- ईरान-अमेरिका की बातचीत इस्लामाबाद में हो रही है, जिससे बड़े युद्ध को टालने की उम्मीद है.
- कांग्रेस सांसद शशि थरूर के अनुसार पाकिस्तान ही मध्यस्थता कर सकता है क्योंकि वह ईरान का पड़ोसी है.
- पाकिस्तान की सीमा ईरान से लगभग नौ सौ किलोमीटर लंबी है और वहां चार करोड़ शियाओं की आबादी है.
इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका के बीच हो रही बातचीत पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी है. यदि दोनों पक्ष इस बातचीत पर सहमत हुए तो एक बड़े युद्ध को टाला जाएगा, लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो पश्चिम एशिया के साथ-साथ पूरी दुनिया की परेशानी बढ़ सकती है. इस बीच ईरान-अमेरिका के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि यह केवल पाकिस्तान ही कर सकता है. कांग्रेस नेता ने इसके कारण भी बताए.
भारत के मध्यस्थता में मुखर नहीं होने को लेकर उठ रहे सवालों पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा, किसी तरह की कोई प्रतिस्पर्धा नहीं हैं, क्योंकि मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के लिए परिस्थितियां अलग-अलग हैं.
पाकिस्तान ईरान का पड़ोसी देश, PAK में 4 करोड़ शियाः थरूर
कांग्रेस सांसद ने कहा, "पाकिस्तान ईरान का पड़ोसी देश है. उसकी सीमा 900 किलोमीटर लंबी है और लगभग चार करोड़ शिया पाकिस्तानी हैं. इसलिए उसका इस मध्यस्थता में शामिल होना, एक अलग विषय है. अगर फिर से ईरान में हमले हुए तो शरणार्थी भी पाकिस्तान ही जाएंगे."
अमेरिका के इशारे पर पाकिस्तान कर रहा मध्यस्थताः थरूर
पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान बातचीत पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि यह पाकिस्तान ही कर सकता है, क्योंकि वह अमेरिका के इशारे पर ऐसा कर रहा है. थरूर ने कहा, "पाकिस्तान के वाशिंगटन के साथ जिस तरह के रिश्ते हैं, वे ऐसे हैं कि वाशिंगटन ने उनसे ऐसा (मध्यस्थता) करने को कहा है. कुछ आरोप ऐसे भी हैं कि वाशिंगटन ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को उनका मैसेज (एक्स पोस्ट) भी लिखकर दिया, क्योंकि उसकी हेडिंग थी 'ड्राफ्ट: एक्स पर पाकिस्तान के पीएम का मैसेज'.

'शहबाज के पोस्ट की भाषा भी वाशिंगटन वाली थी'
पाकिस्तान पीएम के पोस्ट पर कांग्रेस सांसद ने कहा उनके पोस्ट के लिए जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल हुआ, वह भी वाशिंगटन वाली भाषा थी. कुछ शब्द ऐसे थे, जिन्हें डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस्तेमाल किया था. इसलिए इस मामले में पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ जिस तरह की भूमिका निभाई है, वह सिर्फ पाकिस्तान ही कर सकता है."
हमारा हित शांति और समाधान मेंः शशि थरूर
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने यह भी कहा कि ईरान-अमेरिका के बीच शांति की उम्मीद हर कोई कर रहा है. इस युद्ध की वजह से हमारे देश पर भी काफी असर पड़ा है और हमारी घरेलू अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव पड़ा है, तो हमारा हित शांति और समाधान में है. हम यही चाहते हैं कि युद्ध खत्म हो जाए.
मिडिल ईस्ट में रह रहे भारतीयों के लिए जंग रुकना जरूरीः थरूरी
थरूर ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते कतर और बहरीन जैसे देशों से हमारी प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम गैस का एक बहुत बड़ा हिस्सा पहले वहां से आता था. इसका युद्ध के हालात में आना मुश्किल हुआ है. इसके अलावा, खाड़ी के देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रह रहे हैं. उनकी सुरक्षा के लिहाज से भी युद्ध चलना हित में नहीं है.
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