- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 18 से 21 मई को वियतनाम और दक्षिण कोरिया के दौरे पर रहेंगे
- वियतनाम दौरे में ब्रह्मोस मिसाइल डील अंतिम चरण में है, जिसकी कीमत लगभग 5800 रुपये है
- ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 290 किलोमीटर है और यह वियतनाम की समुद्री सुरक्षा मजबूत करेगी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 18 से 21 मई 2026 तक वियतनाम और दक्षिण कोरिया के अहम दौरे पर रहेंगे. इस दौरे का मकसद हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करना है.साथ ही रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और रक्षा तकनीक में साझेदारी बढ़ाने पर भी जोर रहेगा. राजनाथ सिंह सबसे पहले 19 मई तक वियतनाम में रहेंगे, इसके बाद वह 19 से 21 मई तक दक्षिण कोरिया के दौरे पर रहेंगे. रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत दोनों देशों के साथ सैन्य सहयोग, रक्षा उद्योग साझेदारी और समुद्री सहयोग को नई मजबूती देना चाहता है.
वियतनाम में ब्रह्मोस डील पर नजर
रक्षा मंत्री के वियतनाम दौरे का सबसे बड़ा मुद्दा ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की संभावित डील मानी जा रही है. भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित यह मिसाइल दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइलों में शामिल है. सूत्रों के मुताबिक भारत और वियतनाम के बीच यह समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है. इस डील की कीमत करीब 5,800 करोड़ रुपये बताई जा रही है. अगर समझौता होता है तो वियतनाम ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बन जाएगा. इससे पहले फिलीपींस और इंडोनेशिया यह मिसाइल खरीद चुके हैं.
अगर ब्रह्मोस मिसाइल की बात करें तो यह आवाज की गति से करीब तीन गुना तेज उड़ान भर सकती है.इसकी मारक क्षमता लगभग 290 किलोमीटर तक मानी जाती है.दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते दबाव को देखते हुए यह मिसाइल वियतनाम की समुद्री सुरक्षा को काफी मजबूत कर सकती है. इसके अलावा भारत वियतनाम को तकनीकी सहयोग का भी प्रस्ताव दे सकता है. इसमें सुखोई-30 लड़ाकू विमान और किलो क्लास पनडुब्बियों की मरम्मत और अपग्रेड शामिल है. ये प्लेटफॉर्म वियतनाम ने पहले रूस से खरीदे थे.
वियतनाम दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि भारत और वियतनाम की व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 साल पूरे हो रहे हैं. राजनाथ सिंह वहां के रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग से भी अहम बैठक करेंगे. रक्षा मंत्री 19 मई को वियतनाम के पूर्व राष्ट्रपति हो ची मिन्ह की 136वीं जयंती पर उनके स्मारक पर श्रद्धांजलि भी देंगे.
दक्षिण कोरिया में रक्षा तकनीक पर जोर
इसके बाद राजनाथ सिंह दक्षिण कोरिया पहुंचेंगे.वहां वह रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक के साथ बैठक करेंगे.दोनों देश रक्षा संबंधों की समीक्षा करेंगे और नए सहयोग के रास्ते तलाशेंगे.राजनाथ सिंह दक्षिण कोरिया की रक्षा खरीद एजेंसी डापा के प्रमुख ली योंग-चेओल से भी मुलाकात करेंगे. इसके अलावा वह भारत-कोरिया बिजनेस राउंडटेबल की अध्यक्षता करेंगे.
भारत और दक्षिण कोरिया ने हाल ही में नया रक्षा इनोवेशन प्लेटफॉर्म KIND-X लॉन्च किया है. इसका मकसद दोनों देशों की रक्षा कंपनियों, स्टार्टअप, निवेशकों और विश्वविद्यालयों को जोड़ना है. दोनों देश मिलकर ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड मटेरियल जैसी नई सैन्य तकनीकों पर काम करेंगे. यह मॉडल K9 वज्र होवित्जर प्रोजेक्ट से प्रेरित माना जा रहा है. भारत और दक्षिण कोरिया पहले से इस तोप का संयुक्त निर्माण कर रहे हैं.
भारत आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घरेलू रक्षा उत्पादन बढ़ाना चाहता है. ऐसे में दक्षिण कोरिया की रक्षा तकनीक और शिप बिल्डिंग क्षमता भारत के लिए काफी अहम मानी जा रही है. जानकार जहां फिलीपींस, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देश दक्षिण चीन सागर में चीन के दबदबे को खासे परेशान हैं. ऐसे में ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें इन देशों की रणनीतिक ताकत को काफी बढ़ा सकती हैं. भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और दक्षिण कोरिया की ‘इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी' के बीच बढ़ती साझेदारी से क्षेत्र में भारत की साख और मजबूत होती दिख रही है.
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