संसद का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है. ये सत्र हंगामेदार हो सकता है, क्योंकि सरकार परिसीमन से जुड़ा बिल लाने की तैयारी कर रही है. इससे पहले रविवार को ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई गई है. इस बैठक में सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाने का मुद्दा उठ सकता है.
मॉनसून सत्र ऐसे समय हो रहा है, जब हाल ही में कई विपक्षी पार्टियों में टूट के बाद नए राजनीतिक समीकरण बन गए हैं.
लिहाजा सत्र से पहले रविवार को होने वाली सर्वदलीय बैठक के कई मायने हैं. इस बैठक में सभी प्रमुख दलों के सदन के नेता शामिल होंगे. बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है, जिनमें अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी का मामला भी शामिल है. समाजवादी पार्टी ने कहा है कि वह इस मुद्दे को सदन में उठाएगी.
बैठक से पहले दो बड़ी हलचल
मॉनसून सत्र और सर्वदलीय बैठक से पहले शनिवार को दो बड़ी हलचल हुई. पहली तो यह कि तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों को तृणमूल सांसदों से अलग बैठने की मंजूरी मिल गई है. दूसरी- शिवसेना (यूबीटी) के 6 बागी सांसदों को शिंदे गुट वाली शिवसेना में मर्जर की मंजूरी भी लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने दे दी है.
शनिवार को ओम बिरला ने नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए तृणमूल के 20 बागी सांसदों के लिए लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था को मंजूरी दे दी है. अब ये 20 बागी सांसद अलग बैठेंगे.
NCPI को लेकर ओम बिरला ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है. लेकिन माना जा रहा है कि इस पार्टी को लोकसभा में औपचारिक मान्यता मिलने वाली है. केंद्र सरकार ने इस पार्टी को सर्वदलीय बैठक में भी बुलाया है. संसदीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सुदीप बंदोपाध्याय को लोकसभा में NCPI का नेता बताया है.
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के 6 बागी सांसदों के विलय के बाद लोकसभा में शिंदे गुट वाली शिवसेना के सांसदों की संख्या 7 बढ़कर 13 हो गई है.
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इसका असर क्या होगा?
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के फैसले के बाद लोकसभा में NDA की संख्या बढ़ गई है. अभी तक लोकसभा में NDA के 293 सांसद थे. लेकिन तृणमूल के 20 बागी और शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों के मर्जर के बाद अब लोकसभा में NDA की संख्या 319 पहुंच गई है.
हालांकि, वह अभी भी दो-तिहाई बहुमत से कम है. अभी लोकसभा में 3 सीटें खाली हैं, लिहाजा दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों की जरूरत है.
राज्यसभा में भी दो-तिहाई बहुमत के लिए NDA के पास कुछ सीट की कमी है और कुछ सदस्यों के वोटिंग से दूर रहने से राज्यसभा में संविधान संशोधन बिल पास कराने में मदद मिल सकती है.
क्या परिसीमन बिल हो पाएगा पास?
संसद के बजट सत्र में सरकार ने 131वां संविधान संशोधन बिल पेश किया था, जिसे परिसीमन बिल भी कहा जाता है. हालांकि, बहुमत न हो पाने के कारण ये बिल तब पास नहीं हो पाया था.
अब सरकार मॉनसून सत्र में भी इस बिल को पेश करने की तैयारी कर रहा है. कुछ नए साथियों के जुड़ने से संसद में सरकार की ताकत बढ़ी है. इसके अलावा और भी कुछ पार्टियों के साथ चर्चा चल रही है.
अप्रैल में एमके स्टालिन की डीएमके ने इस बिल का विरोध किया था. लेकिन अब डीएमके का कहना है कि वह नए ड्राफ्ट की समीक्षा करने के बाद कोई फैसला लेगी. डीएमके अब कांग्रेस से अलग हो चुकी है और संसद में भी वह अलग बैठेगी.
विपक्ष ने मांग की थी कि सरकार बिल में लिखकर दे कि सभी राज्यों में 50% सीटें बढ़ेंगी. अब एनसीपी (एसपी) की नेता सुप्रिया सुले का कहना है कि अगर सरकार बिल में सीटों की संख्या में 50% बढ़ोतरी को लिखित रूप में शामिल करती है तो हम इस पर चर्चा करेंगे. उन्होंने संकेत दिया कि अगर सरकार उनकी बात मान लेती है तो उनकी पार्टी समर्थन दे सकती है.
इसलिए अब सबकी नजरें डीएमके के 22 और एनसीपी (एसपी) के 8 सांसदों पर टिकी हैं, जिनके समर्थन से सरकार दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच जाएगी.
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