जम्मू में शुक्रवार को पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) से विस्थापित लोगों ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने पीओजेके के विभिन्न क्षेत्रों जैसे रावलाकोट, मुजफ्फराबाद और मीरपुर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की. इस दौरान लोगों ने बैनर और तख्तियां लेकर पाकिस्तान प्रशासन और सेना के खिलाफ नाराजगी जाहिर की.
विस्थापित परिवारों ने जताई एकजुटता
प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि उनके परिवार दशकों पहले हिंसा और प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण पीओजेके छोड़कर भारत आए थे. उन्होंने वहां रहने वाले लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि आम नागरिकों की आवाज को दबाया जा रहा है.
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पीओजेके को वापस भारत में शामिल करने की मांग भी उठाई. कई लोगों ने नारे लगाकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं.
पाकिस्तान सेना पर लगाए गंभीर आरोप
एसओएस इंटरनेशनल के अध्यक्ष राजीव चुन्नी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि पीओजेके के लोग अब अपने अधिकारों और बेहतर जीवन की मांग कर रहे हैं. उनका आरोप था कि वहां के नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं और अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.
उन्होंने कहा कि लोगों की मांगें रोटी, बिजली और सम्मानजनक जीवन से जुड़ी हैं, लेकिन उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है. प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि पीओजेके में आम लोगों के बीच असंतोष लगातार बढ़ रहा है.
75 वर्षों से शोषण के आरोप
प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने आरोप लगाया कि पीओजेके के प्राकृतिक संसाधनों का लंबे समय से दोहन किया गया, जबकि स्थानीय लोगों को पर्याप्त राजनीतिक और आर्थिक अधिकार नहीं मिले. उनका कहना था कि जब लोग अपने अधिकारों की मांग करते हैं तो उन्हें विरोध का सामना करना पड़ता है.
पीओजेके को लेकर उठी बड़ी मांग
प्रदर्शन का सबसे प्रमुख मुद्दा पीओजेके को भारत में वापस शामिल करने की मांग रहा. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे वहां रहने वाले लोगों के साथ खड़े हैं और उनकी आवाज को दुनिया तक पहुंचाना चाहते हैं.
कार्यक्रम के अंत में लोगों ने पीओजेके के समर्थन में नारे लगाए और अपनी मांगों को दोहराया. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पीओजेके का मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि वहां रहने वाले लोगों के अधिकारों और भविष्य से भी जुड़ा हुआ है.
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