- NCW ने महाराष्ट्र के CM को नासिक TCS मामले की जांच रिपोर्ट सौंपी जिसमें कार्यालय का माहौल जहरीला बताया गया.
- रिपोर्ट में महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न, मानसिक दबाव और धार्मिक अपमान की गंभीर घटनाओं का उल्लेख है.
- रिपोर्ट के अनुसार, 'इंटरनल कमेटी' पीड़ितों के प्रति सहानुभूति दिखाने में विफल रही है.
TCS नासिक से जुड़े चर्चित मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को 50 पन्नों की जांच रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें कार्यालय के माहौल को बेहद ‘जहरीला' बताया गया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यहां महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न, मानसिक दबाव और धार्मिक अपमान जैसी गंभीर घटनाएं सामने आईं.
जांच में दानिश, तौसीफ और रजा मेमन का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है. इन पर आरोप है कि उन्होंने न केवल कार्यस्थल का माहौल बिगाड़ा, बल्कि कुछ कर्मचारियों पर धर्म परिवर्तन का दबाव भी बनाने की कोशिश की. रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यालय में उनका प्रभाव इतना था कि कोई भी कर्मचारी उनके खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था, क्योंकि उन्हें तबादले या नौकरी जाने का डर था.
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इंटरनल कमेटी की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
महिला आयोग ने अश्विनी चैनानी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. समिति का कहना है कि उनकी चुप्पी और संवेदनशीलता की कमी ने आरोपियों के हौसले बढ़ाए और एक तरह से उनके कृत्यों को अप्रत्यक्ष समर्थन मिला.
रिपोर्ट में TCS की इंटरनल कमेटी (IC) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं. आयोग के अनुसार, समिति पीड़ितों के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील रही और POSH (महिला सुरक्षा) कानून का पालन लगभग ‘शून्य' पाया गया.
यह गवर्नेंस की बड़ी विफलता: महिला आयोग
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि नाशिक यूनिट में CCTV कैमरे खराब थे और सुरक्षा व्यवस्था नदारद थी. इसे महिला आयोग ने ‘गवर्नेंस की बड़ी विफलता' बताया है.
NCW ने राज्य सरकार को सिफारिश की है कि आरोपियों के खिलाफ BNS की धाराओं में कार्रवाई की जाए और गवाहों को ‘विटनेस प्रोटेक्शन एक्ट' के तहत सुरक्षा दी जाए.
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