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'ऑपरेशन ग्लोबल हंट'... विदेशों में छुपे माफियाओं को पकड़ने के लिए NCB का इंटरनेशनल मिशन, सबसे बड़ा प्रहार

भारतीय एजेंसियों ने ऑपेरशन ग्लोबल हंट की रूपरेखा इंटरपोल के सदस्य देशों की कॉफ्रेंस में बनाई थी. जिससे विदेशों में छुपे उन तमाम अपराधियों का लोकेशन पताकर इंटरपोल की मदद से उन्हें वापस भारत लाया जा सके.

'ऑपरेशन ग्लोबल हंट'... विदेशों में छुपे माफियाओं को पकड़ने के लिए NCB का इंटरनेशनल मिशन, सबसे बड़ा प्रहार
  • भारतीय एजेंसियों ने विदेशों में छुपे 100 भगोड़ों को पकड़ने के लिए 'ऑपरेशन ग्लोबल हंट' शुरू किया है
  • इस ऑपरेशन में CBI, ED, NIA और NCB इंटरपोल के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय अपराधियों की लोकेशन पता कर रहे हैं
  • ऑपरेशन का मकसद भगोड़े अपराधियों को पकड़कर विशेष विमान से भारत वापस लाना और प्रत्यर्पण प्रक्रिया को तेज करना है
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नई दिल्ली:

विदेशों में छुपे माफियाओं के खिलाफ भारतीय एजेंसियों ने 'ऑपरेशन ग्लोबल हंट' लॉन्च किया है. 100 भगोड़ों को पकड़ने के लिए NCB ने ये इंटरनेशनल मिशन शुरू किया है. सिल्वर नोटिस के जरिए इंटरपोल की मदद से ये पता किया जा रहा है कि इंटरनेशनल सिंडिकेट से जुड़े इन अपराधियों की लोकेशन क्या है. प्रत्यर्पण की जगह अब स्पेशल प्लेन से इन्हें डिपोर्ट करने की तैयारी है.

एनडीपीए, साइबर, इकॉनोमिक ऑफेंडर समेत गैंगस्टरों पर ग्लोबल एक्शन का ब्लू प्रिंट तैयार किया गया है. CBI, ED, NIA और NCB का इंटरपोल के साथ मिलकर 100 अपराधियों पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार होगा.

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भारत में अपराध करके विदेशों में बैठे अपराधियों के खिलाफ भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन शुरू किया है. इसको 'ऑपरेशन ग्लोबल हंट' नाम दिया गया है. इस ऑपेरशन के जरिए भारत सरकार ने तमाम सेंट्रल एजेंसियों को इंटरपोल के साथ मिलकर दुनियाभर में जॉइंट ऑपरेशन चलाने का आदेश दिया है. 

इसका मकसद है उन भगोड़े अपराधियों को इंटरपोल की मदद से ढूंढकर गिरफ्तार करवाना और वहां की सरकार को आरोपी का डोजियर सौंपकर उसे विशेष विमान से भारत भेजने के लिए तैयार करना.

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भारतीय एजेंसियों ने ऑपेरशन ग्लोबल हंट की रूपरेखा इंटरपोल के सदस्य देशों की कॉफ्रेंस में बनाई थी. जिससे विदेशों में छुपे उन तमाम अपराधियों का लोकेशन पताकर इंटरपोल की मदद से उन्हें वापस भारत लाया जा सके. इस ऑपरेशन के टारगेट पर इंटरनेशनल ड्रग्स सिंडिकेट और ऑर्गनाइज्ड क्राइम सिंडिकेट से जुड़े अपराधी हैं.

भारतीय सुरक्षा एजेंसियां टर्की के इस्ताम्बुल से दाऊद के करीबी रहे सलीम इस्माइल डोला को डिपोर्ट कर भारत ला चुकी है. जांच एजेंसियों का कहना है कि यह सिर्फ क्राइम नहीं, बल्कि ड्रग टेरर नेटवर्क है, जो विदेश से बैठकर भारत में ड्रग्स सप्लाई कर रहा है.
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इस नेटवर्क को चलाने वाले 11 बड़े चेहरे सामने आए हैं

  1. आसिफ इकबाल मेमन
  2. हाजरा इकबाल मेमन
  3. जुनैद इकबाल मेमन
  4. हरमीत सिंह
  5. प्रदीप सिंह
  6. परमजीत ढालीवाल
  7. सनी गोसलविस
  8. जसविंदर सिंह
  9. टाईशन बिश्नोई
  10. हाली सलीम
  11. संदीप धुनिया

जसविंदर उर्फ जैज और सनी कालरा दुबई पुलिस की हिरासत में हैं.

भारत की एंटी-नारकोटिक्स मुहिम के तहत 2025 में 1.33 लाख किलो ड्रग्स जब्त की गई थी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 2000 करोड़ था. इसमें से 77 हजार किलो ड्रग्स नष्ट किए गए हैं. वहीं 265 ड्रग्स अपराधियों को सजा दिलवाई गई है. इसमें 37 इंटरपोल नोटिस जारी हुए हैं और 5 भगोड़ों को भारत लाने में सफलता मिली है.

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