चेन्नई: तमिलनाडु के पेट्रोल पंप संचालकों ने डिजिटल भुगतान, विशेषकर यूपीआई ट्रांजैक्शन, को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो राज्य भर के पेट्रोल पंप यूपीआई और अन्य कैशलेस भुगतान स्वीकार करना बंद कर सकते हैं. डीलरों का आरोप है कि साइबर अपराध जांच के दौरान उनके बैंक खातों को फ्रीज कर दिया जाता है, जबकि विवादित लेनदेन में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती.
तमिलनाडु पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (टीएनपीडीए), जो राज्य के लगभग 5,000 पेट्रोल पंपों का प्रतिनिधित्व करती है, ने इस मामले में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से हस्तक्षेप की मांग की है. एसोसिएशन का कहना है कि डिजिटल भुगतान से जुड़े बढ़ते जोखिमों के कारण पेट्रोल पंप संचालकों के लिए कैशलेस भुगतान सुविधा जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है.
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मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में टीएनपीडीए के अध्यक्ष के.पी. मुरली ने कहा कि पेट्रोल पंप संचालकों को साइबर अपराध जांच में घसीटा जा रहा है, जबकि वे केवल ग्राहकों से पेट्रोल या डीजल की बिक्री के बदले वैध भुगतान प्राप्त करते हैं. एसोसिएशन के अनुसार, पेट्रोल पंप संचालकों के पास यह जांचने की कोई व्यवस्था नहीं होती कि यूपीआई या अन्य डिजिटल माध्यम से भुगतान करने वाला ग्राहक कौन है या उसके द्वारा भेजी गई राशि पहले किसी कथित साइबर धोखाधड़ी से जुड़े खाते से होकर गुजरी है या नहीं.
राज्य में डिजिटल भुगतान का उपयोग तेजी से बढ़ा है. एक औसत पेट्रोल पंप पर प्रतिदिन 200 से 500 डिजिटल लेनदेन होते हैं, जबकि कई आउटलेट्स पर कुल आय का आधे से अधिक हिस्सा यूपीआई और अन्य कैशलेस माध्यमों से आता है.
डीलरों ने क्या कहा?
डीलरों का कहना है कि समस्या तब पैदा होती है जब किसी ग्राहक द्वारा किया गया भुगतान बाद में साइबर अपराध जांच के दायरे में आ जाता है. जांच एजेंसियों के निर्देश पर बैंक संबंधित राशि पर रोक लगा देते हैं या कई मामलों में पूरे बैंक खाते को फ्रीज कर देते हैं.
पेट्रोल पंप संचालकों का तर्क है कि किसी एक संदिग्ध लेनदेन के कारण पूरे कारोबारी खाते को फ्रीज करना उचित नहीं है। इससे उनके दैनिक संचालन पर गंभीर असर पड़ता है, क्योंकि ईंधन खरीदने, कर्मचारियों का वेतन देने और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए बैंकिंग सेवाओं का निर्बाध संचालन जरूरी होता है.
पुलिस कार्रवाई को लेकर भी जताई चिंता
एसोसिएशन ने पुलिस कार्रवाई को लेकर भी चिंता जताई है। उसका आरोप है कि कुछ मामलों में पेट्रोल पंप संचालकों को सुबह-सुबह पूछताछ के लिए ले जाया गया, जबकि शुरुआत में उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि किस लेनदेन की जांच की जा रही है.
टीएनपीडीए का कहना है कि अधिकृत डिजिटल भुगतान माध्यमों के जरिए भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों को केवल इस कारण संदिग्ध नहीं माना जाना चाहिए कि बाद में किसी लेनदेन पर साइबर अपराध की जांच शुरू हो गई. एसोसिएशन ने राज्य सरकार से ऐसी सुरक्षा व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिससे वैध व्यवसायियों के बैंक खातों को बिना पर्याप्त आधार के फ्रीज न किया जाए और उन्हें अनावश्यक पुलिस कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
यूपीआई पेमेंट बंद करने की चेतावनी
डीलरों ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यावहारिक समाधान नहीं निकाला गया, तो तमिलनाडु के पेट्रोल पंप यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान सुविधाएं बंद कर नकद लेनदेन की ओर लौटने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं