राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने 3 जुलाई, 2026 को मेटा को एक नोटिस जारी किया. इसमें BBC आई की मीडिया रिपोर्ट पर खुद से संज्ञान लिया गया था. रिपोर्ट में चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेटिव एंड अब्यूज मटीरियल (CSEAM) से जुड़े कथित विज्ञापनों के बारे में बताया गया था. NCPCR ने इस मामले में मेटा से जवाब मांगा था. इसके जवाब में, मेटा ने एक हफ्ते बाद अपना जवाब दिया. अब, NCPCR ने मामले की सच्चाई जानने के लिए जांच शुरू करने का फैसला किया है.
रिपोर्ट में क्या था?
बीबीसी की खोजी रिपोर्ट में बताया गया था कि मेटा प्लेटफॉर्म्स और खासकर इंस्टाग्राम पर बच्चों से जुड़े यौन अपराध के कंटेट को बढ़ावा दिया गया. रिपोर्ट में कहा गया कि जांच में पता चला है कि इंस्टाग्राम भारत में बाल यौन शोषण सामग्री को बढ़ावा देने वाले पेड विज्ञापन चला रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो मेटा से हटाए जाने पर बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि 'इस मामले में मेटा के ग्लोबल चीफ मार्क जुकरबर्ग को माफी मांगनी चाहिए.'#NishikantDubey pic.twitter.com/aiybfaz8Yr
— NDTV India (@ndtvindia) August 3, 2026
संसदीय समिति ने भी जताई थी चिंता
बीते दिन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के नियमन को लेकर इलेक्ट्रोनिक और आईटी मामलों की संसदीय सीमिति की बैठक हुई थी. बैठक के चेयरमैन निशिकांत दुबे ने बताया कि समिति ने मेटा समेत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बच्चों और महिलाओं से जुड़े आपत्तिजनक कंटेट को लेकर आपत्ति जताई है.
निशिकांत दुबे ने कहा, "CSAM (चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज़ मटीरियल) एक और मुद्दा है. YouTube पर भी ऐसे कंटेंट हैं. मेटा के पास भी ऐसे कंटेंट है और वे चाइल्ड अब्यूज़ से जुड़ा कंटेंट नहीं हटाते हैं. भारत सरकार के ये दोनों नियम बहुत सख्त हैं और ऊपर से वे होम मिनिस्ट्री की भी नहीं सुनते. वे IT मिनिस्ट्री की भी नहीं सुनते. हमने कहा है कि इन सभी मामलों में सेफ हार्बर हटाया जाना चाहिए."
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