- हाईकोर्ट ने कपूर परिवार के संपत्ति विवाद में प्रिया कपूर को मोबाइल डिवाइस जब्ती मामले में नोटिस जारी किया है
- करिश्मा कपूर के बच्चों ने संजय कपूर के कॉल डेटा रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल सुनवाई की मांग की है
- अदालत ने वसीयत की फॉरेंसिक जांच के लिए 26 फरवरी की तारीख तय की और प्रिया को दो सप्ताह में जवाब देने को कहा है
कपूर बनाम कपूर संपत्ति विवाद मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रिया कपूर को नोटिस जारी किया है. हाईकोर्ट ने संजय, प्रिया और वसीयत के डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल अन्य लोगों के मोबाइल डिवाइस जब्ती के मामले में ये नोटिस जारी किया है. दरअसल, हाईकोर्ट के संयुक्त रजिस्ट्रार ने करिश्मा कपूर के बच्चों द्वारा संजय कपूर के कॉल डेटा रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग वाली नई याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किया है. बता दें कि करिश्मा कपूर के बच्चों ने तत्काल सुनवाई की मांग की, क्योंकि कॉल डेटा रिकॉर्ड एक साल के भीतर डिलीट हो सकता है.
तो वहीं प्रिया कपूर के वकील का कहना है कि वे जिन कॉल डेटा रिकॉर्ड की रिपोर्ट पर भरोसा कर रहे हैं, वे अब डिलीट हो चुकी हैं और अविश्वसनीय तथा फर्जी हैं. हाईकोर्ट ने प्रिया को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है और सुनवाई की तारीख 26 फरवरी तय की. अदालत ने प्रिया के वकीलों को अधिक समय देने की याचिका खारिज कर दी, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं. करिश्मा के बच्चों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता शांतनु अग्रवाल ने पूछा कि अगर वसीयत इतनी प्रामाणिक है तो वे इसकी जांच का विरोध क्यों कर रहे हैं?
अदालत ने वसीयत की फॉरेंसिक जांच के लिए भी 26 फरवरी की तारीख तय की है, यह देखते हुए कि रानी कपूर ने भी कथित वसीयत की फॉरेंसिक जांच के लिए इसी तरह का आवेदन दायर किया है. दिल्ली उच्च न्यायालय ने रानी कपूर की वसीयत की फॉरेंसिक जांच की मांग वाली नई याचिका पर भी नोटिस जारी किया है.
बता दें कि इससे पहले दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की अरबों की संपत्ति को लेकर चल रहे पारिवारिक विवाद में उस समय नया मोड़ आ गया था जब संजय की मां रानी कपूर की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई से पहले जस्टिस विकास महाजन ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था. ये याचिका 80 साल की रानी कपूर की ओर से दायर की गई थी. रानी ने बहू प्रिया और करिश्मा कपूर के बच्चों के खिलाफ केस दर्ज किया था. उन्होंने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि जिस फैमिली ट्रस्ट के जरिए संपत्तियों का प्रबंधन और नियंत्रण किया जा रहा है, उसे अमान्य घोषित किया जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि इस ट्रस्ट का इस्तेमाल उनकी पूरी संपत्ति और विरासत को गैरकानूनी तरीके से हथियाने के लिए किया गया है, जिसमें उनकी जानकारी और सहमति नहीं थी. प्रिया कपूर और करिश्मा कपूर के बच्चों ने मिलकर गैरकानूनी तरीके से इस ट्रस्ट का गठन किया.
बता दें कि इससे पहले दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की अरबों की संपत्ति को लेकर चल रहे पारिवारिक विवाद में उस समय नया मोड़ आ गया था जब संजय की मां रानी कपूर की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई से पहले जस्टिस विकास महाजन ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था. ये याचिका 80 साल की रानी कपूर की ओर से दायर की गई थी. रानी ने बहू प्रिया और करिश्मा कपूर के बच्चों के खिलाफ केस दर्ज किया था. उन्होंने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि जिस फैमिली ट्रस्ट के जरिए संपत्तियों का प्रबंधन और नियंत्रण किया जा रहा है, उसे अमान्य घोषित किया जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि इस ट्रस्ट का इस्तेमाल उनकी पूरी संपत्ति और विरासत को गैरकानूनी तरीके से हथियाने के लिए किया गया है, जिसमें उनकी जानकारी और सहमति नहीं थी.
रानी कपूर ने आरोप लगाया कि उन्हें इस धोखाधड़ी की जानकारी बेटे संजय कपूर के निधन के बाद मिली. उन्हें पता चला कि उनकी संपत्तियों से जुड़े अहम फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए जा चुके हैं. उनकी संपत्ति को फैमिली ट्रस्ट के तहत डाल दिया गया और उन्हें पारिवारिक संपत्ति से बाहर कर दिया गया.
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