- एनडीए संसद में दो तिहाई बहुमत के लिए पूरी कोशिश में जुटा है
- गठबंधन संसद में परिसीमन बिल और महिला आरक्षण को पास कराने की कवायद में जुटा
- एनडीए की नजर एनसीपी शरद पवार गुट पर टिकी हुई है
बीस जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र से पहले एनडीए का कुनबा बढ़ाने की कोशिशें लगातार जारी हैं. शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों के शिवसेना शिंदे में विलय के बाद अब एनडीए की नजरें एनसीपी शरद पवार के आठ लोक सभा सांसदों पर टिक गई हैं. सूत्रों के अनुसार इनमें से कई सांसद एनडीए का समर्थन करने के इच्छुक बताए जाते हैं.
एनसीपी शरद गुट में बेचैनी
दरअसल, कांग्रेस और एनसीपी शरद पवार के विलय की अटकलों से भी इन सांसदों में बेचैनी की बात कही जा रही है. वे 2029 के लोक सभा चुनाव में अपनी संभावनाओं को लेकर आश्वस्त नहीं बताए जा रहे हैं. इनमें से कई का मानना है कि कांग्रेस में विलय से शायद उनकी संसद में वापसी की संभावना प्रबल न रहे. इनमें से एक सांसद ने बताया कि वैसे भी लोकसभा और विधानसभा चुनाव तीन साल दूर हैं. ऐसे में राज्य और केंद्र दोनों सरकारों से दूरी बनाना और उनका विरोध करना उनके संसदीय क्षेत्रों में उन्हें कठिनाई पैदा कर रहा है.
परिसीमन बिल पर सरकार का देंगे साथ?
सूत्रों के अनुसार महिला आरक्षण और परिसीमन के लिए संविधान संशोधन विधेयक पर एनसीपी शरद पवार के इन सांसदों के समर्थन के रास्ते तलाशे जा रहे हैं. यह पता लगाया जा रहा है कि क्या वे संविधान संशोधन विधेयकों का समर्थन कर सकते हैं या फिर मतदान के दौरान अनुपस्थित रह कर दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा कम करने में सरकार की मदद कर सकते हैं. एक नेता के अनुसार महाराष्ट्र में शरद पवार ने मुख्यमंत्री रहते हुए ही सबसे पहले महिला आरक्षण का कदम उठाया गया था. स्थानीय स्वशासन निकायों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था. ऐसे में सैद्धांतिक तौर पर एनसीपी शरद पवार को इस बिल का समर्थन करने में परेशानी नहीं आनी चाहिए.
शरद गुट में टूट की संभावना नहीं
यह कहा जा रहा है कि शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों की ही तरह एनसीपी शरद पवार के सांसदों के टूट कर विलय की संभावना फिलहाल नहीं है. बीजेपी नेतृत्व भी इसके पक्ष में नहीं बताया जा रहा है. पार्टी नेतृत्व शरद पवार और सुप्रिया सुले से दूरी बना कर रखना चाहता है. ऐसे में उन अटकलों को खारिज कर दिया गया है कि एनडीए को समर्थन के बदले एनसीपी शरद पवार के नेताओं को केंद्र में मंत्री पद दिया जा सकता है.
फिलहाल अजित गुट के साथ विलय नहीं
दूसरी ओर एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की संभावना को फिलहाल नकार दिया गया है. एनसीपी अजित पवार के नेताओं के मुताबिक अजित पवार के निधन के बाद से ही इस बारे में बात आगे नहीं बढ़ी है. कांग्रेस में एनसीपी शरद पवार के विलय की अटकलों ने इन संभावनाओं पर फिलहाल पूरी तरह से रोक भी लगा दी है. हालांकि, आगे चल कर एनसीपी शरद पवार के लोक सभा सांसदों के एनसीपी अजित पवार में विलय की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है.
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