- रेलवे ने हाल के सालों में सुरक्षा पर काफी ध्यान दिया है
- रेलवे क्रॉसिंग पर अंडरपास बनाने से लेकर वहां गेटमैन की तैनाती पर ध्यान दिया गया है
- रेलवे क्रॉसिंग और गेटमैन के लिए रेलवे के अधिनियम में कई नियम हैं
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में रेलवे फाटक के करीब हुए हादसे में तीन लोगों की जान गई है. हालांकि भारतीय रेल ने पिछले कई साल से रेलवे क्रॉसिंग पर सख्ती बरती है. अंडरपास बनाने से लेकर गेटमैन की तैनाती रेलवे कर चुकी है. भारत में रेलवे लेवल क्रॉसिंग से जुड़े नियम भारतीय रेलवे के परमानेंट वे मैनुअल और रेलवे अधिनियम, 1989 में स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए हैं. इन नियमों के तहत रेलवे अधिकारियों, गेटमैन, ट्रेन संचालन से जुड़े कर्मचारियों और सड़क उपयोगकर्ताओं की जिम्मेदारियां तय की गई हैं, ताकि रेल फाटकों पर दुर्घटनाओं को रोका जा सके और ट्रेन तथा सड़क यातायात की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो.
क्या हैं नियम?
रेलवे इंजीनियरिंग मैनुअल के अनुसार रेलवे फाटक पर ट्रेन और सड़क यातायात दोनों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में ट्रेन आने से पहले अलग-अलग अधिकारियों और गेटमैन की स्पष्ट जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं.
रेलवे फाटक क्या होता है?
रेलवे फाटक वह स्थान है जहां सड़क और रेलवे लाइन एक-दूसरे को काटती है.
रेलवे फाटक कितने प्रकार के होते हैं?
कुल दो प्रकार के रेल फाटक होते हैं. मानवयुक्त, जहां गेटमैन तैनात रहता है. और दूसरा मानवरहित हालांकि अब अधिकांश ऐसे फाटकों को बंद या मानवयुक्त/रेल ओवर ब्रिज -रेल अंडर ब्रिज में बदला जा चुका है. सड़क के आधार पर इन्हें स्पेशल , A, B, C और D (पशु पार मार्ग) श्रेणियों में बांटा जाता है.
ट्रेन आने से पहले गेटमैन की क्या जिम्मेदारी होती है?
रेलवे नियम के अनुसार, ट्रेन आने से पहले सबसे बड़ी जिम्मेदारी गेटमैन की होती है कि वह फाटक बंद कर ट्रैक पूरी तरह सुरक्षित करे. गेटमैन को ट्रेन आने की सूचना मिलते ही फाटक को सुरक्षित तरीके से लॉक करना होता है. गेटमैन की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना भी है कि कोई व्यक्ति, वाहन या पशु रेलवे ट्रैक पर न हो. उसे रात में लाल सिग्नल और गेट लैंप जलाकर रखना होता है साथ ही ट्रेन गुजरने तक पूरी सतर्कता के साथ ट्रैक की ओर देखकर खड़ा रहना. इसके अलावा यदि ट्रैक पर कोई अवरोध दिखे तो तुरंत लाल झंडी या लाल लाइट दिखाकर ट्रेन रोकने की कार्रवाई करें साथ ही तत्काल स्टेशन मास्टर और संबंधित रेलवे अधिकारियों को तुरंत सूचना इसकी जानकरी दे.
स्टेशन मास्टर/रेलवे ऑपरेटिंग स्टाफ की जिम्मेदारी
ट्रेन के संचालन से पहले सुनिश्चित करना कि गेट सही तरीके से बंद है या नहीं. वहीं, जहां इंटरलॉकिंग व्यवस्था है, वहां गेट बंद हुए बिना सिग्नल क्लियर नहीं किया जा सकता. स्टेशन मास्टर या रेलवे ऑपरेटिंग स्टाफ की जिम्मेदारी है कि वो गेटमैन से आवश्यक सूचना लेकर ही ट्रेन को आगे बढ़ाने की अनुमति दे. वहीं इंजीनियरिंग विभाग की जिम्मेदारी है कि वो फाटक, ट्रैक, बैरियर और सड़क की नियमित जांच करे. इसके अलावा गेट, चेन, सिग्नल, चेतावनी बोर्ड और अन्य सुरक्षा उपकरणों का रखरखाव सही तरीके से हो. साथ ही गेटमैन को नियमों का प्रशिक्षण दें और समय-समय पर निरीक्षण के साथ सुरक्षा ऑडिट करें.
वाहन चालकों की जिम्मेदारी
रेलवे के नियमों में वाहन चालकों की भी जिम्मेदारी तय की गई है. इसमें स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि वाहन चालक गेट बंद होने पर कभी भी फाटक पार करने की कोशिश न करें. चेतावनी संकेतों और गेटमैन के निर्देशों का पालन करें और बिना अनुमति ट्रैक पर वाहन न चढ़ाएं. यदि फाटक खुला हो लेकिन ट्रेन दिखाई दे या सीटी सुनाई दे तो पहले ट्रेन को निकलने दें.
आपात स्थिति में क्या करना होता है?
अगर फाटक पर कोई वाहन खराब हो जाए या कोई बाधा आ जाए तो गेटमैन तुरंत लाल झंडी, लाल लाइट और डेटोनेटर लगाकर ट्रेन को चेतावनी देना होता है. साथ ही स्टेशन मास्टर और रेलवे अधिकारियों को तुरंत सूचना देने का निर्देश है. वहीं जब तक ट्रैक पूरी तरह साफ न हो जाए, ट्रेन को आगे नहीं बढ़ने दिया जाए.
रेलवे फाटक पर क्या सुरक्षा उपकरण उपलब्ध होना चाहिए?
नियम के अनुसार, गेटमैन के पास सामान्यतः लाल और हरी झंडियां, लाल और हरी हैंड सिग्नल लैंप, डेटोनेटर, अतिरिक्त चेन और ताले,गेट लैंप, ड्यूटी रोस्टर, शिकायत रजिस्टर,सुरक्षा नियमों की पुस्तक और कार्य निर्देश होने चाहिए.
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