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'मुरासु' बना चक्रवाती तूफान, आंध्र तट की ओर बढ़ा खतरा; 120 KM/H तक चलेंगी हवाएं…

उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट पर नेल्लोर और नरसापुर के बीच 2 और 3 नवंबर की दरम्यानी रात लैंडफॉल कर सकता है. इस दौरान 100 से 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और 120 किमी प्रति घंटे तक झोंके आने की आशंका है.

'मुरासु' बना चक्रवाती तूफान, आंध्र तट की ओर बढ़ा खतरा; 120 KM/H तक चलेंगी हवाएं…
  • बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी के अनुसार निकाह के लिए दोनों पक्षों का मुसलमान होना आवश्यक होता है
  • मौलाना ने कहा कि यदि निधि राजदान इस्लाम स्वीकार कर लेतीं तो विवाह इस्लामी दृष्टि से जायज माना जाता
  • अभिनेत्री हिना खान ने उमर अब्दुल्ला की निजी पसंद का सम्मान करते हुए लोगों को जीने और जीने देने की सलाह दी

बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती तूफान 'मुरासु' का खतरा बढ़ रहा है. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि यह तूफान अगले 24 घंटों में और खतरनाक रूप ले सकता है और 2-3 नवंबर की दरम्यानी रात आंध्र प्रदेश के तट से टकराएगा. तूफान के असर से आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु में भारी बारिश, तेज हवाओं और समुद्र में ऊंची लहरों का खतरा बढ़ गया है. कई जिलों में अलर्ट जारी कर प्रशासन को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं.

बंगाल की खाड़ी में बना 'मुरासु'

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बना दबाव क्षेत्र पहले गहरे दबाव (डीप डिप्रेशन) में बदला और अब चक्रवाती तूफान 'मुरासु' का रूप ले चुका है. इसके 2 नवंबर की सुबह तक और मजबूत होकर सीवियर साइक्लोनिक स्टॉर्म बनने की संभावना है.

मौसम विभाग का अनुमान है कि यह तूफान उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट पर नेल्लोर और नरसापुर के बीच 2 और 3 नवंबर की दरम्यानी रात या 3 नवंबर की शुरुआती घंटों में लैंडफॉल करेगा. इस दौरान 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जबकि झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है.

नाम का क्या मतलब है?

इस चक्रवात का नाम भारत की ओर से रखा गया है. 'मुरासु' का अर्थ है युद्ध में बजाया जाने वाला नगाड़ा. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तूफान तेजी से ऊर्जा हासिल कर रहा है, इसलिए इसके प्रभाव वाले इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है.

ओडिशा में हाई अलर्ट, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की तैयारी

ओडिशा सरकार ने राज्य के दक्षिणी हिस्सों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है. खासकर गंजाम, गजपति और कंधमाल जिलों पर ज्यादा नजर रखी जा रही है.

राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, निचले इलाकों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी गई है. अधिकारियों ने बताया कि गजपति जिले में करीब 150 ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं जहां भूस्खलन का खतरा है. मौसम विभाग ने कहा है कि ओडिशा में 2 नवंबर से बारिश शुरू होगी और 3 व 4 नवंबर को इसकी तीव्रता बढ़ सकती है.

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