- सवर्ण समाज ने यूजीसी के नए नियमों के विरोध में दिल्ली में यूजीसी कार्यालय का घेराव करने का ऐलान किया है.
- सवर्ण समाज का आरोप है कि यूजीसी का नया नियम समानता के खिलाफ है और छात्रों के हितों के लिए हानिकारक है.
- सवर्ण समाज के को-फाउंडर शिवम सिंह का कहना है कि यह नियम देश में एकता के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं.
यूजीसी के नए नियमों के विरोध में सवर्ण समाज ने आज दिल्ली में सड़कों पर उतरने का ऐलान किया है. सवर्ण समाज आज दिल्ली में यूजीसी कार्यालय का घेराव करेगा. सवर्ण समाज का कहना है कि यूजीसी का नया नियम समानता के खिलाफ है और यह छात्रों के हितों की हत्या जैसा है. साथ ही उनका आरोप है कि यह शिक्षा पर सीधा हमला है और देश के युवाओं को जातिवाद की खाई में धकेलने की साजिश है.
उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों की हाल में जारी अधिसूचना की सामान्य वर्ग ने काफी आलोचना की है.
सामाजिक तनाव बढ़ाना चाहती है सरकार: शिवम सिंह
सवर्ण आर्मी के को-फाउंडर ठाकुर शिवम सिंह ने कहा कि सरकार इस तरह के नियमों के जरिए देश में सामाजिक तनाव बढ़ाना चाहती है. उन्होंने कहा कि यह कदम देश की एकता और शांति के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.
गलत तरीके से निशाना बनाए जाने की आशंका
यूजीसी के प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 का मकसद उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव विरोधी तंत्र को मजबूत करना है. ये नियम कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में इक्विटी कमेटियों, समान अवसर केंद्रों, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग स्क्वॉड के गठन को अनिवार्य बनाते हैं.
हालांकि, इस नोटिफिकेशन पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं. सामान्य वर्ग के लोगों ने इन नियमों की आलोचना करते हुए इन्हें एकतरफा ढांचा बताया है और तर्क दिया है कि आरोपियों के लिए सुरक्षा अपर्याप्त है और ऊंची जाति के छात्रों को गलत तरीके से निशाना बनाया जा सकता है.
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