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महाराष्ट्र में सियासी तूफान: अशोक खरात विवाद के बीच महिला आयोग अध्यक्ष रूपाली चाकणकर के इस्तीफे की मांग तेज, संजय राउत ने CM को कहा- शुक्रिया

अशोक खरात विवाद में उसकी तस्वीरें वायरल होने के बाद महाराष्ट्र महिला आयोग प्रमुख रूपाली चाकणकर पर इस्तीफे का दबाव बढ़ा है. विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए तुरंत कार्रवाई की मांग की.

महाराष्ट्र में सियासी तूफान: अशोक खरात विवाद के बीच महिला आयोग अध्यक्ष रूपाली चाकणकर के इस्तीफे की मांग तेज, संजय राउत ने CM को कहा- शुक्रिया
नई दिल्ली:

महाराष्ट्र में एक बड़ा राजनीतिक बवंडर खड़ा हो गया है. राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर की बलात्कार के आरोपी अशोक खरात के साथ कथित तस्वीरें वायरल होने के बाद उनकी भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं और उनके इस्तीफे की मांग जोर पकड़ चुकी है.

कौन है अशोक खरात और क्या हैं आरोप?

अशोक खरात नाशिक का एक स्वयंभू ज्योतिषी‑अंकशास्त्री है, जिसे हाल ही में पुलिस ने 28 वर्षीय महिला की शिकायत पर गिरफ्तार किया है. आरोप है कि उसने महिला को नशीला पदार्थ देकर लंबे समय तक यौन शोषण किया. जांच एजेंसियों के अनुसार, खरात ने अपने राजनीतिक और सामाजिक संपर्कों का इस्तेमाल कर महिलाओं का भरोसा जीता और तथाकथित आध्यात्मिक प्रक्रियाओं के नाम पर उनका शोषण किया. मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT बनाई गई है.

वायरल तस्वीरों से बढ़ा विवाद

सोशल मीडिया पर वायरल कुछ तस्वीरों और वीडियो में रूपाली चाकणकर कथित तौर पर अशोक खरात के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में दिख रही हैं. इससे महिला आयोग जैसी संवेदनशील संस्था की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं.

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विपक्ष और कई नेताओं का हमला, इस्तीफे की मांग तेज

विपक्षी दलों और कई सामाजिक‑राजनीतिक नेताओं ने चाकणकर के इस्तीफे की मांग खुलकर की है.

संजय राउत का बड़ा आरोप

शिवसेना (उद्धव गुट) नेता संजय राउत ने कहा, 'ये बाबा अशोक खरात फडणवीस कैबिनेट के कुछ मंत्रियों के गुरु महाराज हैं. इनके मोबाइल से 56 से ज्यादा आपत्तिजनक क्लिप्स मिली हैं. कुछ मंत्री इतने तनाव में हैं कि उन्हें ICU में भर्ती होना पड़ सकता है. मैं सीएम फडणवीस का अभिनंदन करता हूं कि उन्होंने इस मामले की जड़ों को उखाड़ने की मुहिम छेड़ी. खरात को राजनीतिक‑सामाजिक प्रतिष्ठा देने वाले कई मंत्रियों की नींद उड़ गई है.'

मामले ने पकड़ा तूल

सुषमा अंधारे ने कहा कि चाकणकर के पास अब अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बचा है. उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में महिलाएं न्याय की उम्मीद कैसे कर सकती हैं.

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रूपाली ठोंबरे जो कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से है उन्होंने भी इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि महिला आयोग का पद पूरी तरह निष्पक्ष और विश्वसनीय होना चाहिए, जो इस मामले में कमजोर होता दिख रहा है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति पर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की जिम्मेदारी है, उसका नाम ऐसे गंभीर आरोपों वाले व्यक्ति के साथ जुड़ना बेहद चिंताजनक है. उन्होंने सरकार से मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि नैतिक जिम्मेदारी बनती है तो चाकणकर को तुरंत पद छोड़ देना चाहिए.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की महिला अध्यक्ष रोहिणी खडसे ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिला आयोग की विश्वसनीयता सर्वोपरि होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि अध्यक्ष पर ही इस तरह के विवाद खड़े होते हैं, तो यह संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाता है और ऐसे में चाकणकर को इस्तीफा देना चाहिए.

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पूर्व सांसद छत्रपति संभाजी राजे ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और नैतिकता बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि इस तरह के विवाद सामने आने के बाद पद की गरिमा बनाए रखने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को खुद आगे आकर निर्णय लेना चाहिए.

प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया ने भी इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि बलात्कार के आरोपों का सामना कर रहे अशोक खरात के साथ महिला आयोग की अध्यक्ष की नजदीकी कैसे हो सकती है. उन्होंने कथित तौर पर वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए पूछा कि ऐसे आरोपी व्यक्ति के साथ इस तरह के संबंध और सार्वजनिक रूप से सम्मान क्यों? 

रूपाली चाकणकर का पक्ष

चाकणकर ने कहा कि उनका खरात से संबंध सीमित था. उन्हें उसके अपराधों की कोई जानकारी नहीं थी. 'सोशल मीडिया की सामग्री के आधार पर निष्कर्ष न निकालें, कानून को काम करने दें.'

राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा

अशोक खरात मामले की जांच जारी है, लेकिन राजनीतिक मोर्चे पर दबाव तेज़ हो चुका है. कई दलों के नेता इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं, जिससे मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है. आने वाले दिनों में यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति पर गहरा असर डाल सकता है.

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