- नोएडा के सेक्टर 150 में अधूरे मॉल के पानी से भरे बेसमेंट में कार समेत फंसे हुए थे युवराज मेहता
- युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने हादसे के समय पुलिस और फायर ब्रिगेड से मदद मांगी, पर रेस्क्यू न हो सका
- फायर ब्रिगेड के पास नाव और प्रशिक्षित कर्मी नहीं थे, जिससे युवराज तक रस्सी नहीं पहुंचाई जा सकी
बेबसी की ये दो आपबीती हैं. एक पिता की. जिसके सामने उसका इकलौता जवान बेटा डूब रहा था और वह बेबस देख रहा था. जरा थोड़ा ठहरकर उन पलों में बूढ़े पिता के दिल का अंदाजा लगाइए. क्या बीत रही होगी! और दूसरी आपबीती सिस्टम के फेल हो जाने पर एक आम आदमी की है, जिसने एक अजनबी के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी. नोएडा के सेक्टर 150 के अधूरे मॉल के पानी से भरे बेसमेंट में कार समेत गिरे 27 साल के टेकी युवराज मेहता जिंदा होते, अगर सिस्टम थोड़ा चुस्त होता. अगर मदद का एक हाथ उन तक पहुंच जाता. पढ़िए एक बेबस पिता और ठंडे पानी में कूद पड़े डिलिवरी बॉय की आपबीती....
युवराज के पिता राजकुमार मेहता की आपबीती
'पापा मुझे बचा लो'

मेरे बेटे ने रात करीब 12 बजे फोन किया कि पापा मैं नाले में गिर गया हूं. मुझे बचाओ. इतना सुनते ही उसको बचाने के लिए मैं जिस हालत में था, दौड़ पड़ा. किस्मत से बाहर मुझे कैब मिल गई. मैंने हाथ जोड़े कि भाई मुझे नाले के पास ले चलो. उसने मुझे बिठा लिया. पहले हम एक नाले के पास गए. वह वहां नहीं था. मैंने उसको फोन किया तो उसने बताया कि मैं सोसाइटी के पास वाले नाले में गिरा हूं. मुझे उसके पास पहुंचने में 40 मिनट लग गए. वह गाड़ी से निकलकर बाहर आया और हिम्मत करके छत पर लेट गया था. वहां से वह 'हेल्प हेल्प' चिल्ला रहा था ताकि को राह चलता आदमी उसकी हेल्प कर पाए.
मैं भी वहां पहुंचा और सहायता के लिए इधर-उधर दौड़ने लगा. कोई तो मदद करे. फिर मैंने 112 डायल किया. पुलिस करीब 20 मिनट में पहुंच गई थी. फायर ब्रिगेड की टीम आई लेकिन रेस्क्यू के नाम पर उन्होंने अधूरी कोशिश की. हाइड्रोलिक मशीन का इस्तेमाल किया, लेकिन वह मेरे बेटे तक रस्सी नहीं पहुंचा पाए. कमी यह थी कि उनके पास कोई ट्रेनिंग वाला आदमी नहीं था.नाव भी नहीं थी. करीब ढाई बजे के आसपास मोबाइल की वह रोशनी बंद हो गई, जिससे वह कार की छत से दिखा रहा. मैं समझ गया कि बात हाथ से निकल गई है.'
Noida, Uttar Pradesh: A car broke through the boundary wall of a drain near the Sector-150 turn in the Knowledge Park area and fell into the water-filled drain on Friday night, resulting in one death. The deceased has been identified as Yuvraj, son of Rajkumar Mehta.
— IANS (@ians_india) January 19, 2026
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आंखोंदेखीः ठंडे पानी में उतरे डिलिवरी बॉय मोहिंदर की आपबीती
'पानी ठंडा बता वे किनारे बैठे थे'

यह 16 तारीख की रात की बात है. धुंध बहुत ज्यादा थी. मुड़ने की जगह कार सीधे पानी से भरे मॉल के अधबने बेसमेंट में चली गई. गिरने के बाद लड़के ने अपने पिताजी के पास कॉल किया. पापा मैं नाले में गिर चुका हूं. मुझे नहीं पता कि मैं कहा हूं, लेकिन मुझे आकर बचा लो. पिताजी मौके पर आ गए थे. पिताजी ने पुलिस को कॉल किया, वह टाइम से आ गई थी. पुलिस के 20 मिनट बाद फायर ब्रिगेड वाले आ गए थे. उनके पास सारी सुविधाएं थीं. सच्चाई बताऊं तो लड़के को फायर ब्रिगेड वालों ने ही डुबोया है. फायर ब्रिगेड वाले चाहते तो, लड़के को बचा सकते थे. लड़का 20-25 मीटर की दूरी पर खड़ा होकर टॉर्च दिखाकर गुहार लगा रहा था कि भाई मुझे बचा लो. यह 12 बजे की बात होगी. पानी में गाड़ी गिरने के बाद वह लड़का पौने दो घंटे तक खुद को बचाने की गुहार लगाता रहा.
वह बोलता रहा मुझे बचा लो किसी भी तरह से. मुझे बचा लो. मौके पर पुलिस भी थी. एसडीआरएफ भी थी और फायर ब्रिगेड वाले भी थे. किसी ने उसकी मदद नहीं की. वे बोल रहे थे ठंडा पानी है, हम अंदर नहीं जाएंगे. अंदर सरिया है, हम नहीं जाएंगे. मैं सच कहूं तो उस लड़के की मौत का जिम्मेदार सरकारी महकमा है. मैं एक बजकर 14 मिनट पर मौके पर पहुंचा था. मैं फ्लिपकार्ट की डिलिवरी करने आया था. मैं जब आया, एसडीआरएफ वाले सीढ़ी पर बैठकर बोल रहे थे कि इसमें ठंडा पानी और सरिया है, हम अंदर नहीं जाएंगे.
वह लड़का मेरे आने से करीब 10 मिनट पहले ही डूबा था. मैंने उनसे बोला तुम बाहर आओ, मैं जाऊंगा अंदर. वे बाहर आए. मैंने अपने कपड़े उतारे और कमर पर रस्सा बांधा और करीब 50 मीटर अंदर गया मैं. मैंने पौने दो बजे तक करीब 30 मिनट पानी के अंदर उस लड़के को ढूंढा. मुझे न वह लड़का मिला और न ही वह कार मिली. उसके बाद मैं वापस आ गया.
बाहर खड़े महकमे के कुछ लोग कह रह थे कि भाई तुम 10 मिनट पहले आते तो लड़का बच जाता. जो भर्ती हुए वह फेल हो गए और मुझसे उम्मीद की जा रही थी. दो बजकर 20 मिनट मैं पानी से बाहर था. उसके बाद साढ़े पांच बजे मैं यहां से गया हूं. तब तक न तो लड़का निकला था और न ही गाड़ी निकली थी.
Noida, Uttar Pradesh: On the death of Yuvraj Mehta, who fell into a drain near Sector-150 in Noida, Eyewitness Moninder Jatav says, "...I searched in the water for 30–40 minutes, but I could not find him. By the time I reached here, he had already drowned. I was late. Before me,… pic.twitter.com/u1IhAdwKxa
— IANS (@ians_india) January 19, 2026
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