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भारत में अब तक इबोला का कोई मामला नहीं, केंद्र ने बढ़ाई सतर्कता

सरकार ने राज्यों को क्वारंटीन, जांच, इलाज, रेफरल और लैब टेस्टिंग से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) पहले ही भेज दी हैं और अस्पतालों व स्वास्थ्य संस्थानों को अलर्ट रहने और समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने को कहा गया है.

भारत में अब तक इबोला का कोई मामला नहीं, केंद्र ने बढ़ाई सतर्कता
  • भारत में अब तक इबोला वायरस का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन सरकार सतर्कता बढ़ा रही है.
  • केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने सभी राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों के साथ इबोला से बचाव तैयारियों की समीक्षा की.
  • एयरपोर्ट और प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी और स्क्रीनिंग को और सख्त करने के निर्देश दिए गए हैं.
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भारत में अब तक इबोला वायरस का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने एहतियाती कदमों को तेज कर दिया है. सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों के साथ समीक्षा बैठक कर तैयारियों का जायजा लिया. इस दौरान एयरपोर्ट और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी और स्क्रीनिंग को और सख्त करने के निर्देश दिए गए हैं.

सरकार ने राज्यों को क्वारंटीन, जांच, इलाज, रेफरल और लैब टेस्टिंग से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) पहले ही भेज दी हैं और अस्पतालों व स्वास्थ्य संस्थानों को अलर्ट रहने तथा समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने को कहा गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ अन्य मंत्रालय और विभाग भी इस संभावित खतरे को देखते हुए निगरानी और रोकथाम के उपायों में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं.

केंद्र ने 2014 में अफ्रीका में इबोला प्रकोप के दौरान की गई सफल तैयारियों का भी जिक्र किया और भरोसा जताया कि इस बार भी हालात को संभालने के लिए पूरी व्यवस्था तैयार है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लोगों को सतर्क रहने और सरकार द्वारा जारी सलाह एवं दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है.

इबोला एक गंभीर बीमारी है, जो अक्सर जानलेवा होती है और इंसानों के साथ-साथ अन्य प्राइमेट (बंदर जैसी प्रजातियों) को भी प्रभावित करती है. यह वायरस आमतौर पर जंगली जानवरों जैसे चमगादड़, साही और कुछ बंदर प्रजातियों से इंसानों में फैलता है. इसके बाद यह इंसानों में संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के तरल पदार्थ, अंगों या अन्य स्राव के सीधे संपर्क से फैलता है. यह उन सतहों और चीजों से भी फैल सकता है जो इन तरल पदार्थों से दूषित हो गई हों, जैसे बिस्तर या कपड़े.

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