भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाली देश है और उसकी 145 करोड़ से ज्यादा है. बदलती लाइफस्टाइल के कारण देश में लिवर, किडनी, हार्ट ट्रांसप्लांट की बड़ी तादाद में आवश्यकता है. भारत हर साल दुनिया के कुल ट्रांसप्लांट के एक तिहाई अंग प्रत्यारोपण कर रहा है, लेकिन ये नाकाफी है. देश में वर्ष हर साल 4 लाख किडनी, लिवर और हार्ट और लंग्स (फेफड़े) ट्रांसप्लांट की जरूरत है, लेकिन ये नहीं हो पा रहा है. भारत भले ही दुनिया में सबसे ज्यादा अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplant) करने वाले देशों में तीसरे स्थान पर है. लेकिन बहुत ही कम मरीजों को समय पर ट्रांसप्लांट की सुविधा मिल पाती है.
अंग प्रत्यारोपण में तीसरे स्थान पर जरूरत ज्यादा
इंटरनेशनल मेडिकल जर्नल लैंसेट की रीजनल हेल्थ साउथ ईस्ट एशिया (The Lancet Regional Health Southeast Asia) की रिपोर्ट में भारत में आर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत और कमी की खाई के बारे में बरताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 में देश में लिवर, किडनी, हार्ट और लंग ट्रांसप्लांट को मिलाकर लगभग 3.9 लाख ट्रांसप्लांट की जरूरत थी. बढ़ती उम्र, खराब जीवनशैली और गंभीर बीमारियों के कारण वर्ष 2040 तक ये मांग 4 लाख 63 हजार तक पहुंच सकती है.
हार्ट ट्रांसप्लांट सबसे कम
द लैंसेट (The Lancet) की रिपोर्ट कहती है कि 2021 में देश में जितनी किडनी ट्रांसप्लांट के लिए जरूरत थी, उनमें से केवल 7.2 फीसदी ही हो सके. लिवर ट्रांसप्लांट में कुल मांग का सिर्फ डेढ़ फीसदी हो सका.फेफड़ों के प्रत्यारोपण के पास 1.2 फीसदी हो सकता. हार्ट ट्रांसप्लांट का मात्र 0.2 फीसदी ही मुमकिन हो सका. इंडियन सोसाइटी ऑफ ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन के सचिव और रिपोर्ट के मुख्य लेखक डॉ. मनीष बलवानी के अनुसार, भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा ट्रांसप्लांट करने वाला देश है, लेकिन मरीजों की लंबी कतार है.
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किडनी से ज्यादा लिवर ट्रांसप्लांट की दरकार
भारत में किडनी के मुकाबले लिवर प्रत्यारोपण की मांग ज्यादा बढ़ी है. रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2021 में 1.26 लाख मरीजों को किडनी, 1.85 लाख मरीजों को लिवर ट्रांसप्लांट की मांग थी. लेकिन देश में लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियां बढ़ती जा रही हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि अंग प्रत्यारोपण में दिल्ली एनसीआर, केरल, तेलंगाना, महाराष्ट्र और तेलंगाना में ट्रांसप्लांट की मांग 80 से 96 फीसदी तक है, जबकि देश की आबादी में इन 5 क्षेत्रों का हिस्सा सिर्फ 29 फीसदी है. रिपोर्ट के सह लेखक डॉक्टर विवेक कुटे ने कहा, भारत में आर्गन फेल पर मरीज की जान बच सकेगी या नहीं, यह निर्भर करता है कि वो कहां रहता है. 82 फीसदी मामलों में देश में लिवर, किडनी, हार्ट जैसे अंगों का प्रत्यारोपण तभी हो पाता है, जब उनके परिवार का कोई सदस्य इसके लिए तैयार हो.
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महिलाओं का कम अंग प्रत्यारोपण
अंग प्रत्यारोपण की जरूरत और बीमारी की बात करें तो महिला और पुरुष का अनुपात बराबर है.लेकिन जितने भी आर्गन ट्रांसप्लांट होते हैं, उनमें महिलाओं की संख्या काफी कम होती है. कुल किडनी ट्रांसप्लांट में महिलाओं की तादाद 36.8 फीसदी रही.लिवर में 30.4 फीसदी और हार्ट ट्रांसप्लांट में सिर्फ 23.5 फीसदी महिलाओं का ही प्रत्यारोपण हो सका. जबकि अंगदान करने वालों में महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा है.
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