मुंबई पुलिस के इतिहास में ये अपने किस्म का एक अनोखा मामला है जहां किसी मामले का मुख्य आरोपी उसी अपराध का मुख्य अभियुक्त बन जाता है. इससे पहले कि ये अधिकारी अपनी जांच में किसी को गिरफ्तार कर पाता एक दूसरी जांच एजेंसी ने उसे ही गिरफ्तार कर लिया. ये अधिकारी हैं मुंबई पुलिस के निलंबित असिसटेंट पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाजे और कहानी है 2021 के चर्चित एंटीलिया कांड की. उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटकों से लदी कार खड़ी करने के आरोप में गिरफ्तार वाजे को साढे पांच साल बाद सेशंस कोर्ट से जमानत मिली है.
अंबानी परिवार को दी गई थी धमकी
फरवरी 2021 की एक शाम खबर आयी कि उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आलीशान निवास एंटीलिया के बाहर जिलेटिन छड़ों से लदी से एक स्कोर्पियो कार खड़ी मिली है. विस्फोटकों के साथ कार में एक कागज भी मिला जिसमें अंबानी परिवार को जान से मारने की धमकी दी गयी थी.
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इस मामले ने पूरे पुलिस महकमें के कान खडे कर दिये. तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने अपने खास अधिकारी सचिन वाजे को इस मामले की जांच के लिये लगाया. वाजे ने मामले की जांमच शुरू की लेकिन उनके साथ साथ महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) और एनआईए ने भी समांतर जांच शुरू कर दी.
इससे पहले कि वाजे अपनी जांच में किसी निष्कर्ष तक पहुंच पाते एटीएस को पता चला कि जिस चोरी की कार में विस्फोटक लादे गये थे वो मनसुख हिरन नाम के ठाणे के एक कारोबारी की थी.
दाल में काला आया नजर
एटीएस अधिकारी ये जानकर भी हैरत में पड गये कि वाजे हिरेन के दोस्त थे और चोरी हुई कार पहले कुछ वक्त के लिये हिरेन से लेकर इस्तेमाल भी कर चुके थे. उन्हें दाल में कुछ काला नजर आया. वे हिरेन से कड़ी पूछताछ कर सच तक पहुंचना चाहते थे.
लेकिन इससे पहले कि वो हिरेन तक पहुंच पाते उसकी लाश सचिन वाजे के घर के करीब ठाणे की रेतीबंदर खाडी में पडी मिली. किसी ने उसकी हत्या कर दी थी और लाश को पानी में फैंक दिया था. लाश पानी से बाहर न निकले इस इरादे से उसके मुंह में रूमाल भर दिये गये थे लेकिन फिर भी स्थानीय मछुआरों ने खाड़ी के किनारे लाश तैरते देख ली.
अपने ही अपराध की जांच कर रहा था अधिकारी
NIA ने औपचारिक तौर पर अपनी जांच शुरू की. जब उन्होने एंटीलिया के इर्द गिर्द के सीसीटीवी फुटेज को देखा तो भौंचक्के रह गये. विस्फोटकों वाली कार पार्क करने वाले शख्स मुंह पर मास्क लगाये सचिन वाजे की तरह ही दिख रहा था. इस मतलब ये था कि मुंबई पुलिस का एक अधिकारी अपने ही किये अपराध की जांच खुद कर रहा था. एनआईए ने उसे गिरप्तार कर लिया और उसे इस साजिश का मुख्य आरोपी बनाया.
मनसुख हिरेन की हत्या के आरोप में वाजे के पूर्व बॉस और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा समेत कुल दस लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया. सितंबर 2021 में एनआईए ने इस मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ दस हजार पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की.
इस मामले ने महाराष्ट्र की सियासत में भी हडकंप मचा दिया और तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सरकार मुसीबत में आ गयी. वाजे के पकडे जाने के बाद तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख ने परमबीर सिंह को मुंबई पुलिस कमिश्नर पद से हटा दिया.
इसके बाद सिंह ने राज्यपाल को देशमुख की शिकायत करते हुए एक पत्र लिखा कि देशमुख सचिन वाजे के जरिये मुंबई के होटल और बार मालिकों से हर महीने सौ करोड रूपये की उगाही करवाना चाहते थे. इस आरोप के आधार पर विपक्षी पार्टी बीजेपी ने ठाकरे सरकार को घेरा और देशमुख को गृहमंत्री पद से हटा दिया गया. सीबीआई ने भ्रष्टाचार के आरोप में देशमुख को गिरप्तार कर लिया.
दिलचस्प बात ये है कि जिस एंटीलिया कांड ने इतना सियासी हडकंप मचाया उसका असली मास्टरमाइंड कौन है ये बात आज तक सामने नहीं आयी है. वाजे मामले का प्रमुख आरोपी जरूर है लेकिन ये बात न तो राजनीतिक गलियारों में और न ही पुलिस महकमें में किसी के गले उतर रही है कि एक एपीआई रैंक का अधिकारी बिना किसी बड़ी शख्सियत की मर्जी और मदद के बिना इतनी हिम्मत कैसे कर सकता है.
दबी जुबान से लोग कुछ नामों की चर्चा जरूर करते हैं लेकिन चूंकि एनआईए ने उन्हें किसी कारणों से अपना आरोपी नहीं बनाया है इसलिये कोई खुलकर उनके बारे में नहीं बोलता. कहा तो यही जा रहा है कि एनआईए ने सिर्फ प्यादों को पकडा है मास्टरमाइंड को नहीं.
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