विज्ञापन

क्लाइमेट चेंज का असर? भारत में घट रही है साइक्लोन्स की संख्या

मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में जब साइक्लोन पूर्वी तट के करीब पहुंचते हैं, तो उनकी गति धीमी हो जाती है. इस वजह से, समान तीव्रता वाला चक्रवात भी कहीं अधिक प्रभाव डालता है.

क्लाइमेट चेंज का असर? भारत में घट रही है साइक्लोन्स की संख्या
  • भारत में सामान्यतया एक साल में 4 से 5 साइक्लोन बनते हैं, जिनमें से अधिकांश अक्टूबर से दिसंबर के बीच आते हैं
  • इस साल अल नीनो की मजबूत स्थिति के कारण बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में साइक्लोन की संख्या सामान्य से कम रही है
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से साइक्लोन की संख्या कम हो रही है, लेकिन तीव्रता में स्थिरता देखी जा रही है
नई दिल्ली:

क्लाइमेट चेंज की वजह से क्या भारत में साइक्लोन्स की संख्या घट रही है? भारत मौसम विभाग के डायरेक्टर जनरल डॉ. मृतुन्जय मोहापात्रा ने शनिवार को 'नवंबर 2026 के लिए बारिश और तापमान का मासिक पूर्वानुमान' रिपोर्ट जारी करने के दौरान इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस साल साइक्लोन 'मुरासु' (Cyclone Murasu) केवल दूसरा साइक्लोन है. पहला साइक्लोन 'अर्नब' था.

क्लाइमेट चेंज का साइक्लोन की फ्रीक्वेंसी और तीव्रता पर पड़ रहे असर को लेकर एनडीटीवी के सवाल पर डॉ. मोहापात्रा ने कहा कि आमतौर पर एक साल में 4 से 5 चक्रवात आते हैं. इनमें से 3 से 4 चक्रवात अक्टूबर से दिसंबर के बीच बनते हैं, और 1-2 चक्रवात अप्रैल से जून के बीच प्री-मानसून सीजन में बनते हैं. इस साल, न तो प्री-मानसून सीजन में और न ही मानसून सीजन में कोई चक्रवात आया. 

मौसम भवन के डीजी के मुताबिक, 'अल नीनो' (El Nino) के प्रभाव वाले साल में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में चक्रवातों की संख्या आमतौर पर सामान्य से कम रहती है. ऐसे चक्रवातों की तीव्रता कम होती है, उनका रास्ता (ट्रैक) छोटा होता है, और उनका जीवनकाल भी कम होता है. इनका सबसे ज्यादा असर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कभी-कभी श्रीलंका पर पड़ता है.
Latest and Breaking News on NDTV

इस साल 'अल नीनो' की स्थिति काफी मजबूत रही है, इसलिए सामान्य से कम, केवल दो साइक्लोन आए हैं. इसके ठीक विपरीत 'ला नीना' (La Nina) वाले सालों के दौरान अधिकतर साइक्लोन ओडिशा, पश्चिम बंगाल, म्यांमार और बांग्लादेश की ओर बढ़ते हैं. इनका ट्रैक लंबा होता है, तीव्रता अधिक होती है, इसलिए इनका प्रभाव भी ज्यादा होता है.

डॉ. मोहापात्रा ने एनडीटीवी से कहा, "जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का साइक्लोन्स पर असर पड़ता है. इसके अलावा, 'अल नीनो' और 'ला नीना' का भी इन पर प्रभाव होता है. भारत के तटीय इलाकों में साइक्लोन्स की संख्या तो कम हो रही है, लेकिन बहुत तीव्र (intense) चक्रवातों की संख्या या तो स्थिर है या बढ़ रही है. अरब सागर में इनकी संख्या बढ़ रही है, जबकि बंगाल की खाड़ी की तरफ यह लगभग स्थिर है. यहां मैं 'अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान' (Extremely Severe Cyclonic Storm) की बात कर रहा हूं."

Latest and Breaking News on NDTV

मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में जब साइक्लोन पूर्वी तट के करीब पहुंचते हैं, तो उनकी गति धीमी हो जाती है. इस वजह से, समान तीव्रता वाला चक्रवात भी कहीं अधिक प्रभाव डालता है.

डॉ. मोहापात्रा कहते हैं, "हाल ही में आया "अर्णव" चक्रवात इसका सबसे अच्छा उदाहरण है. इसे आंध्र प्रदेश के तट पर 'लैंडफॉल' (जमीन से टकराने) की प्रक्रिया पूरी करने में 6 घंटे लग गए. जब ​​चक्रवात की गति धीमी हो जाती है, तो हवा और बारिश का असर और भी ज्यादा बढ़ जाता है. जलवायु परिवर्तन को लेकर हमारा यही निष्कर्ष है."

इसे भी पढ़ें: अक्टूबर में गर्मी ने तोड़ा 125 साल का रिकॉर्ड, अब बारिश और ठंड कर रही परेशान, नया साइक्लोन भी आ रहा

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Cyclones In India, Cyclones India, Climate Change
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com