- मणिपुर में मुस्लिम समुदाय ने वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने के खिलाफ आंदोलन शुरू किया है
- आंदोलन सोरा, लिलॉन्ग और शेत्रिगाओ में कई दिनों से चल रहा है और व्यापक समर्थन प्राप्त कर रहा है
- मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने मैतेई पांगल समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी चिंताओं को गंभीरता से लिया है
लंबे समय से उपद्रव की आग में झुलस रहे मणिपुर में अब एक और प्रदर्शन शुरू हो गया है. राज्य के मुस्लिम समुदाय ने वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया है. 8वीं वक्फ बोर्ड कमेटी में दो गैर मुसलमान मेंबरों को शामिल करने के खिलाफ तीखे विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. मणिपुर के सोरा, लिलॉन्ग और शेत्रिगाओ में कई दिनों से आंदोलन चल रहा है. इस आंदोलन का असर है कि चीफ मिनिस्टर खेमचंद सिंह ने भी मैतेई पांगल कम्युनिटी के प्रतिनिधियों से मुलाकात की है और उनकी चिंताओं पर विचार करने की बात कही है.
यह विरोध प्रदर्शन 'जॉइंट कमेटी अगेंस्ट इन्क्लूजन ऑफ नॉन-मुस्लिम मेंबर्स' के बैनर तले हो रहे हैं. इसके अलावा कई अन्य मुस्लिम संगठन, स्थानीय क्लब और सिविल सोसायटी ग्रुप भी इसमें शामिल हुए हैं. इस रैली की शुरुआत काकचिंग जिले के सोरा से हुई थी, जब 20 अगस्त को विरोध प्रदर्शन के लिए बड़ी संख्या में मुस्लिम उतरे थे. यह प्रदर्शन सोरा ममांग प्लेग्राउंड में हुआ था. इसके बाद कई स्थानों पर यह प्रदर्शन हुआ है. 20 तारीख को एक स्थान पर प्रदर्शन के बाद रैली भी निकाली गई थी. यह रैली सोरा पुलिस चौकी, सोरा बाजार और नेशनल हाईवे 102 से होते हुए सोरा हाई स्कूल प्लेग्राउंड तक पहुंची थी.
इस रैली को संबोधित करते हुए जमीयत-उल-उलेमा की सोरा शाखा के अध्यक्ष जुल्फिकार आलम शेख ने कहा था कि वक्फ बोर्ड मुस्लिमों से जुड़ा एक अहम संस्थान है. इसमें किसी गैर-मुस्लिम को शामिल करना ठीक नहीं है और सरकार को यह फैसला तुरंत वापस लेना चाहिए. उनका कहना था कि यदि राज्य सरकार ने इस डिमांड को नहीं माना तो फिर आंदोलन और तेज होगा. इसके अलावा उनकी यह भी डिमांड थी कि जनगणना से पहले नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस यानी एनआरसी को अपडेट किया जाए. जॉइंट कमेटी के नेता अताउर रहमान ने कहा कि इन दो गैर-मुसलमान सदस्यों को बाहर किया जाए और किसी मुस्लिम को एंट्री मिले.
रहमान ने कहा कि वक्फ बोर्ड उन संपत्तियों को संभालता है, जिन्हें मुसलमानों की कई पीढ़ियों ने दान किया है. इन संपत्तियों को मुसलमानों की धार्मिक, शैक्षणिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इनमें मस्जिद, ईदगाह, कब्रिस्तान और कॉलेज आदि शामिल हैं. ऐसे में वक्फ बोर्ड का सिस्टम पूरी तरह मुसलमानों द्वारा ही संचालित होना चाहिए. बता दें कि मणिपुर की कुल आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी 10 फीसदी की है.
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