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राजस्थान हाइकोर्ट ने पॉक्सो केस के आरोपी को सोशल मीडिया की शर्त पर दी जमानत, मोबाइल या ई-मेल बदलना पड़ेगा भारी

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न के आरोपी को सशर्त जमानत दे दी है. जज ने आरोपी को 1 साल तक सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है.

राजस्थान हाइकोर्ट ने पॉक्सो केस के आरोपी को सोशल मीडिया की शर्त पर दी जमानत, मोबाइल या ई-मेल बदलना पड़ेगा भारी
Social media Ban

Rajasthan High Court Landmark Bail Condition: राजस्थान की जोधपुर हाईकोर्ट ने  यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी को जमानत देने के साथ उसे अनोखी सजा दी है. कोर्ट ने आरोपी को एक साल तक सोशल मीडिया  के इस्तेमाल पर एक साल का बैन लगाया है. जिसके तहत आरोपी इंस्टाग्राम, फेसबुक और स्नैपचैट जैसी सभी प्लैटफार्म से दूर रहेगा.

एक साल तक किसी भी सोशल मीडिया के उपोयग पर प्रतिबंध

कोर्ट ने जस्टिस अशोक कुमार जैन सुनावाई पर फैसला देते हुए आरोपी को चेतावनी दी कि यदि आरोपी को इस एक साल तक किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए पाया गया.  तो जमानत का आदेश रद्द कर दिया जाएगा. चाहे वह अपने नाम से हो, या किसी काल्पनिक नाम से, अपने मोबाइल/ई-मेल आईडी का उपयोग करके या किसी काल्पनिक ई-मेल आईडी का उपयोग करके. इसके अलावा आदेश में आरोपी को पीड़िता या उसके परिवार के सदस्यों से किसी भी तरीके से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क करने से भी रोक लगाई गई है.

 22 फरवरी 2026 का है मामला

बता दें कि यह फैसला जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकल-न्यायाधीश वाली जोधपुर बेंच ने बीकानेर के मुक्ता प्रसाद नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज एक मामले के अधीन दिया है. जिसे  22 फरवरी को नाबालिग पीड़िता के पिता के जरिए रिपोर्ट दर्ज कराई थी.  जिसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने 1 फरवरी से 20 फरवरी के बीच यौन उत्पीड़न, पीछा करने और साइबर-संबंधित अपराध किए थे.

ठोस सबूतों के अभाव में चेतावनी के साथ मिली जमानत

इस संबंध में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को 24 फरवरी को गिरफ्तार किया था और तब से बीएनएस तथा पॉक्सो अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है. जिसके बाद जमानत के लिए याचिका दायर की गई थी. केस की सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने दलील देते हुए कहा कि केवल जुबानी आरोपों के अलावा शिकायतकर्ता के जरिए एफआईआर में लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए कोई भी ठोस सबूत  नहीं है.साथ ही केस को लेकर पुलिस की भी जांच पूरी हो चुकी है, ऐसे में आरोपी को अब हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है. उसके फरार होने की कोई संभावना नहीं है.

कुछ शर्तें लगाकर जमानत देना समझा उचित

दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपों की प्रकृति को देखते हुए, याचिकाकर्ता पर कुछ शर्तें लगाकर जमानत देना उचित समझा है, ताकि पीड़ित की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित की जा सके. जिसके तहत जमानत देते हुए जस्टिस जैन ने आरोपी को निर्देश दिया कि वह ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार 50,000 रुपए का निजी मुचलका और उतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करे. इसके अलावा एक साल तक सोशल मीडिया पर पाबंदी भी लगाई.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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