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अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, खनन और पहाड़ों की ऊंचाई पर कमेटी 3 महीने में सौंपगी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला की एक समान परिभाषा तय करने पांच सदस्यीय समिति गठित की है. इस समिति को 31 अगस्त 2026 तक रिपोर्ट सौंपनी होगी.

अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला,  खनन और पहाड़ों की ऊंचाई पर कमेटी 3 महीने में सौंपगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की परिभाषा के लिए बनाया 5 सदस्यीय पैनल
  • सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला की समान परिभाषा तय करने हेतु पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है
  • समिति की अध्यक्षता आईसीएफआरई की महानिदेशक कंचन देवी करेंगी और रिपोर्ट अगस्त 2026 तक देनी होगी
  • समिति में वन सर्वेक्षण, भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, पर्यावरण मंत्रालय और वनस्पति विज्ञान के पूर्व विशेषज्ञ शामिल है
नई दिल्‍ली:

सुप्रीम कोर्ट ने पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील अरावली पर्वतमाला की एक समान परिभाषा तय करने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है, ताकि भविष्य में माइनिंग गतिविधियों को रेगुलेट किया जा सके. इस समिति को 31 अगस्त 2026 तक अपनी रिपोर्ट कोर्ट में जमा करने को कहा गया है. मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा 25 मई को पारित आदेश के अनुसार, इस समिति की अध्यक्षता भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) की महानिदेशक कंचन देवी करेंगी.

पैनल में कौन-कौन?

अरावली पर्वतमाला की एक समान परिभाषा तय करने के लिए पांच सदस्यीय समिति में कंचन देवी के अलावा चार सदस्य, डॉ. सुभाष आशुतोष (भारतीय वन सर्वेक्षण के पूर्व महानिदेशक), डॉ. राजेंद्र कुमार शर्मा (भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के पूर्व निदेशक), बृज मोहन सिंह राठौर (पर्यावरण मंत्रालय में पूर्व संयुक्त सचिव) और प्रोफेसर अशोक के भटनागर (दिल्ली विश्वविद्यालय में वनस्पति विज्ञान विभाग के पूर्व प्रमुख) शामिल हैं. 

अरावली से जुड़े लोगों से होगी बात 

अदालत ने कहा कि अपनाई जाने वाली कोई भी कार्रवाई जानकारीपूर्ण, वैज्ञानिक रूप से सुदृढ़ और पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए. अदालत ने समिति को अपने मूल्यांकन के दौरान "विभिन्न और परस्पर विरोधी पहलुओं" का ध्यान रखने और दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा राज्यों, पर्यावरणविदों, गैर-लाभकारी संगठनों, खनन पट्टा धारकों, परियोजना प्रस्तावकों, ग्रामीणों, किसानों और स्थानीय समुदायों सहित सभी हितधारकों को शामिल करने का निर्देश दिया, जिनकी आजीविका अरावली पर्वत से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है. 

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मंगलवार रात को सार्वजनिक किए गए आदेश में कहा गया कि प्रस्तावित समिति से अपेक्षा की जाएगी कि वह ऐसा रास्‍ता बताए, जिससे कोर्ट को कोई फैसला लेने में मदद मिल सके. कोई फैसला लेने के बाद ऐसे परिणाम न आएं, जिन्हें बाद में पलटना मुश्किल या असंभव साबित हो. बता दें कि शीर्ष अदालत ने समिति की अंतिम रिपोर्ट और उस पर विचार किए जाने तक पूरे अरावली क्षेत्र में खनन पर रोक लगा दी है. मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी.

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