पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी को कई प्रकार के अंदरूनी झगड़ों का सामना करना पड़ रहा है. जो पार्टी अपने अनुशासन के लिए जानी जाती है, जो पार्टी कांग्रेस को उसकी अनुशासनहीनता के लिए निशाने पर लेती है, वही पंजाब चुनाव से पहले इसी चुनौती से जूझ रही है.
इस बार पंजाब बीजेपी के लिए सबसे बड़ा संकट संगरूर बन चुका है, जहां पर बीजेपी की डिसिप्लिनरी कमिटी ने तीन वरिष्ठ नेताओं को नोटिस जारी कर दिया है. ये तीन नेता हैं-संगरूर बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष रणधीर सिंह देओल, पूर्व बीजेपी संगरूर जिला अध्यक्ष मनिंदर सिंह काप्याल और पूर्व बीजेपी स्टेट सेल कोऑर्डिनेटर जतिंदर कालरा.
इन तीनों ही नेताओं द्वारा 25 अगस्त को संगरूर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई थी. वहां उन्होंने बीजेपी के अंदरूनी मामलों पर कुछ ऐसी टिप्पणियां कीं, जो पार्टी को असहज कर सकती थीं. इसी वजह से डिसिप्लिनरी कमिटी ने इस मामले का संज्ञान लिया और तीनों ही नेताओं को नोटिस जारी किया.
नोटिस में कहा गया है कि तीनों ही नेताओं को 7 दिन के भीतर स्पष्टीकरण देना होगा कि आखिर उन्होंने उस प्रकार के बयान क्यों दिए. अगर उचित जवाब नहीं मिलता है, तो आगे भी कार्रवाई की जा सकती है.
यहां समझने वाली बात यह है कि पंजाब में बीजेपी अभी बहुत मजबूत स्थिति में नहीं है. पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि संगरूर वाला विवाद ज्यादा लाइमलाइट में न आए.
वैसे, यह कोई पहली बार नहीं है, जब पंजाब बीजेपी में इस प्रकार की अंदरूनी लड़ाई देखने को मिल रही हो. इससे पहले भी कई नेताओं की ओर से इस तरह के बयानबाजी देखने को मिल चुकी है.
इसमें अकाली दल के साथ गठबंधन होगा या नहीं, इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है. कुछ पार्टी नेता तो अभी से ही अकाली दल के साथ जाने का विरोध कर रहे हैं. वे सभी 117 सीटों पर अपने दम पर लड़ना चाहते हैं. वहीं, पार्टी का एक पक्ष ऐसा भी है, जो अकाली दल के साथ गठबंधन का समर्थन कर रहा है और पिछले चुनाव के नतीजों का भी हवाला दे रहा है.
ऐसे में आने वाले दिन पंजाब चुनाव के लिहाज से बीजेपी के लिए काफी मायने रखने वाले हैं. सवाल यह है कि पार्टी क्या खुद को चुनाव के वक्त एकजुट रख पाएगी या नहीं? क्या वो इन अंदरूनी झगड़ों से पार पा पाएगी या नहीं?
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