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निठारी कांड: 13 मामलों में सजा-ए-मौत पाया सुरेंद्र कोली आखिरकार जेल से छूटा कैसे, कहां चूक गई CBI

नोएडा के निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है. इस घटना के बाद निठारी कांड फिर चर्चा में है. इस मामले का जब खुलासा हुआ था तो पूरा देश सन्न रह गया था. इस घटना पर फिल्म भी बन चुकी है.

क्या था नोएडा का निठारी कांड
  • निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है.
  • सुरेंद्र कोली निठारी केस में मुख्य आरोपी था, उसे कई मामलों में मौत की सजा मिली थी.
  • 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया था, जिसके बाद से वह जेल से बाहर था.
नोएडा:

नोएडा के चर्चित निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. जिसके बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है. 2005-06 के बीच हुए निठारी कांड का जब खुलासा हुआ था तो पूरा देश सन्न रह गया था. 19 साल जेल में रहने के बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से सुरेंद्र कोली बरी हो गया था. वह फिलहाल उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला में रह रहा था, जहां उसने फांसी लगा ली. ऐसे में इस बेहद चर्चित नाम का अंत बेहद खामोशी से हुआ है. इसलिए यह भी जानना जरुरी है कि नोएडा का निठारी कांड आखिर क्या था, जिसमें बॉलीवुड में फिल्म भी बन चुकी है. लेकिन ऐसा क्या हुआ था, जिससे सुरेंद्र कोली मामले में बरी हो गया था. 

2005-06 में हुआ था निठारी कांड 

करीब दो दशक पहले नोएडा के निठारी इलाके से सामने आई बच्चों के गायब होने और नरकंकाल मिलने की घटना ने पूरे देश को हिला दिया था. 2005-06 के बीच हुई इस सनसनीखेज मामले में दो नाम सामने आए थे. सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर. उस वक्त नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव से लगातार गरीब परिवारों के बच्चे और महिलाएं गायब हो रहे थे. पुलिस इन मामलों को गंभीरता से नहीं ले रही थी. 29 दिसंबर 2006 को यह मामला तब खुला, जब कोठी नंबर D-5 के पीछे एक नाले से बच्चों की खोपड़ियां, मानव कंकाल और कपड़े बरामद हुए थे. सुरेंद्र कोली पर पुलिस और जांच एजेंसियों ने उस पर कई बच्चों और महिलाओं की हत्या, रेप और शवों को ठिकाने लगाने जैसे बेहद गंभीर आरोप लगाए गए. पुलिस ने उसे और मोनिंदर सिंह पंढेर को गिरफ्तार किया. 

कौन थे सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर

यह कोठी कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की थी और सुरेंद्र कोली वहां उसका नौकर था. आरोप लगे कि सुरेंद्र कोली बच्चों को टॉफी-चॉकलेट का लालच देकर कोठी के भीतर बुलाता था, जहां उनके साथ दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी जाती थी. इस वीभत्स कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. सुरेंद्र कोली उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मंगलू खाल गांव का रहने वाला था, वह बेहद गरीब परिवार से आता था. आर्थिक तंगी की वजह से उसकी पढ़ाई ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाई और उसने स्कूल छोड़ दिया. रोजगार की तलाश में वह दिल्ली-एनसीआर आया और मजदूरी तथा घरेलू काम करने लगा. साल 2004 में वह नोएडा के सेक्टर-31 के निठारी इलाके में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर के घर काम करने लगा था. उस समय कोली की उम्र करीब 20 साल थी, उसके पीछे उसका परिवार भी था.  उसकी मां बीमार थी, पत्नी गर्भवती थी और उसकी एक छोटी बेटी भी थी.

CBI ने की निठारी कांड की जांच

निठारी के D-5 मकान में सुरेंद्र कोली घरेलू नौकर के तौर पर काम करता था. इसी मकान के पीछे दिसंबर 2006 में एक नाले और खुले इलाके से बच्चों के नरकंकाल और दूसरी हड्डियां मिलने लगीं. इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और 29 दिसंबर 2006 को सुरेंद्र कोली और मकान मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को हिरासत में लिया गया. बाद में मामले की जांच CBI को सौंप दी गई. 

सुरेद्र कोली पर रेप और हत्या का आरोप 

जांच एजेंसियों की कहानी के मुताबिक कोली बच्चों को बहला-फुसलाकर पंढेर के घर तक लाता था, आरोप था कि वहां उनके साथ रेप और हत्या की जाती थी और बाद में शवों के टुकड़े कर उन्हें ठिकाने लगाया जाता था. सबसे सनसनीखेज आरोप यह था कि कोली ने कथित तौर पर कुछ शवों के हिस्से पकाकर खाए थे. कोली के खिलाफ मुकदमों में उसका कथित कबूलनामा जांच का एक महत्वपूर्ण आधार बना. इसके अलावा पुलिस ने उसके बताए स्थानों से नरकंकाल और दूसरी चीजें बरामद करने का दावा किया था. 2009 में एक मामले में गाजियाबाद की CBI अदालत ने कोली और पंढेर को रेप और हत्या का दोषी माना और दोनों को मौत की सजा सुनाई थी. बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोली की मौत की सजा बरकरार रखी, जबकि पंढेर को उस मामले में बरी कर दिया. 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उस समय कोली की सजा को बरकरार रखा था. 

इलाहाबाद हाईकोर्ट से 13 मामलों में बरी हुआ सुरेंद्र कोली

निठारी से जुड़े अलग-अलग मामलों में सुरेंद्र कोली को कई बार मौत की सजा सुनाई गई, कुल मिलाकर उसे 13 मामलों में डेथ पेनल्टी मिली थी. लेकिन बाद में इन मामलों की न्यायिक समीक्षा में अभियोजन की कहानी और सबूतों पर लगातार सवाल उठते गए. अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोली को 12 मामलों में बरी कर दिया. कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष उसके खिलाफ अपराध साबित करने में नाकाम रहा है. हाईकोर्ट के फैसले में जांच के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए गए. कोर्ट के मुताबिक कोली का कथित कबूलनामा स्वैच्छिक और भरोसेमंद मानने में दिक्कत थी. फैसले में यह भी सामने आया कि वह लंबे समय तक पुलिस हिरासत में रहा था और उसे वकील की पर्याप्त मदद उपलब्ध नहीं थी.

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला 

हड्डियों और खोपड़ियों की बरामदगी को लेकर भी अदालत ने सवाल उठाया, अदालत ने माना कि जिस जगह से ये अवशेष मिले, वह कोई ऐसी बंद जगह नहीं थी जिस पर सिर्फ कोली का कब्जा हो. इसके अलावा खुदाई और अवशेष मिलने की प्रक्रिया को लेकर भी जांच में खामियां बताई गईं. अदालत ने यह भी कहा कि घर के अंदर से ऐसे पर्याप्त फोरेंसिक सबूत नहीं मिले जो अभियोजन की कहानी को मजबूत तरीके से साबित कर सकें. 12 मामलों में बरी होने के बाद भी कोली एक मामले में दोषी बना रहा, यही मामला आखिरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. 

सुप्रीम कोर्ट से बरी हुआ सुरेंद्र कोली 

यहां कानूनी पेच यह था कि जिन सबूतों के आधार पर कोली को एक मामले में दोषी ठहराया गया था, उन्हीं तरह के सबूतों के आधार पर बाकी 12 मामलों में उसे बरी किया जा चुका था. नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस विरोधाभास को देखते हुए कोली की क्यूरेटिव पिटीशन मंजूर कर ली. सुप्रीम कोर्ट ने उसकी पुरानी दोषसिद्धि और सजा को खत्म करते हुए उसे आखिरी मामले में भी बरी कर दिया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नवंबर 2025 में सुरेंद्र कोली जेल से बाहर आया, अदालत ने कहा कि अगर किसी दूसरे मामले में उसकी जरूरत नहीं है तो उसे तुरंत रिहा किया जाए. इस तरह करीब दो दशक तक जेल में रहने, कई बार मौत की सजा पाने और निठारी कांड के मुख्य आरोपी के तौर पर पहचाने जाने के बाद कानूनी तौर पर उसकी निठारी मामलों में दोषसिद्धि खत्म हो गई.

उत्तराखंड में था सुरेंद्र कोली

सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद से सुरेंद्र कोली गुमनाम जिंदगी जी रहा था, पहले पता चला कि वो दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके में रहता है, लेकिन अब पता चला कि वो हरिद्वार में चाय बेचकर अपना गुजारा कर रहा था. उसका मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर भी सभी मामलों में बरी हो चुका है. लेकिन अब उसने हरिद्वार में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. बड़ा सवाल यह भी है कि सुरेंद्र कोली की कोशिश फांसी से बचने की थी. लेकिन आखिरी में उसने फांसी लगाकर ही अपना जीवन खत्म कर लिया. 

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