- पंजाब कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष पद पर कोई बदलाव नहीं किया और राजा वडिंग को अध्यक्ष बनाए रखा गया है
- चरणजीत सिंह चन्नी को प्रचार समिति का प्रमुख और विजय इंदर सिंगला को चुनाव प्रबंधन का जिम्मा दिया गया है
- राहुल गांधी और पार्टी नेतृत्व ने सर्वे और रिपोर्ट के आधार पर चन्नी का समर्थन पाया लेकिन बदलाव नहीं किया गया
कांग्रेस ने पंजाब प्रदेश अध्यक्ष पद पर कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है. अमरिंदर सिंह राजा वडिंग पंजाब कांग्रेस के प्रधान बने रहेंगे. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी को प्रचार समिति का प्रमुख बनाया गया है. दलित समाज से आने वाले चन्नी प्रदेश अध्यक्ष की रेस में थे. वहीं, इस रेस में शामिल एक अन्य नेता विजय इंदर सिंगला को चुनाव प्रबंधन और समन्वय समिति की कमान सौंपी गई है.
कांग्रेस ने खत्म किया सस्पेंस
करीब दो महीने से चले आ रहे सस्पेंस को खत्म करते हुए कांग्रेस ने जो प्रेस रिलीज जारी की है उसमें चन्नी का नाम सबसे ऊपर है. वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा विधायक दल के नेता बने रहेंगे. पूर्व उप मुख्यमंत्री और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर कमिटी और सांसद अमर सिंह को मैनिफेस्टो कमिटी की ज़िम्मेदारी दी गई है.राजा वडिंग के साथ तीन कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए हैं. इनके से दो दलित समाज और एक पिछड़े वर्ग से हैं. सुखविंदर सिंह डैनी रविदासिया और राजकुमार वेरका वाल्मीकी समाज से हैं. दोनों नेता अमृतसर से ही हैं. इनके अलावा पिछड़े वर्ग से आने वाले संगत सिंह गिलजियाँ को भी कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है.
दरअसल पंजाब कांग्रेस के कुछ विधायकों और पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी उम्मीदवार रहे कई नेताओं ने चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने को लेकर कांग्रेस आलाकमान को पत्र लिखा था. इसके बाद से प्रदेश कांग्रेस के बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई. चन्नी के अलावा हिंदू चेहरे के तौर पर सिंगला भी प्रदेश अध्यक्ष की रेस में शामिल थे. बाजवा, रंधावा ने भी बड़ी ज़िम्मेदारी को लेकर कोशिशें शुरू कर दी. हालांकि प्रभारी भूपेश बघेल चुनाव से कुछ महीने पहले किसी भी तरह के बदलाव के ख़िलाफ़ थे.
चन्नी का पलड़ा था भारी
सूत्रों के मुताबिक माकन कमिटी की रिपोर्ट और सर्वे दोनों में ही चन्नी का पलड़ा भारी था. प्रदेश में तीस फ़ीसदी से ज़्यादा दलित आबादी का हवाला देकर पंजाब के कई नेता भी चन्नी को प्रधान बनाने की मांग कर रहे थे. लेकिन कांग्रेस नेतृत्व को आशंका थी कि जट सिख को हटा कर दलित को प्रदेश अध्यक्ष बनाने से पहला तबका नाराज हो सकता है. ऐसे में हिंदू चेहरे को आगे करने की रणनीति पर भी मंथन हुआ. पर्दे के पीछे प्रियंका गांधी भी सक्रिय थीं लेकिन आम सहमति नहीं बन पाई.
इसके बाद पार्टी को लगा कि अब बदलाव के लिए वाकई देर हो चुकी है. ऐसे में राहुल गांधी ने अपने करीबी राजा वडिंग पर ही भरोसा बरकरार रखा. लुधियाना से सांसद और यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके राजा वडिंग पर सभी वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलने की चुनौती होगी. 2021 में पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटा कर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री और सुनील जाखड़ की जगह नवजोत सिंह को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था. चुनाव में कांग्रेस की बुरी हार हुई और आम आदमी पार्टी की सरकार बनी.
साढ़े चार साल सरकार चलाने के बाद जिस तरह सीएम भगवंत मान विवादों से घिरे हैं उससे कांग्रेस को वापसी की गुंजाइश नज़र आ रही. पार्टी को लगता है कि एकजुटता से लड़े तो पंजाब में वापसी हो सकती है. कांग्रेस के सामने आम आदमी पार्टी के साथ-साथ बीजेपी और अकाली दल की चुनौती भी है. पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा के चुनाव होने हैं.
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