निकाय चुनाव के नतीजे आते ही राजस्थान में सियासी पारा चढ़ गया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व सीएम अशोक गहलोत आमने-सामने आ गए हैं. चुनाव में प्रशासन के दुरुपयोग को लेकर गहलोत के हमले के बाद सीएम भजनलाल ने भी जमकर पलटवार किया है.
अशोक गहलोत ने चुनाव में सरकार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर हमला बोला था. जवाब में मुख्यमंत्री ने भी गहलोत के वार्ड की हार से लेकर कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान और परिवारवाद की राजनीति तक पर पलटवार किया.
गहलोत का वार- नहीं पता था राजस्थान बर्बाद कर देंगे
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि मैं भजनलाल को भला आदमी समझता था, सोचा नहीं था कि वे इस तरह के चुनाव करवाकर राजस्थान को बर्बाद कर देंगे.
गहलोत ने आरोप लगाया कि निकाय चुनाव में सरकार ने हर हथकंडा अपनाया. पार्षदों की खरीद-फरोख्त हुई, उन्हें उठाया गया, उनके परिवारों को धमकाया गया और पुराने मामले खोले गए.
उन्होंने चुनाव में हरियाणा और यूपी पुलिस के इस्तेमाल तक का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार के दबाव में काम करने वाले अधिकारियों ने IAS और IPS कैडर को कलंकित किया है.
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CM का पलटवार- खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे
गहलोत के आरोपों पर सीएम भजनलाल शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि ये 'खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे' वाली कहावत है. भाजपा की ऐतिहासिक जीत से पूर्व मुख्यमंत्री बौखला गए हैं.
भजनलाल ने कहा कि गहलोत अपना वार्ड तक हार गए हैं और अब हार का ठीकरा जनता और प्रशासन पर फोड़ रहे हैं. उन्हें अपनी और अपनी पार्टी की कमियों को देखना चाहिए.
सीएम ने कहा कि गहलोत का गुस्सा PCC चीफ गोविंद सिंह डोटासरा पर है और कांग्रेस में अंदरूनी लड़ाई चल रही है. उन्होंने कहा कि गहलोत के बयानों में खुद विरोधाभास है - जब मैं रोड शो कर रहा था तो कहते थे CM को रोड शो नहीं करना चाहिए, अब कह रहे हैं CM ने रोड शो किया तो हमें भी करना चाहिए था.
परिवारवाद पर भी वार, परिसीमन पर भी घेरा
मुख्यमंत्री ने परिवारवाद को लेकर भी गहलोत और कांग्रेस हाईकमान पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता अपने बेटों की लॉन्चिंग में लगे हैं, सोनिया गांधी राहुल गांधी को लॉन्च करने में लगी हैं तो गहलोत अपने बेटे वैभव गहलोत को आगे बढ़ा रहे हैं.
वहीं गहलोत के वार्ड परिसीमन में गड़बड़ी के आरोप पर सीएम ने कहा कि जिन वार्डों पर अब सवाल उठा रहे हैं, वो एक साल पहले बने थे, तब आपत्ति क्यों नहीं की? वार्डों का गठन नियमों के मुताबिक हुआ है.
कुल मिलाकर निकाय चुनाव के बाद अब पंचायत चुनाव से पहले गहलोत बनाम भजनलाल की ये जुबानी जंग और तेज होने के आसार हैं.
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