- लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित किया गया.
- विपक्ष ने PM मोदी को लोकसभा में बोलने से रोकने के लिए खास रणनीति बनाई और हंगामा किया.
- खरगे की बैठक में विपक्ष ने तय किया कि प्रधानमंत्री को लोकसभा और राज्यसभा में बोलने से रोका जाएगा.
लोकसभा में हंगामा बरप रहा है. गुरुवार को चौथे दिन भी दोनों सदनों में शब्द संग्राम चला. लोकसभा में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को पीएम मोदी के भाषण के बिना ध्वनिमत से पारित करना पड़ा. दरअसल वार-पलटवार के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों खेमों में दांवपेच भी चल रहा है. सदन में कैसे जीत-हार की रणनीति बन रही थी. लोकसभा में गुरुवार को धन्यवाद प्रस्ताव पर पीएम नरेंद्र मोदी को बोलना था. बताया जाता है कि वह उपलब्ध भी थे. लेकिन सत्ता पक्ष की तरफ से आखिरी समय में ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित करने की रणनीति बनी.
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने लोकसभा में पीएम के लिए खास रणनीति बनाई थी. यह फैसला किया गया था कि लोकसभा में पीएम मोदी को बोलने नहीं दिया जाएगा. विपक्ष के सांसदों के सीधे निशाने पर पीएम रहेंगे. विपक्ष का तर्क था कि जब बहस ही नहीं हुई है तो फिर पीएम को भी जवाब देने का हक नहीं है. दरअसल यह एक तरह से नेता विपक्ष राहुल गांधी के भाषण पर हंगामे पर जवाबी रणनीति थी.
खरगे की बैठक में बनी रणनीति
खरगे की बैठक में यह तय हुआ है कि विपक्ष एकजुट हो कर प्रधानमंत्री को लोकसभा में तो बोलने नहीं देगा. यदि प्रधानमंत्री 5 बजे राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हैं, तो विपक्ष वहां भी उन्हें बोलने नहीं देगा. यही वजह है कि राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सुबह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को ना बोलने देने का मामला उठाया गया. इसको लेकर ऊपरी सदन में जमकर हंगामा भी हुआ.
सरकार ने भांप लिया था प्लान
राज्यसभा की तुलना में लोकसभा में विपक्ष के पास संख्या बल ज्यादा है. ऐसे में अगर पीएम धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते तो पीएम मोदी के भाषण में व्यवधान आता. सरकार ने भी विपक्ष का प्लान भांपकर प्लान बी बनाया. इसके तहत लोकसभा में प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हुआ और रणनीति बनी की पीएम ऊपरी सदन में पांच बजे जवाब देंगे. राज्यसभा में सत्तापक्ष मजबूत है. ऐसे में विपक्ष के पास हावी होने का मौका कम है. पहले भी कुछ मौकों पर विपक्ष को वॉकआउट कर अपना विरोध जताना पड़ा है. माना जा रहा है कि राज्यसभा में पीएम के भाषण के दौरान विपक्षी सांसद शुरुआती शोर-शराबे के बाद वॉकआउट के जरिए विरोध जता सकते हैं.
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