LUCC Scam ED Arrest: देशभर में लाखों लोगों से निवेश के नाम पर हजारों करोड़ रुपये की ठगी करने वाले बहुचर्चित LUCC घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने रवि शंकर तिवारी उर्फ रवि तिवारी को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत गिरफ्तार किया है. उसे 14 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था. अगले दिन 15 जुलाई को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 10 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया. अब ईडी उनसे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि निवेशकों का पैसा कहां-कहां लगाया गया और इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे.
ED, Headquarter Investigation Unit has arrested Ravi Shankar Tiwari @ Ravi Tiwari under PMLA, 2002 on 14.07.2026 in connection with an ongoing investigation in the case of Loni Urban Multi State Credit and Thrift Cooperative Society (LUCC) and others in a matter related to… pic.twitter.com/xSW3jpAMkk
— ED (@dir_ed) July 16, 2026
कम समय में ज्यादा मुनाफा देने का लालच
ईडी के मुताबिक, इस मामले की जांच उत्तर प्रदेश के ललितपुर और मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी. आरोप है कि लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC), लस्टीनेस जनहित क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी (LJCC) और ऑप्शन वन इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी कंपनियों ने लोगों को कम समय में ज्यादा मुनाफा देने का झांसा दिया.
जांच एजेंसी का कहना है कि यह सिर्फ एक राज्य का नहीं, बल्कि पूरे देश में फैला हुआ घोटाला है. अब तक की जांच में सामने आया है कि करीब 30.51 लाख निवेशकों से लगभग 10,314 करोड़ रुपये जुटाए गए और बाद में इस रकम का गबन कर लिया गया. इसी वजह से देश के अलग-अलग राज्यों में इन कंपनियों और इनके अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और गबन के कई मामले दर्ज किए गए हैं.

LUCC Scam: ईडी का एक्शन
Photo Credit: ED
रवि शंकर तिवारी क्या थी भूमिका?
ईडी की जांच में रवि शंकर तिवारी की भूमिका भी सामने आई है. एजेंसी के मुताबिक, वह साल 2009 से सागा ग्रुप नेटवर्क से जुड़े हुए थे. इस नेटवर्क का नेतृत्व समीर अग्रवाल करता था, जो फिलहाल विदेश में बताया जा रहा है. रवि तिवारी सागा ग्रुप की कई कंपनियों में वरिष्ठ पद पर थे और एडवांटेज ट्रेडकॉम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ऑप्शन वन इंडस्ट्रीज, LUCC और अन्य कंपनियों के कामकाज में अहम भूमिका निभा रहे थे. ईडी का आरोप है कि उन्होंने समीर अग्रवाल के साथ मिलकर इन कंपनियों के संचालन और निवेशकों से पैसा जुटाने में सक्रिय भूमिका निभाई.
जांच में यह भी पता चला कि रवि तिवारी का कई कंपनियों और फर्मों से संबंध था. ईडी का आरोप है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल अपराध से कमाए गए पैसे को अलग-अलग खातों में भेजने, छिपाने और निकालने के लिए किया गया. एजेंसी का कहना है कि इसी पैसे से रवि तिवारी और उनके परिवार के नाम पर कई मकान, फ्लैट, दुकानें और दूसरी व्यावसायिक संपत्तियां खरीदी गईं.
पहले भी कई संपत्तियां हो चुकी हैं कुर्क
ईडी ने बताया कि इस मामले में पहले भी कई संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं. अब रवि तिवारी की गिरफ्तारी के बाद एजेंसी पूरे नेटवर्क की वित्तीय जांच को आगे बढ़ा रही है. ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी के पैसे का कितना हिस्सा अभी भी बरामद किया जा सकता है, पैसा किन-किन लोगों तक पहुंचा और इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों की क्या भूमिका थी. एजेंसी का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में इस मामले में और भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है.
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