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हैरेसमेंट केस वापस लेने के लिए पुलिस ने नाबालिग पर बनाया दबाव, सदमे में बेहोश हो गई पीड़िता, SP से मांगा इंसाफ

ओडिशा के मयूरभंज जिले में एक नाबालिग लड़की ने पुलिस पर केस वापस लेने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है. परिवार का कहना है कि धमकी के बाद बच्ची सदमे में बेहोश हो गई और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. मामले में परिजनों ने एसपी से न्याय की मांग की है.

हैरेसमेंट केस वापस लेने के लिए पुलिस ने नाबालिग पर बनाया दबाव, सदमे में बेहोश हो गई पीड़िता, SP से मांगा इंसाफ

Odisha Police Harassment Case: ओडिशा के मयूरभंज जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग लड़की ने पुलिस पर ही गंभीर आरोप लगाए हैं. परिवार का कहना है कि थाने में केस वापस लेने का दबाव बनाया गया, जिससे लड़की इतना घबरा गई कि बेहोश हो गई और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. अब परिजनों ने मामले में इंसाफ की मांग करते हुए एसपी से शिकायत की है.

मामला मोराडा पुलिस स्टेशन का है, जहां इंस्पेक्टर इनचार्ज (IC) पर आरोप है कि उन्होंने नाबालिग को थाने बुलाकर केस वापस लेने के लिए दबाव बनाया. परिवार का कहना है कि लड़की बयान दर्ज कराने गई थी, लेकिन वहां उसका साथ देने के बजाय उसे डराया गया.

घबराहट से बिगड़ी हालत, हुई बेहोश

परिजनों के मुताबिक, थाने में हुए व्यवहार से नाबालिग काफी डर गई. जैसे ही वह बाहर आई, रोने लगी और कुछ ही देर में बेहोश हो गई. उसे पहले स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर बाद में बारीपदा अस्पताल रेफर करना पड़ा.

मां ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

पीड़िता की मां ने अपनी बेटी की हालत के लिए सीधे IC को जिम्मेदार ठहराया है. उनका कहना है कि पुलिस अधिकारी के व्यवहार से बच्ची को मानसिक रूप से गहरी चोट पहुंची है. परिवार ने आरोप लगाया कि मदद की उम्मीद में थाने पहुंचे थे, लेकिन वहां से उन्हें निराशा मिली.

जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला इलाके के एक युवक के खिलाफ छेड़छाड़ के आरोप से शुरू हुआ था. परिवार का कहना है कि युवक लड़की को लगातार परेशान कर रहा था, जिसके चलते वे शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे थे.

एफआईआर दर्ज करने में भी टालमटोल

परिवार का आरोप है कि शुरू में पुलिस ने शिकायत दर्ज करने में भी देरी की और उन्हें इधर-उधर घूमाया गया. बाद में जब उन्होंने एसडीपीओ से संपर्क किया, तब उन्हें फिर से थाने बुलाया गया. परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से बात की, तो थाने में अधिकारी का रवैया और सख्त हो गया. बयान दर्ज करते समय नाबालिग को कथित तौर पर और दबाव में लिया गया, जिससे वह मानसिक रूप से टूट गई.

अब SP से न्याय की मांग

घटना के बाद पीड़ित परिवार और स्थानीय लोग अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) के पास पहुंचे और पूरे मामले की जांच की मांग की. परिवार चाहता है कि दोषी पर सख्त कार्रवाई हो और उन्हें न्याय मिले. मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एसडीपीओ मिनाती बिस्वाल ने कहा कि शिकायत मिलते ही केस दर्ज कर लिया गया है. उन्होंने बताया कि आरोपी युवक को हिरासत में लिया गया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है. साथ ही, IC के खिलाफ लगाए गए आरोपों की भी जांच CCTV फुटेज के आधार पर की जाएगी.

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