- विपक्ष लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है
- कांग्रेस का आरोप है कि ओम बिरला ने नियमों का हवाला देकर राहुल गांधी को भाषण पूरा नहीं करने दिया
- राहुल गांधी अपने भाषण के दौरान पूर्व सेनाध्यक्ष एम एम नरवणे की अप्रकाशित किताब का हवाला दे रहे थे
विपक्ष लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है. गौरतलब है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण से उठा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. सूत्रों ने बताया कि विपक्ष लोकसभा स्पीकर की टिप्पणी से नाराज है. सूत्रों ने बताया कि विपक्ष जल्द ही लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है. उधर, लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता मनिकम टैगोर ने आरोप लगाया है कि स्पीकर एक तरफ स्टैंड ले रहे हैं.
कांग्रेस है ओम बिरला से नाराज
गौरतलब है कि विपक्ष खासकर कांग्रेस लोकसभा अध्यक्ष से नाराज चल रही है. कांग्रेस का कहना है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान लोकसभा स्पीकर ने नियमों का हवाला देकर भाषण ही पूरा नहीं करने दिया. वहीं, दूसरी तरफ बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कुछ किताबों का हवाला देकर इंदिरा गांधी समेत कांग्रेस के पूर्व पीएम पर निशाना साधा था. इसके अलावा लोकसभा में हंगामे के कारण कांग्रेस के साथ-साथ कुल 8 सांसद पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिए गए हैं. इसके अलावा कांग्रेस लोकसभा अध्यक्ष की उन टिप्पणियों से बेहद नाराज है जिसमें उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के कई सदस्य पीएम के आसन के पास पहुंच कर कोई भी अप्रत्याशित घटना कर सकते थे. इसलिए उन्होंने पीएम से सदन में ना आने का आग्रह किया.
लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए क्या करना होगा?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए विपक्ष को एक आवेदन देना होता है. इस आवेदन पर कम-से-कम 100 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर होने चाहिए. इंडिया गठबंधन के पास 240 सांसद हैं. यानी अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए विपक्ष के पास पर्याप्त सांसद हैं. हालांकि, विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव को लोकसभा में पास नहीं करा सकता है.
प्रियंका गांधी ने लगाया आरोप
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, 'स्पीकर साहब का खुद निरादर किया गया है. स्पीकर साहब पर दबाव है कि उनको खुद बयान देना पड़ रहा है जो सही नहीं है. सवाल ही नहीं उठता कि पीएम पर कोई हमला करे. सरकार द्वारा उन पर दबाव डाला गया है इसलिए उन्होंने ये कहा है क्योंकि उस दिन पीएम मोदी की हिम्मत नहीं हुई सदन में आने की. इसलिए स्पीकर सफाई दे रहे हैं, ये गलत बात है.'
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष एक संवैधानिक पद है, यह सत्ताधारी पार्टी का नहीं है. जिस तरह से विपक्ष के नेता की आवाज को भेदभाव के साथ दबाया जा रहा है, वह बहुत चिंताजनक है. यह संसद है, सेंसर बोर्ड नहीं. उनका इशारा लोकसभा में विपक्षी नेताओं की आवाज को दबाने की ओर था, जो उनके अनुसार लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि यह मामला अब सिर्फ लोकसभा और राज्यसभा का नहीं, बल्कि सदन की परंपरा और उसकी गरिमा का है. उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या कभी आपने सुना है कि संसद में प्रधानमंत्री महिला सांसदों से डरते हैं? यह शर्मनाक नहीं है?" उन्होंने आरोप लगाया कि स्पीकर को इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए और इसी कारण विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाने पर मजबूर है.
कांग्रेस नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर की और कहा, 'स्पीकर को सभी पार्टियों को साथ लेकर चलना चाहिए, लेकिन ओम बिरला ने भाजपा की पार्टी लाइन अपनाई है, जो उन्हें नहीं करना चाहिए था।" उनका मानना है कि स्पीकर को सदन की परंपरा का पालन करना चाहिए. कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने अविश्वास प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'जब आएगा तो हम आपको बताएंगे'
शशि थरूर ने भी किया समर्थन
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, 'हम बजट पर बोलने आए थे, लेकिन अब लग रहा है कि सरकार और स्पीकर संसद की कार्यवाही में कोई दिलचस्पी नहीं रखते' कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा, 'संसद बहस और प्रक्रिया का पालन करने के लिए है। विपक्ष को देश से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए जगह देनी चाहिए। यह अविश्वास प्रस्ताव उसी का हिस्सा है'.
टैगोर का बड़ा आरोप
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता मनिकम टैगोर ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि स्पीकर एक तरफ स्टैंड ले रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह बात चर्चा में है. टैगोर ने कहा कि आज जो फ्लोर लीडर की सुबह बैठक हुई है उसमें ये मुद्दा उठा है कि किस तरह स्पीकर हमारी आवाज को दबा रहे हैं. इंडिया गठबंधन के सारे सांसद इस चर्चा को आगे बढ़ाएंगे.
विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है- टैगोर
टैगोर ने आरोप लगाया कि चेयर एक तरफ स्टैंड ले रहा है और सरकार का साथ मिलकर विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है. टैगोर ने आरोप लगाया कि स्पीकर सरकार की सारी कोशिश में साथ दे रहे हैं. इस बात से हमें काफी दुख है. उन्होंने कहा कि यह पद तटस्थ पद होता है और विपक्ष की बात भी सुनाई चाहिए. सिर्फ विपक्ष को टोकने और उन्हें न बोलने देने के लिए नहीं होता है. विपक्ष के सारे नेताओं के माइक बंद कर दिया जाता है.
बीजेपी के पास केवल 240 सांसद
टैगोर ने कहा कि सारे महिला सांसदों ने शुक्रवार को ही स्पीकर को चिट्ठी भेजी दी थी. चिट्ठी विरोध जताया था. लोकसभा अध्यक्ष का पद बहुत बड़ा है. यह पूछने पर कि क्या अविश्वास प्रस्ताव के लिए विपक्ष के पास नंबर हैं. इसपर टैगोर ने कहा कि देखिए मोदी जी के पास केवल 240 है बाकी उनके सहयोगी दलों का है. विपक्ष के पास भी 220 का नंबर है. उन्होंने कहा कि यह आप लोग सोचिए की चेयर के ऊपर ऐसी स्थिति कैसे पैदा हुई है.
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