विज्ञापन

बगावत कर बनी NCP, बगावत कर बनी अजीत NCP, अब अजीत NCP में बगावत?

शरद पवार द्वारा स्थापित NCP में तीसरी बगावत की अटकलें तेज हैं. सुनेत्रा पवार और प्रफुल्ल पटेल गुट के बीच मतभेदों की चर्चा के बीच पार्टी के अंदर नए राजनीतिक समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं.

बगावत कर बनी NCP, बगावत कर बनी अजीत NCP, अब अजीत NCP में बगावत?
एक बगावत से बनी NCP में क्या होने वाली है तीसरी बगावत? सुनेत्रा पवार और प्रफुल्ल पटेल खेमे की चर्चाओं से बढ़ी राजनीतिक हलचल

NCP Rebellion: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर NCP चर्चा के केंद्र में है. शरद पवार की ओर से स्थापित पार्टी पहले 2019 और फिर 2023 में बड़ी बगावतों का सामना कर चुकी है. अब पार्टी में सुनेत्रा पवार और प्रफुल्ल पटेल खेमों के बीच मतभेदों की चर्चाओं ने तीसरी बगावत की अटकलों को जन्म दिया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हुई एक अहम मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है. हालांकि पार्टी की ओर से किसी संभावित टूट की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

ऐसी है NCP की कहानी

ये कहानी है उस राष्ट्रवादी कांग्रेस की जिसकी स्थापना महाराष्ट्र के स्ट्रांग मैन कहे जाने वाले शरद पवार ने 1999 में की थी. 85 साल के शरद पवार अपने छह दशकों के सियासी करियर में बगावत करने और करवाने के लिये जाने जाते रहे हैं. अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत उन्होंने कांग्रेस से की और इसी पार्टी में रहते हुए वे तीन बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी बने. लेकिन साल 1999 में उन्होंने इसी कांग्रेस पार्टी से बगावत कर दी.

Latest and Breaking News on NDTV
कांग्रेस में रहते हुए पवार नब्बे के दशक में पार्टी के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक माने जाते थे. राजीव गांधी की 1991 में हत्या के बाद जब देश में कांग्रेस की सरकार आयी तो पी.वी.नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने, लेकिन इस कुर्सी पर पवार की भी नजर थी.

राजीव गांधी की हत्या के बाद से उनकी पत्नी सोनिया गांधी ने खुद को राजनीति से अलग रखा था और पवार को ऐसा लग रहा था कि आगे चलकर उन्हें भी प्रधानमंत्री बनने का मौका मिल सकता है. लेकिन उनके अरमानों पर उस वक्त पानी फिर गया जब सोनिया गांधी ने राजनीति में सक्रिय होने का फैसला किया और 1998 में कांग्रेस की अध्यक्ष बन गईं.

शरद पवार को अब अपनी महत्वाकांक्षा खतरे में नजर आने लगी. उन्हें लगा कि कांग्रेस में रहते हुए उनका सियासी करियर ज्यादा आगे नहीं जा पायेगा इसलिए उन्होंने पार्टी में बगावत करने की ठानी.

1999 के लोकसभा चुनाव के पहले शरद पवार ने पी.ए संगमा और तारिक अनवर जैसे बडे नेताओं के साथ मिलकर बगावत कर दी और एक नई पार्टी का गठन किया. इस पार्टी का नाम दिया गया नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी यानी की एनसीपी. अपनी बगावत को जायज ठहराने के लिए उन्होंने सोनिया गांधी के विदेशी मूल को मुद्दा बनाया.

Latest and Breaking News on NDTV

ये आइडिया उन्हें अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी, लेकिन निजी जीवन में दोस्त, बाल ठाकरे से मिला था जो हमेशा सोनिया गाँधी पर उनके इटालियन मूल को लेकर निशाना साधते थे.

पवार ने कहा था कि उन्हें विदेशी मूल की महिला का नेतृत्व स्वीकार नहीं है. उनका तर्क था कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पदों पर विदेशी मूल का शख्स नहीं बैठना चाहिये.

साल 2000 में राष्ट्रवादी कांग्रेस को एक राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता मिल गयी. दिलचस्प बात ये है कि 2004 में जब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की सरकार स्थापित हुई तो शरद पवार की पार्टी भी उस गठबंधन में शामिल हो गयी और पवार उस कैबिनेट में मंत्री भी बन गये थे. उस वक्त विदेशी मूल का मुद्दा आडे नहीं आया.

बगावत घूमकर आयी और खुद की पार्टी को तोड़ दिया

बगावत की नींव पर खडी हुई पवार की पार्टी को भी खुद 2019 में बगावत झेलनी पडी. उस साल महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव के नतीजे आने के बाद सरकार बनाने को लेकर जब सियासी उठापटक चल रही थी तब उन्ही के भतीजे अजीत पवार ने दर्जनभर विधायकों को साथ लेकर पार्टी से बगावत कर दी. जब एक तरफ सरकार बनाने को लेकर शरद पवार शिव सेना और कांग्रेस से बात कर रहे थे, तो वहीं 23 नवंबर 2019 की सुबह अजीत पवार, देवेंद्र फडणवीस के साथ गुपचुप राज भवन पहुंच गये.

Latest and Breaking News on NDTV

उन तस्वीरों ने पूरे देश को चौंका दिया जिसमें फडणवीस मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते नजर आये और अजीत पवार उपमुख्यमंत्री पद की. शरद पवार को जानने वालों के लिये ये एक बहुत बडा झटका था क्योंकि सियासी दांव-पेंच में उन्हें मात देना आसान नहीं होता.

शरद पवार ने भी बागी विधायकों को दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की धमकी देकर तीन दिनों के भीतर उन्हें वापस अपने पास बुला लिया. बगावत असफल हो गयी.

कुछ वक्त बाद शरद पवार ने अजीत पवार को माफ कर दिया और उन्हें फिर से राज्य की महाविकास आघाडी सरकार में बतौर उपमुख्यमंत्री शामिल कर लिया. चार साल बाद अजीत पवार ने फिर से बगावत करके सबको चौंका दिया. इस बार उन्होने बगावत पूरी तैयारी से की थी. न केवल पार्टी से बड़ी संख्या में विधायक और सांसद शरद पवार को छोड़ उनके साथ हो लिये बल्कि चुनाव आयोग ने घड़ी का चुनाव चिन्ह और पार्टी का आधिकारिक नाम भी उन्हें ही दे दिया. जिस पार्टी को शरद पवार ने खडा किया था, अजीत पवार ने उसी से उन्हें बाहर कर दिया. उन्हें दूसरा चुनाव चिन्ह – तुतारी लेना पड़ा और पार्टी का नया नाम अपनाना पड़ा एनसीपी (एसपी).

Latest and Breaking News on NDTV

अजीत पवार के नेतृत्व में एनसीपी राज्य में बीजेपी की अगुवाई वाले महायुति और केंद्र में एनडीए गठबंधन का हिस्सा बनी. खबर आ रही थी कि अजीत पवार अपने चाचा शरद पवार से सुलह करके फिर एक बार दोनों खेमों को एक करने की तैयारी कर रहे थे लेकिन इसी साल बारामती में विमान लैंडिंग के दौरान हुए हादसे में उनकी मौत हो गयी. अजीत पवार की मौत के बाद एकीकरण की प्रक्रिया पर ब्रेक लग गया. दरअसल पार्टी के वरिष्ठ नेता जैसे प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे दोनों खेमों के एक होने के खिलाफ हैं क्योंकि उन्हें लग रहा है कि अगर दोनों खेमें एक हो जायेंगे तो पार्टी में उनका वर्चस्व घट जायेगा. एकीकृत पार्टी में सुप्रिया सुले और रोहित पवार जैसे नेताओं की ज्यादा चलेगी.

NCP Rebellion: क्या फिर होगी बगावत?

NCP Rebellion: क्या फिर होगी बगावत?

अब तीसरी बगावत के संकेत

अब संकेत मिल रहे हैं कि एनसीपी में तीसरी बगावत भी हो सकती है. पार्टी का नेतृत्व अजीत पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के पास चला गया है और उनके बेटे पार्थ भी पार्टी में सक्रिय हो गये हैं. पार्थ के तौर-तरीके पटेल और तटकरे को पसंद नहीं. पार्टी दो खेमों में बंटी नजर आ रही है. एक खेमा सुनेत्रा पवार की तरफ है तो दूसरा प्रफुल्ल पटेल की तरफ. मंगलवार की रात पटेल और तटकरे ने गुपचुप राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से उनके बंगले पर जाकर मुलाकात की. इस मुलाकात में क्या बात हुई ये अब तक बाहर नहीं आया है लेकिन इस मुलाकात से सुनेत्रा और पार्थ पवार नाराज बताये जाते हैं; दोनों ने फडणवीस से मिलने के पहले सुनेत्रा पवार को इत्तला नहीं किया था. इस घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गयी है कि एनसीपी में अब तीसरी बगावत होने वाली है.

यह भी पढ़ें : NCP अध्यक्ष चुनाव विवाद पर सुनील तटकरे का पलटवार, बोले- सुनेत्रा पवार का चुनाव पूरी तरह वैध

यह भी पढ़ें : मानसून सत्र 2026 : संख्या बल होगा, तभी सरकार लाएगी संविधान संशोधन बिल; DMK, सपा और एनसीपी एसपी पर नजरें

यह भी पढ़ें : पूर्ण बहुमत नहीं फिर भी AAP का अध्यक्ष; कादियां नगर परिषद चुनाव के बाद झड़प, प्रताप बाजवा ने लगाए गंभीर आरोप

यह भी पढ़ें : ई रिक्शा-कैश बांटकर भारत में बसाते थे; रोहिंग्या-बांग्लादेशी घुसपैठ नेटवर्क पर ED का बड़ा एक्शन, सोना भी मिला

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
NCP Rebellion, Sharad Pawar, Praful Patel, Sunetra Pawar, Maharashtra Politics
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com