केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के एक बयान के बाद उनके संन्यास की अटकलें शुरू हो गई हैं. हाल ही में नितिन गडकरी ने कुछ ऐसा कहा है जो संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की ओर इशारा करता है. गडकरी ने कहा कि वह पिछले 30 सालों से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं लेकिन अब और ज्यादा काम नहीं कर सकते.
नागपुर में लक्ष्मणराव मनकर ट्रस्ट की ओर से आयोजित एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक पर्यवेक्षक प्रशिक्षण वर्ग में गडकरी ने कहा कि अब वह और ज्यादा काम नहीं कर सकते और नई पीढ़ी को मौका दिया जाना चाहिए.
'मैंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं'
गडकरी ने कहा, 'मैं पिछले 30 सालों से सार्वजनिक जीवन में लगातार काम कर रहा हूं. मैंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और कई पुरस्कार भी पाए हैं. लेकिन अब मैं ज्यादा काम नहीं कर सकता, नई पीढ़ी को काम करने का मौका दिया जाना चाहिए.'
नई पीढ़ी को मौका देने के बारे में जो उन्होंने बातें की, उससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं. हालांकि, गडकरी ने खुद अपने संन्यास को लेकर कोई बात नहीं की है.
📍Katol, Nagpur | Addressing Eklavya Ekal Vidyalaya Shikshak-Parvekshak Prashikshan Varg organised by Laxmanrao Mankar Trusthttps://t.co/IhosghyqDE
— Nitin Gadkari (@nitin_gadkari) August 23, 2026
'न हाथी है, न घोड़ा है'
गडकरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह भी बताया कि किस तरह से कोविड के बाद उनका डेली रूटीन और लाइफस्टाइल बदल गई है.
उन्होंने कहा, 'पहले, पार्टी का काम करते समय मैं समोसे खा लेता था और कहीं भी सो जाता था. लेकिन कोरोना काल के बाद, मैं अनुशासित हो गया हूं और अब रोजाना बिना चूके योग करता हूं. अगर आपकी सेहत अच्छी नहीं है, तो सत्ता और पद का कोई फायदा नहीं है.'
गडकरी ने कहा, 'सजन रे झूठ मत बोलो, न हाथी है न घोड़ा है... जिंदगी अनमोल है.'
उन्होंने किसानों की आत्महत्याओं की बढ़ती संख्या पर भी चिंता जताई और कहा कि वह बचे हुए सालों में किसानों के कल्याण के लिए और ज्यादा काम करना चाहते हैं.
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