नवी मुंबई में भारी बारिश के बीच एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. नेरुल इलाके में कॉलेज से घर लौट रही दो छात्राएं सड़क पर पड़े खुले बिजली के तार की चपेट में आ गईं. गनीमत रही कि करंट लगने के बाद भी दोनों छात्राओं की जान बच गई. हादसे के तुरंत बाद दोनों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल में उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है. इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और बिजली विभाग की घोर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है.
नवी मुंबई की मेयर सुजाता पाटिल ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं. मेयर ने साफ किया है कि इस हादसे के लिए जो भी विभाग या अधिकारी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल सुरक्षा के लिहाज से इलाके की मुख्य बिजली सप्लाई को बंद कर दिया गया है ताकि कोई दूसरा इस लापरवाही का शिकार न बने.
आईसीयू में दोनों छात्राएं
मिली जानकारी के अनुसार, दोनों छात्राएं कॉलेज से अपने घर वापस जा रही थीं, तभी बारिश के पानी के बीच उनका पैर एक खुले हुए बिजली के तार पर पड़ गया. करंट का झटका लगते ही मौके पर हड़कंप मच गया. घायल छात्राओं को तुरंत पास के डी. वाई. पाटिल अस्पताल ले जाया गया. हालांकि, डॉक्टरों के मुताबिक दोनों छात्राएं पूरी तरह होश में हैं और बातचीत कर रही हैं, लेकिन बिजली का झटका गहरा होने के कारण उन्हें अगले 24 घंटे तक डॉक्टरों के ऑब्जर्वेशन में रखा गया है.
लापरवाही पर भड़कीं मेयर
इस हादसे के बाद नवी मुंबई नगर निगम हरकत में आ गया है. मेयर सुजाता पाटिल ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा, "हम एमएसईबी और अन्य संबंधित अधिकारियों से इस घोर लापरवाही पर जवाब मांग रहे हैं. शहर में जहां-जहां भी ऐसे खुले और खतरनाक बिजली के कनेक्शन हैं, उन्हें तुरंत चेक करके दुरुस्त करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं."
जवाबदेही तय करने के सवाल पर मेयर ने बताया कि फिलहाल यह पता लगाया जा रहा है कि यह खुला हुआ तार असल में किस विभाग का है.
उन्होंने कहा, "शहर में कई प्राधिकरण काम करते हैं. यहां पालिका के सीसीटीवी कैमरे भी चालू हैं, लेकिन शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह लाइन पालिका की नहीं है. अगर यह हमारी लाइन होती तो शॉर्ट सर्किट होते ही कनेक्शन अपने आप बंद हो जाता. जांच चल रही है और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होना तय है."
खुदाई का अधूरा काम बना मुसीबत
सदन में भूमिगत केबल को लेकर उठ रहे सवालों पर मेयर ने माना कि जमीनी स्तर पर काम में बड़ी कमियां हैं. उन्होंने कहा कि कई बार अलग-अलग कामों के लिए सड़कों की खुदाई की जाती है, जिससे जमीन के अंदर दबे केबल टूट जाते हैं. इसके बाद संबंधित कर्मचारी या ठेकेदार उन तारों पर सिर्फ टेप लगाकर उन्हें वैसे ही छोड़ देते हैं, जो बारिश के मौसम में जानलेवा साबित होते हैं.
मेयर ने आगे कहा, "भारी बारिश के दौरान जब पानी भरता है, तो ये ठीक से रिपेयर न किए गए तार ऊपर आ जाते हैं. इस गंभीर मुद्दे को हम आगामी महासभा में प्रमुखता से उठाएंगे. इससे पहले एमएसईबी और संबंधित सभी विभागों के अधिकारियों की एक आपात बैठक बुलाई जा रही है, ताकि मानसून के दौरान नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल एक ठोस प्लानिंग की जा सके और शहर को सुरक्षित बनाया जा सके."
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