जम्मू में शुक्रवार को पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) से विस्थापित लोगों ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने पीओजेके के विभिन्न क्षेत्रों जैसे रावलाकोट, मुजफ्फराबाद और मीरपुर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की. इस दौरान लोगों ने बैनर और तख्तियां लेकर पाकिस्तान प्रशासन और सेना के खिलाफ नाराजगी जाहिर की.
विस्थापित परिवारों ने जताई एकजुटता
प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि उनके परिवार दशकों पहले हिंसा और प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण पीओजेके छोड़कर भारत आए थे. उन्होंने वहां रहने वाले लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि आम नागरिकों की आवाज को दबाया जा रहा है.
-
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
रुपये की गिरती कीमत पर RBI गवर्नर का बड़ा बयान, कोई फिक्स लेवल नहीं, जानिए क्या है रिजर्व बैंक का एक्शन प्लान -
टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग अनिवार्य? RBI गवर्नर ने NDTV समिट में बताया ये क्यों है जरूरी -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पीओजेके को वापस भारत में शामिल करने की मांग भी उठाई. कई लोगों ने नारे लगाकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं.
पाकिस्तान सेना पर लगाए गंभीर आरोप
एसओएस इंटरनेशनल के अध्यक्ष राजीव चुन्नी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि पीओजेके के लोग अब अपने अधिकारों और बेहतर जीवन की मांग कर रहे हैं. उनका आरोप था कि वहां के नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं और अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.
उन्होंने कहा कि लोगों की मांगें रोटी, बिजली और सम्मानजनक जीवन से जुड़ी हैं, लेकिन उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है. प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि पीओजेके में आम लोगों के बीच असंतोष लगातार बढ़ रहा है.
75 वर्षों से शोषण के आरोप
प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने आरोप लगाया कि पीओजेके के प्राकृतिक संसाधनों का लंबे समय से दोहन किया गया, जबकि स्थानीय लोगों को पर्याप्त राजनीतिक और आर्थिक अधिकार नहीं मिले. उनका कहना था कि जब लोग अपने अधिकारों की मांग करते हैं तो उन्हें विरोध का सामना करना पड़ता है.
पीओजेके को लेकर उठी बड़ी मांग
प्रदर्शन का सबसे प्रमुख मुद्दा पीओजेके को भारत में वापस शामिल करने की मांग रहा. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे वहां रहने वाले लोगों के साथ खड़े हैं और उनकी आवाज को दुनिया तक पहुंचाना चाहते हैं.
कार्यक्रम के अंत में लोगों ने पीओजेके के समर्थन में नारे लगाए और अपनी मांगों को दोहराया. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पीओजेके का मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि वहां रहने वाले लोगों के अधिकारों और भविष्य से भी जुड़ा हुआ है.
यह भी पढ़ें- कांवड़ यात्रा के ये हैं असली हीरो, दिल्ली में सेवा से लेकर सुरक्षा देने वालों की कहानी
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं