेजीमेंट और आसाम रेजीमेंट के जवान 26 जनवरी की परेड में अपना अनुशासन और जलवा दिखाने को तैयार है. लेकिन 26 जनवरी की इस परेड में  कई अनोखी चीजें देखने को मिलेगी. मसलन ड्रोन और रोबोटिक हथियारों के अलावा ड्रोन को ठीक करने वाली चलती फिरती कार्यशाला दिखेगी...

लड़ाई आजकल बहुत हद तक तकनीकी पर निर्भर हो गई है इसी के चलते मिसाइलें और टैंक तो रहेंगे लेकिन इनके साथ भारतीय ड्रोन को चलाने वाली रेजीमेंट भी इस परेड की शोभा बनेंगे. यही नहीं इन ड्रोन को मौके पर ही ठीक करने वाला चलता फिरता एक ड्रोन कार्यशाला भी आपको परेड में दिखेगा..जहां खराब होने वाले ड्रोन को तुरंत ठीक किया जाएगा. खासतौर पर इसको इस तरह से डिजायन किया गया है कि ये दूरदराज और दुर्गम जगहों पर भी पहुंच पाए. परेड में आपको भारतीय सेना के रोबोटिक डॉग्स भी दिखेगा. संजय नाम का रोबोटिक डॉग्स मल्टी टास्क में माहिर है.     

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परेड में सिर्फ रोबोटिक डॉग्स ही नहीं भारतीय नस्ल के डॉग्स भी पहली बार दिखेंगे                                    

इस साल 26 जनवरी को होने वाले परेड में रोबोटिक डॉग्स के अलावा असली के मूक योद्धा आपको दिखेंगे. अब तक विदेशी नस्लों के कुत्तों को ट्रेंनिंग देने के बाद सेना उनका इस्तेमाल करती थी लेकिन अब भारतीय नस्ल के कुत्तों को भी पहली बार सेना ने अपने दस्ते में शामिल किया है. ये कुत्ते दो तरह के हैं पहला डिटेक्शन यानि विस्फोटकों और नशीला पदार्थ की पहचान करने वाले और दूसरा प्रोटेक्शन यानि आतंकवादियों या दुश्मन पर हमला करने वाले. भारतीय नस्ल के कुत्तों में मुधोल हाउंड. रामपुर हाउंड.चिप्पी पराई, कोम्बई और राजापलायम नस्ल के शामिल है. इन सब कुत्तों को आरवीसी यानि रिमाउंट एंड वेटनरी कार्प में तैयार किया गया है जबकि इनकी ट्रेनिंग आर्मी डाग ट्रेनिंग स्कूल में दी गई है. आर्मी डॉग्स पूरे सेप्शल फोर्सेस के साथ पूर् प्रोटेक्टिव गेयर्स, कैमरे, ट्रैकिंग डिवाइस और कम्यूनिकेशन डिवाइस के साथ लैस होकर वार जोन में जाते हैं जिससे सेना के जवानों को अपना बचाव करने और दुश्मन को मारने में सहूलियत होती है. इनमें जर्मन शेफर्ड प्रोटेक्टिव यानि दुश्मन पर हमला करने के लिए स्पेशल फोर्सेज के साथ रहता है जबकि दक्षिण भारतीय नस्ल कंबई नस्ल का सेना का डाग माधव लैंड माइंस की पहचान करने में मदद करता है. अलग अलग तरह के भारतीय सेना के डॉग्स अलग अलग काम में माहिर है.        

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माधव भी लेगा 26 जनवरी की परेड में हिस्सा 

कम्बई नस्ल का माधव भी इस परेड में हिस्सा लेगा. कम्बई दक्षिण भारत में कुत्तों की एक नस्ल है. इसका मुख्य काम डिटेक्शन जैसे काम का अंजाम देकर जवान को सुरक्षित रखना है. उत्तर भारत की एक नस्ल रामपुर हाऊंड के कुत्ते को शामिल किया गया है. ये उत्तराखंड के रामपुर में ग्रे हाउंड के साथ क्रॉस करके ये नस्ल बनी है. बाकी सारी दक्षिण भारतीय नस्ल के सेना के डॉग्स को शामिल किया गया है.
                                                                                                                                                                                                     

बैक्ट्रियन ऊंट और जास्कर पोनी भी परेड में हिस्सा लेगी 

चीन बार्डर पर लेह लद्दाख जैसे ठंड के रेगिस्तान में भारतीय सेना को रसद पहुंचाने में मदद करने वाला बैक्ट्रियन कैमेल भी 26 जनवरी के परेड में हिस्सा लेंगे...सेना के कंटीजेन में दो बैक्ट्रियन कैमेल हिस्सा लेंगे...इस ऊंट की खासियत है कि ये 15000 फिट की ऊंचाई पर माइनस डिग्री तामपमान पर दुर्गम रास्तों पर बिना खाए पीए कई दिन तक चल सकता है...भारतीय सेना इसका इस्तेमाल अपने सभारी भरकम सामान को पहुंचाने में भी करती है..ये दुर्गम रास्तों पर 250 किमी ग्राम तक सामान लादकर सेना के अंतिम चौकी तक सामान पहुंचा सकती है...इसको विशेष तौर पर एलएसी के पास दुर्गम रास्तों पर सामान पहुंचाने में किया जा है.

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जास्कर पॉनी भी परेड में दिखेगी 

26 जनवरी का दूसरा आकर्षण जास्कर पॉनी है. पॉनी में ये दुर्लभ प्रजाति की है. लद्दाख के जांस्कर घाटी में पाए जाने वाली पॉनी 60 किलोग्राम तक सामान लादकर ये खडी चढ़ाई और ग्लेशियर से भरे पहाड़ों पर जा सकती है. 2020 में सियाचीन ग्लेशियर में भारतीय सेना के साथ जांस्कर पॉनी ने सियाचीन के इन दुर्गम रास्तों को पार किया था. इंसान के साथ इसका सहयोगी व्यवहार और अत्याधिक ठंड के वक्त सेना के मजबूत सहयोग के चलते इस बार इसको परेड में शामिल किया जा रहा है.

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परेड में शिकारी पक्षी भी दिखेंगे                                  

परेड में चार इलीट रैप्टर पक्षी भी दिखेंगे...ये शिकारी पक्षी होते हैं इनके सिर पर एक छोटा सा कैमरा रहता है और इनको इस तरह से तैयार किया गया ताकि बेहद छोटे ड्रोन को भी ये गिरा सके...इन रैप्टर्स का प्रयोग सेना दुश्मन की टोह लेने और छोटे ड्रोन को  गिराने में इस्तेमाल किया जाता है. पहली बार परेड में दिखेंगे लद्दाख का बैक्ट्रियन ऊंट.
 

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