पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 19 सितंबर 2026 को वापस लौट रहा है. भारत मौसम विभाग ने ये पूर्वानुमान सोमवार को जारी किया. इसके साथ ही 03 जून को शुरू हुआ मॉनसून सीजन अब खत्म होने के कगार पर है. भारत मौसम विभाग के मुताबिक, इस साल 01 जून से 14 सितम्बर के बीच देशभर में औसत से 15% कम बारिश रिकॉर्ड की गयी है. सबसे कम बारिश दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में दर्ज की गयी है जहां औसत से 28% कम बारिश हुई है, जबकि पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के राज्यों में बारिश की कमी इस सीजन के दौरान 25% रही है.
इस मॉनसून सीजन के दौरान बारिश की कमी के पीछे एक अहम वजह 'अल नीनो' है. भारत मौसम विभाग के अनुसार, वर्त्तमान में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में मज़बूत अल-नीनो (El Niño) की स्थिति बनी हुई है और आने वाले महीनों में इन स्थितियों के और मज़बूत होने की उम्मीद है.
इसका सीधा असर खरीफ की अहम फसलों की बुआई पर पड़ा है. कृषि मंत्रालय के मुताबिक, 11 सितम्बर, 2026 तक देशभर में खरीफ फसलों की बुआई पिछले साल से 16.05 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में रिकॉर्ड की गयी है.

चावल की फसल पर पड़ा सबसे ज्यादा असर
सबसे ज्यादा असर चावल की फसल की बुआई पर पड़ा है. ये पिछले साल के मुकाबले 11 सितम्बर, 2026 तक 16.97 लाख हेक्टेयर (-3.82%) घट गया है. जाहिर है, चावल की बुआई में गिरावट का असर इसके प्रोडक्शन पर पड़ने की आशंका है. इसकी वजह से बाजार में औसतन जितना चावल पहुंचता है उससे इस साल कम पहुंचेगा.
ये चिंताजनक आंकड़े ऐसे वक्त पर सामने आये हैं जब देश में थोक महंगाई बढ़ रही है. वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार को आंकड़े जारी कर कहा कि जुलाई 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई दर अगस्त 2026 में सालाना आधार पर बढ़कर 9.92 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई में यह 9.78 प्रतिशत थी. ये आंकड़े नई WPI सीरीज़ पर आधारित हैं, जिसमें 2022-23 को आधार वर्ष माना गया है.
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, "सभी समूहों में, 'खनिज तेलों (पेट्रोलियम उत्पादों सहित)', 'खाद्य सामग्री', 'खाद्य उत्पादों का विनिर्माण', 'मूलभूत धातुओं का विनिर्माण', 'गैर-खाद्य पदार्थ' और 'रसायन और रासायनिक उत्पादों का विनिर्माण' अगस्त 2026 में डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति के प्रमुख कारक रहे हैं".
WPI फूड इंडेक्स
फूड इंडेक्स में 'प्राइमरी आर्टिकल्स' (प्राथमिक वस्तुओं) के मुख्य समूह से 'फूड आर्टिकल्स' (खाद्य वस्तुएं) और 'मैन्युफ़ैक्चर्ड प्रोडक्ट्स' (निर्मित उत्पादों) के मुख्य समूह से 'फ़ूड प्रोडक्ट्स का निर्माण' शामिल है. अगस्त 2026 में इसमें साल-दर-साल (YoY) 7.05 प्रतिशत की महंगाई दर देखी गई, जबकि जुलाई 2026 में यह 6.65 प्रतिशत थी.
सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, 'फ्यूल एंड पावर' (ईंधन और बिजली) में महंगाई दर 20.05 प्रतिशत से बढ़कर 22.93 प्रतिशत हो गई. हाल के सप्ताहों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का असर इस कैटगरी में महंगाई दर पर साफ दिखाई दिया.
जाहिर है, थोक महंगाई दर में बढ़ोतरी के पीछे वजह एक अहम वजह मध्यपूर्व एशिया में बढ़ती अनिश्चितता है जिसकी वजह से कच्चा तेल फिर महंगा होता जा रहा है. पेट्रोलियम मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 11 सितंबर 2026 को भारतीय क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत बढ़कर 119.69 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर पहुंच गई. इसके साथ ही सितंबर 2026 के शुरुआती 11 दिनों में क्रूड ऑयल की औसत कीमत बढ़कर 107.66 डॉलर प्रति बैरल हो गई है.
यानी, महंगाई के मोर्चे पर चुनौती आने वाले महीनों के दौरान और बड़ी हो सकती है.
विश्व मौसम विज्ञान संगठन की क्या है चेतावनी?
इसके साथ ही, ग्लोबल वेदर पर नजर रखने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था 'विश्व मौसम विज्ञान संगठन' (World Meteorological Organization) ने भी एक ग्लोबल रिपोर्ट जारी कर चेतावनी दी है कि अल नीनो मजबूती से स्थापित हो चुका है और आने वाले महीनों में एक अत्यंत शक्तिशाली घटना में तब्दील हो जाएगा, जिससे वर्षा और तापमान के पैटर्न पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा और बाढ़, सूखा और अत्यधिक गर्मी जैसे संबंधित जोखिम उत्पन्न होंगे.

EL NINO का बढ़ता खतरा
- अल नीनो मजबूती से स्थापित हो चुका है और इसके और अधिक मजबूत होने की संभावना है.
- WMO के पूर्वानुमानों के अनुसार, फरवरी 2027 तक इसके बने रहने की लगभग 100% संभावना है.
- प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में असाधारण रूप से गर्म परिस्थितियाँ इसके और अधिक तीव्र होने में सहायक हैं.
- एक अत्यंत शक्तिशाली अल नीनो विश्व भर में वर्षा और तापमान के पैटर्न में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है, और चरम मौसम की घटनाओं को बढ़ावा दे सकता है.
- WMO और राष्ट्रीय मौसम विज्ञान एवं जल विज्ञान सेवाएँ इस असाधारण घटना के लिए तैयारियों और पूर्व चेतावनी के प्रयासों (early-warning efforts) को तेज कर रही हैं.
जाहिर है, अल नीनो और मध्यपूर्व एशिया में बढ़ती अनिश्चितता की वजह से देश में महंगाई के मोर्चे पर चुनौती बड़ी होती दिखाई दे रही है.
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