- राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले मके बीच कैसल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. राजू वी. मनवानी ने बड़ा खुलासा किया है
- डॉ. राजू मनवानी ने बताया कि सिंधी समुदाय की ओर से 26 जनवरी 2021 को उन्होंने 200 चांदी की ईंटें दान की थीं
- दान किए गए चांदी के इस्तेमाल को लेकर डॉ. राजू ने जांच और रसीद की मांग की है ताकि सही उपयोग का पता चले
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं. पिछले दिनों खबर आई थी कि टिन्नू यादव समेत बहुत से सेवादार अपने रसूख का इस्तेमाल कर किसी की भी वीआईपी एंट्री मंदिर में करवा देते थे. आरोप है कि इन्हीं कथित वीआईपी लोगों से बिना रसीद के चंदा/चढ़ावा लिया जाता था. इस बीच एक दानदाता ने अपने दान को लेकर चिंता जताई है.
कैसल ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. राजू वी. मनवानी ने दावा किया कि उन्होंने 26 जनवरी 2021 को पूरे सिंधी समुदाय की ओर से राम मंदिर के लिए चंपत राय को एक-एक किलो वजन वाली 200 चांदी की ईंटें सौंपी थीं. उनको इस दान के लिए तब कोई रसीद नहीं दी गई थी. चंपत राय ने कहा था कि वे पहले जांच करेंगे कि इस चांदी का इस्तेमाल कैसे और कहां करना है. फिर वे ये बात उनको भी बताएंगे.
#WATCH | Leh, Ladakh | On alleged Ayodhya Ram Mandir donations embezzlement case, Dr. Raju V Manwani, Chairman & Managing Director, Castles Group Of Companies says, "On behalf of the entire Sindhi community, 200 silver bricks made each weighing one kilogram and were handed over… pic.twitter.com/xfUFZeFGtV
— ANI (@ANI) June 24, 2026
डॉ. राजू ने कहा कि उन्होंने कभी इस बात को गंभीरता से नहीं उठाया कि उनकी दान की गई चांदी मंदिर में जाएगा या कहीं और. उन्होंने कहा कि अब चढ़ावा चोरी की खबरें देखने के बाद उनको ये चिंता होने लगी कि क्या उनकी दान की गई चांदी कहीं गलत जगह तो नहीं चली गई.
डॉ. राजू ने कहा कि चंदा चोरी की बात सुनने के बाद उन्होंने रसीद और इस बात की जानकारी मांगी कि चांदी का इस्तेमाल कहां हुआ. उन्होंने कहा कि अगर दान की गई चांदी का इस्तेमाल मंदिर के लिए नहीं हुआ, तो यह बहुत दुख की बात है. और अगर मंदिर के लिए दिए गए दान का इस्तेमाल कहीं और किया जाता है तो इसका असर भविष्य में दान देने वालों पर पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि जब उन्होंने 200 चांदी की ईंटें दान दी थीं तब उनकी कीमत लगभग 1.5 से 2 करोड़ रुपये थी. आज इसकी कीमत 6 से 7 करोड़ रुपये है. लोगों को निश्चित रूप से अपने दिए गए दान के बारे में पूछने का अधिकार है. डॉ. राजू ने कहा कि पीएम मोदी और सीएम योगी के नेतृत्व में कुछ भी असंभव नहीं है, इसलिए अगर SIT बनाई गई है, तो कम से कम उन दोषियों को सजा मिलनी चाहिए, जिन्होंने इस अधिकार का गलत इस्तेमाल किया है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं