- प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार ग्रहण करते हुए अधिकारियों के साथ लंबी बैठक की और योजनाओं को समझा
- उन्होंने पीएम स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया समेत कई शिक्षा योजनाओं को सफल बनाने के लिए प्राथमिकता देने की बात कही
- जोशी के सामने परीक्षा की पारदर्शिता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन जैसी बड़ी चुनौतियां हैं
कर्त्तव्य भवन में शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभालने ही केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी एक्शन में दिखे. रविवार को अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पूरा विश्वास रखकर मुझे ये जिम्मेदारी सौंपी है. मैं कल कर्नाटक में था, रात को दिल्ली पहुंचा और आज सुबह शिक्षा मंत्रालय आकर मैंने चार्ज लिया है. जो भी काम मुझे देखना है, निर्णय लेना है, आज मैंने इन सबके बारे में पूरी जानकारी लेने और मिनिस्ट्री को समझने की कोशिश की है.
नए शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों के साथ घंटों की बैठक
प्रह्लाद जोशी रविवार सुबह ठीक 11 बजे शिक्षा मंत्रालय पहुंचे और अपना नया कार्यभार संभला. उन्होंने अधिकारियों के साथ 3 बजे तक लगातार बैठकें की और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तार से बातचीत की. इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा, "शिक्षा मंत्रालय एक बड़ा मंत्रालय है. मैं पूरा समझ कर आपसे विस्तार से बात करूंगा." बैठक के दौरान शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी भी मौजूद थे.

सूत्रों के मुताबिक, नए शिक्षा मंत्री को मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने पहली बैठक में शिक्षा से जुड़ी केंद्र सरकार की बड़ी और महत्वपूर्ण योजनाओं की पूरी जानकारी दी. इनमें पीएम श्री स्कूल, समग्र शिक्षा योजना जैसे कार्यक्रम अहम हैं.
नई शुरू की गई कई योजनाओं को सफल बनाना लक्ष्य
प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (PM SHRI) योजना के तहत देश भर में 14,500 स्कूलों के विकास और उन्नयन का टारगेट तय किया गया है. PM SHRI स्कूलों (PM ScHools for Rising India) की स्कीम को सेंट्रली स्पॉन्सर्ड स्कीम के तौर पर लागू किया जा रहा है. इसका कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट 27360 करोड़ रुपये है, जिसमें साल 2022-23 से 2026-27 तक पांच साल के लिए 18,128 करोड़ का सेंट्रल शेयर शामिल है.

दरअसल शिक्षा मंत्रालय देश के भविष्य से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्रालय है. नए शिक्षा मंत्री के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ उच्च शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा, कौशल विकास और अनुसंधान को भी नई गति देने महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
देश की परीक्षा प्रणाली में लोगों का विश्वास मजबूत करना सबसे बड़ी चुनौती
लंबे संसदीय अनुभव और प्रशासनिक कार्यशैली के कारण उन्हें सरकार में कई अहम जिम्मेदारियां मिलती रही हैं. फिलहाल जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की परीक्षा प्रणाली में लोगों का विश्वास मजबूत करना है. साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत चल रहे सुधारों को गति देना भी उनकी प्राथमिकता है. इसके अलावा विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता, उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान को बढ़ावा, डिजिटल शिक्षा का विस्तार और कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहने की संभावना है.

छात्रों को शिक्षा व्यवस्था में सुधार का इंतजार
शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने के साथ ही मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उनकी प्रारंभिक बैठकें शुरू हो गई हैं. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मंत्रालय परीक्षा सुधार, तकनीक आधारित मूल्यांकन प्रणाली, विश्वविद्यालयों में अनुसंधान और छात्रों से जुड़े लंबित विषयों पर तेजी से निर्णय लेने की दिशा में काम करेगा. शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और विद्यार्थियों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि नए शिक्षा मंत्री इन चुनौतियों से किस प्रकार निपटते हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया को किस गति से आगे बढ़ाते हैं.
गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्वारा पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.
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