- 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एडल्टरी पर दिया था ऐतिहासिक फैसला
- संसदीय समिति ने एडल्टरी कानून को जेंडर न्यूट्रल बनाने की सिफारिश
- समलैंगिकता को भी क्राइम के दायरे में लाने का दिया सुझाव
गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति (Parliamentary Panel)ने शादी से इतर फिजिकल रिलेशन यानी एडल्टरी (Adultery) को फिर से भारतीय न्याय संहिता (Indian Penal Code) के दायरे में लाने की सिफारिश की है. संसदीय स्थायी समिति ने केंद्र को भेजे प्रस्ताव में कहा, "एडल्टरी को फिर से क्राइम बनाया जाना चाहिए. क्योंकि शादी एक पवित्र संस्था है और इसे संरक्षित किया जाना चाहिए." संसदीय स्थायी समिति ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से भारतीय न्याय संहिता विधेयक पर अपनी रिपोर्ट में ये सिफारिश की. गृह मंत्री ने सितंबर में भारतीय न्याय संहिता विधेयक पेश किया था. समिति ने एडल्टरी के साथ ही होमोसेक्सुएलिटी को भी क्राइम के दायरे में लाने की सिफारिश की है.
संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी तर्क दिया गया है कि संशोधित व्यभिचार कानून (Adultery Law) को "जेंडर न्यूट्रल" अपराध माना जाना चाहिए. साथ ही दोनों पक्षों पुरुष और महिला को समान रूप से इसके लिए उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए.
-
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
रुपये की गिरती कीमत पर RBI गवर्नर का बड़ा बयान, कोई फिक्स लेवल नहीं, जानिए क्या है रिजर्व बैंक का एक्शन प्लान -
टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग अनिवार्य? RBI गवर्नर ने NDTV समिट में बताया ये क्यों है जरूरी -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके? -
NDTV World Summit 2026: हॉकी चैंपियन नेहा गोयल का बड़ा खुलासा! दर्द में भी जीत का जश्न
गृहमंत्री अमित शाह ने 11 अगस्त को पेश किए थे तीन विधेयक
दरअसल, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सितंबर में क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम को मजबूत करने के लिए लोकसभा में तीन बिल पेश किए थे. इसके नाम भारतीय न्याय संहिता, भारतीय साक्ष्य विधेयक और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता है. गृहमंत्री ने दावा किया कि इन कानूनों को लागू करने का मुख्य उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को तेज करना है. भारतीय न्याय संहिता तीन (The Bharatiya Nyay Sanhita) को स्क्रूटनी के लिए गृह मामलों की स्थायी समिति को भेजा गया था, जिसके अध्यक्ष बीजेपी सांसद बृज लाल हैं.
जानें क्या है IPC 497? सुप्रीम कोर्ट ने 158 साल पुराने व्यभिचार कानून को किया खत्म
पी चिदंबम ने जताई थी आपत्ति
हालांकि, कांग्रेस के सीनियर नेता और सांसद पी चिदंबम ने इस सिफारिश पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने कहा, "... राज्य को एक कपल की निजी जिंदगी में झांकने का कोई अधिकार नहीं है." चिदंबरम ने विधेयक को लेकर तीन "मौलिक आपत्तियां" उठाई थीं. जिसमें यह दावा भी शामिल था कि सभी तीन बिल "मोटे तौर पर मौजूदा कानूनों की कॉपी और पेस्ट" हैं.
2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एडल्टरी को अपराध के दायरे से किया था बाहर
2018 में तत्कालीन चीफ जस्टिस (CJI) दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने एडल्टरी पर ऐतिहासिक फैसला दिया था. कोर्ट ने कहा कि एडल्टरी कोई अपराध नहीं हो सकता और नहीं होना चाहिए. हालांकि बेंच ने कहा कि एडल्टरी तलाक के लिए आधार हो सकता है. तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा ने यह कहते हुए तर्क दिया था कि 163 साल पुराना, औपनिवेशिक काल का कानून "पति पत्नी का स्वामी है" की अवैध अवधारणा का पालन करता है. अपनी तीखी टिप्पणियों में शीर्ष अदालत ने कानून को "पुराना", "मनमाना" और "पितृसत्तात्मक" कहा. अदालतन ने कहा कि यह एक महिला की स्वायत्तता और गरिमा का उल्लंघन करता है.
संसदीय समिति ने की एडल्टरी कानून को जेंडर-न्यूट्रल बनाने की सिफारिश
2018 के फैसले से पहले के कानून में कहा गया था कि जो पुरुष किसी विवाहित महिला के साथ उसके पति की सहमति के बिना यौन संबंध बनाता है, उसे दोषी पाए जाने पर पांच साल की सजा हो सकती है. हालांकि, इस केस में संबंधित महिला को सज़ा नहीं होगी. गृह मामलों की स्थायी समिति की रिपोर्ट चाहती है कि एडल्टरी कानून को थोड़ा बदलकर क्राइम के दायरे में वापस लाया जाए. इसका मतलब है कि पुरुष और महिला दोनों को सजा का सामना करना पड़ेगा.
व्यभिचार पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से दिया केंद्र सरकार को बड़ा झटका , ठुकरा दी दलील
हालांकि, संसदीय स्थायी समिति ने दावा किया है कि अदालत ने पाया कि हटाए गए हिस्से संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 का उल्लंघन करते हैं, लेकिन वे "वयस्कों के साथ गैर-सहमति वाले फिजिकल रिलेशन के मामलों में लागू होते हैं." समिति ने कहा कि अब, भारतीय न्याय संहिता में पुरुष, महिला, ट्रांसजेंडर के खिलाफ गैर-सहमति वाले यौन अपराधों और पाशविकता के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है."
अपराधों के मामले में, समिति ने विचार व्यक्त किया कि 'सामुदायिक सेवा' शब्द को उचित रूप से परिभाषित किया जाना चाहिए. इसमें आगे सुझाव दिया गया कि सामुदायिक सेवा के रूप में दी जाने वाली सजा की निगरानी के लिए व्यक्ति को जिम्मेदार बनाने के संबंध में भी प्रावधान किया जा सकता है.
अफगानिस्तान: अकेले शॉपिंग के लिए जाने पर तालिबान ने महिलाओं पर सरेआम बरसाए कोड़े, VIDEO
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं