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This Article is From Mar 29, 2024

NDTV Battleground: मोदी की गारंटी या कांग्रेस के वादे? कर्नाटक में कौन वोटर्स को खींच पाएगा अपनी ओर

पीएम मोदी ने एक जनसभा में कहा था, "रेवड़ी कल्चर वाले कभी आपके लिए नए एक्सप्रेसवे नहीं बनाएंगे. नए एयरपोर्ट या डिफेंस कॉरिडोर नहीं बनाएंगे. हमें देश की रेवड़ी कल्चर को हटाना है. रेवड़ी बांटने वाले कभी विकास के कार्यों जैसे रोड नेटवर्क, रेल नेटवर्क का निर्माण नहीं करा सकते."

बेंगलुरु:

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) में महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक (Karnataka) को दूसरा डिसाइडिंग स्टेट (निर्णायक राज्य) माना जा रहा है. यहां फिलहाल कांग्रेस (Congress) का शासन है. BJP कर्नाटक के जरिए दक्षिण भारत में एंट्री के लिए तय रणनीति पर काम कर रही है. इस बार चुनाव में पीएम मोदी (PM Narendra Modi)के फोकस में भी दक्षिण भारत में ही है. दक्षिण भारत के कुल 5 राज्यों में एकमात्र कर्नाटक में अभी BJP बेहतर पोजिशन में है. कर्नाटक में कांग्रेस जहां '5 गारंटी' को लेकर वोटर्स के बीच जा रही है. वहीं, BJP 'मोदी की गारंटी' को आगे बढ़ा रही है. ऐसे में सवाल ये है कि कर्नाटक के युवा वोटर्स को क्या चाहिए- मुफ्त की रेवड़ी (फ्री की सुविधाएं) या विकास को लेकर मोदी की गारंटी. 

NDTV के खास शो 'Battleground' में एक्सपर्ट पैनल ने कर्नाटक के राजनीतिक परिदृश्य, वोटिंग पैटर्न और चुनावी मुद्दों पर अपनी राय रखी. आरिन कैपिटल पार्टनर्स के चीफ टीवी मोहनदास पई कहते हैं, "कर्नाटक का वोटिंग पैटर्न बाकी राज्यों से कुछ अलग होता है. हम कैश, सब्सिडी के बारे में नहीं सोचते हैं. वोटिंग पैटर्न में जाति-धर्म और संप्रदाय से ज्यादा एजुकेशन, जॉब और टेक्निकल स्किल डिसाइंडिंग फैक्टर होते हैं. कर्नाटक में लोगों को डेवलपमेंट चाहिए, फ्रीबिज नहीं."

‘रेवड़ी कल्चर'पर सुप्रीम कोर्ट भी सख्त रुख अपना चुका है. वहीं, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया भी इसे लेकर देश को होने वाले नुकसान को लेकर चेतावनी दे चुका है. स्टेट फाइनेंसेस: अ रिस्क एनालिसिस' नाम से आई आरबीआई की रिपोर्ट की मानें तो पंजाब, राजस्थान, केरल, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की हालत खराब हैं. कैग (CAG) के डेटा के हवाले से इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सब्सिडी पर राज्य सरकारों के खर्च में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे कर्ज बढ़ता जा रहा है.

सिद्धारमैया की गारंटी खत्म
टीवी मोहनदास पई कहते हैं, "कर्नाटक में सिद्धारमैया की गारंटी खत्म हो गई है. विधायक भी परेशान हैं. लोग पीएम मोदी का विकास चाहते हैं. मुफ्त की रेवड़ी अब नहीं चलेगी. पीएम मोदी ने सुनिश्चित किया है कि हर भारतीय के पास बैंक अकाउंट हो. दो वक्त का खाना हो. हेल्थ इंश्योरेंस हो. कर्नाटक के लोगों को भी ये सब चाहिए. बेशक बेंगलुरु में नौकरियां हैं, लेकिन 80% नौकरियां 20,000 से कम वेतन देती हैं. दक्षिण भारत में जॉब सरप्लस (नौकरी अधिशेष) है. यहां इंटर्नल माइग्रेशन शिफ्ट हो गया है."

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कर्नाटक में क्या थी कांग्रेस की 5 गारंटी?
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस ने अपने मैनिफेस्टो में 5 गारंटी या 5 वादें किए थे.
-कांग्रेस ने हर परिवार को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का वादा किया था.
- ग्रैजुएट बेरोजगार को हर महीने 3 हजार रुपये का भत्ता और डिप्लोमा होल्डर्स 1500 रुपये प्रति माह का भत्ता देने का वादा किया गया था.
- हर परिवार की एक महिला को प्रति महीने 2 रुपये देने का वादा किया गया था.
- हर गरीब व्यक्ति को प्रति महीने 10 किलो मुफ्त अनाज का वादा किया गया था.
-महिलाओं को सरकारी बसों में मुफ्त सफर की सुविधा देने की बात कही गई थी.

मई 2023 में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 224 में से 135 सीटें हासिल कीं. सीएम बनते ही सिद्धारमैया ने इन 5 वादों को लागू किया. बजट में मुफ्त की योजनाओं और '5 गारंटी' के लिए 35000 करोड़ से ज्यादा की रकम रखी गई. इसके लिए सरकार को कर्ज लेना पड़ेगा. क्योंकि वित्तीय घाटा 12522 करोड़ हो गया है. 

कितना है सिद्धारमैया सरकार का राजस्व घाटा?
इस समय कर्नाटक की कुल आय 2 लाख 26 हजार रुपये है और उसका कुल खर्च 2 लाख 87 हजार करोड़ रुपये है. राज्य सरकार सालाना जितना कमाती है, उससे 60 हजार करोड़ रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ते हैं, जिसे राजस्व घाटा भी कहते हैं.  

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पीएम मोदी ने कांग्रेस की मुफ्त की योजनाओं को बताया था गलत
पीएम मोदी ने कर्नाटक में कांग्रेस की मुफ्त की योजनाओं को गलत बताया था. मोदी ने कहा था, "ऐसी योजनाओं से राज्यों को श्रीलंका जैसे संकट का सामना करना पड़ सकता है. फिर भी दिल्ली, पंजाब, हिमाचल और कर्नाटक में आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस की तरफ से मुफ्त की योजनाएं लागू की गईं. जिनका खामियाजा अब देखने को मिल रहा है."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2022 में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के समय भी 'रेवड़ी कल्चर' को लेकर बयान दिया था. उन्होंने कहा था, "रेवड़ी कल्चर वाले कभी आपके लिए नए एक्सप्रेसवे नहीं बनाएंगे. नए एयरपोर्ट या डिफेंस कॉरिडोर नहीं बनाएंगे. हमें देश की रेवड़ी कल्चर को हटाना है. रेवड़ी बांटने वाले कभी विकास के कार्यों जैसे रोड नेटवर्क, रेल नेटवर्क का निर्माण नहीं करा सकते." 

कांग्रेस की 5 गारंटी से कितनी अलग है मोदी की गारंटी?
पीएम मोदी ने एक इंटरव्यू में मोदी के गारंटी की परिभाषा समझाई थी. पीएम ने कहा था कि मोदी की गारंटी चुनाव जीतने के लिए तैयार कोई फॉर्मूला नहीं है. मोदी की गारंटी गरीबों का विश्वास है. आज देश का हर गरीब व्यक्ति जानता है कि मोदी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटेगा. आज देश के हर गरीब व्यक्ति को पता है कि पहले राजनैतिक दलों ने किस तरह उनका विश्वास तोड़ा. मैं जब गारंटी की बात करता हूं तो खुद को इसके साथ बांधे रखता हूं. मुझे ये कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है."

आसान शब्दों में कहे तो मोदी की गारंटी दरअसल, एक तरह का भरोसा है कि जो केंद्र की मोदी सरकार ने कहा है, उसे पूरा करके दिखाएगी.

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लेखक के बारे में
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अंजलि कर्मकार
Deputy News Editor
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