Odisha Healthcare Failure: ओडिशा के कालाहांडी जिले से एक बार फिर ऐसा दृश्य सामने आया है, जिसने विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. मालपाड़ा गांव में पक्की सड़क के अभाव के कारण एंबुलेंस गर्भवती महिला के घर तक नहीं पहुंच सकी. मजबूरी में गांववालों को प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को चारपाई पर लादकर, बल्ली और रस्सियों के सहारे एंबुलेंस तक ले जाना पड़ा. यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि जून 2025 में भी इसी गांव में ऐसी ही स्थिति सामने आ चुकी है. बार‑बार दोहराई जा रही यह तस्वीर ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की बदहाली को उजागर करती है.
घर तक नहीं पहुंच सकी एंबुलेंस
मालपाड़ा गांव की यह घटना उस समय सामने आई जब एक गर्भवती महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा उठी. परिजनों ने तुरंत 108 एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन गांव तक जाने के लिए पक्की सड़क न होने के कारण एंबुलेंस कुछ दूरी पर ही रुक गई. कच्चे और दलदली रास्ते पर वाहन के फंसने का खतरा होने से चालक आगे नहीं बढ़ सका.

Odisha News: चारपाई बनी एंबुलेंस
ग्रामीणों ने चारपाई पर ढोई प्रसूता
हालात बिगड़ते देख गांव के पुरुष और महिलाएं खुद मदद के लिए आगे आए. बल्ली और रस्सियों की मदद से चारपाई बनाई गई, जिस पर गर्भवती महिला को लिटाया गया. इसके बाद ग्रामीणों ने कीचड़ भरे, फिसलन वाले रास्ते से पैदल चलते हुए महिला को एंबुलेंस तक पहुंचाया. इस दौरान महिला दर्द से कराहती रही और हर कदम पर उसकी जान का खतरा बना रहा.
बारिश में और बदतर हो जाती है स्थिति
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में हालात और खराब हो जाते हैं. कच्चा रास्ता कीचड़ से भर जाता है, जिससे न केवल एंबुलेंस बल्कि बाइक या चारपहिया वाहन भी गांव तक नहीं पहुंच पाते. ऐसे में हर बार मरीजों को चारपाई या कंधे पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है.

Odisha News: विकास की खुली पोल
“विधायक को पता, फिर भी सड़क नहीं”
गांव के एक युवक ने मीडिया से बातचीत में कहा कि स्थानीय विधायक को इस समस्या की पूरी जानकारी है. कई बार आवेदन और मांग रखने के बावजूद आज तक सड़क नहीं बन पाई. ग्रामीणों का आरोप है कि केवल चुनाव के समय वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर काम नहीं होता.
जून 2025 में भी दिखी थी यही मजबूरी
मालपाड़ा गांव के लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है. जून 2025 में भी एक गर्भवती महिला को इसी तरह चारपाई पर लादकर एंबुलेंस तक पहुंचाया गया था. तब भी प्रशासन को जानकारी दी गई थी, लेकिन इसके बाद हालात में कोई सुधार नहीं हुआ.
महिलाओं की जान हर बार दांव पर
ग्रामीणों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव का समय सबसे ज्यादा डरावना बन जाता है. समय पर अस्पताल न पहुंच पाने की वजह से जच्चा‑बच्चा दोनों की जान जोखिम में रहती है. बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए भी यही स्थिति बनी रहती है.
प्रशासन से पक्की सड़क की मांग
घटना के बाद गांववालों ने प्रशासन से एक बार फिर पक्की सड़क बनाने की मांग उठाई है. उनका कहना है कि सड़क सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु का सवाल है. बिना सड़क के स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाएं भी अधूरी हैं.
विकास के दावों पर उठते सवाल
कालाहांडी जैसे पिछड़े इलाके में बार‑बार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या विकास केवल कागज़ों तक सीमित है. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सड़क नहीं बनेगी, तब तक चारपाई ही उनकी एंबुलेंस बनी रहेगी.
यह भी पढ़ें : केन‑बेतवा विस्थापन विवाद फिर गरमाया; पन्ना SP ऑफिस पर धरना प्रदर्शन, जानिए किस विरोध में हो रहा आंदोलन
यह भी पढ़ें : कलश यात्रा का सफर बना मौत का मंजर: सनकुआ धाम जा रही ट्रैक्टर‑ट्रॉली पलटी, महिला की मौत, 24 से ज्यादा घायल
यह भी पढ़ें : भोपाल मेट्रो पर बवाल; कब्रिस्तान के नीचे अंडरग्राउंड लाइन का विरोध, वक्फ तक पहुंच मामला
यह भी पढ़ें : अदाणी समूह के निवेश से गुना बनेगा औद्योगिक विकास का नया केंद्र, 10 मई को सीमेंट प्लांट का शिलान्यास
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं