भारतीय राजनीति में आज कल कुछ ऐसा घट रहा है जिसका अंदाजा आप सबने एक महीने पहले तक नहीं लगाया था या यूं कहें कि आपके जेहन में भी कभी ऐसा नहीं आया होगा. बीते कुछ दिनों के घटनाक्रम पर नजर डालें तो सबसे पहले तृणमूल कांग्रेस के विधायक दल में टूट हो जाती है फिर उसके संसदीय दल में. तृणमूल कांग्रेस के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसद अलग हो जाते हैं. फिर वो एक गुमनाम पार्टी में अपने गुट का विलय कर देते हैं. इसके बाद खबर आने लगी कि यूबीटी यानि शिवसेना का उद्धव गुट के 6 सांसद भी अलग हो रहे हैं और अपने गुट का विलय एकनाथ शिंदे की शिवसेना में करेंगे. हालांकि यह अभी तक मुकम्मल नहीं हो पाया है मगर क्या आने वाले दिनों में यह भी संभव हो जाए.अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि यह सब क्यों हो रहा है.इसकी सबसे बड़ी वजह है कि बीजेपी इस कोशिश में लगी है कि मानसून सत्र के पहले एनडीए को लोकसभा और राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत मिल जाए.
आंकड़ों का गणित भी समझिए
अब आते हैं आंकड़ों पर इसके लिए दो तरीके है एक तो लोकसभा में एनडीए और विपक्ष की संख्या को लेकर जोड़ घटाव किया जाए जैसे अभी तृणमूल कांग्रेस के टूटे धड़े को मिलाकर एनडीए के पास 318 की संख्या है जबकि विपक्ष के पास 184 और अन्य 38 सांसद हैं, जो इन दोनों धड़ों के साथ नहीं हैं. वैसे तो लोकसभा की 543 सीटों के लिए दो तिहाई का आंकड़ा 362 होता है मगर अभी तीन सीटें खाली हैं तो बहुमत का आंकड़ा 360 हो जाता है. अब आप लोकसभा के गणित को ऐसे समझिए.बजट सत्र में महिला आरक्षण को लेकर जो संविधान संशोधन विधेयक लाया गया था उसके आंकड़े क्या कहते हैं और उसके देखने के बाद आप समझ जाएंगे कि सरकार किस रणनीति पर काम कर रही है.
डीएमके और सपा सांसदों पर भी नजर
बजट सत्र में संविधान संशोधन बिल पर वोटिंग के वक्त 528 सांसद मौजूद थे और बहुमत का आंकड़ा बनता है 352.सरकार के पक्ष में 298 वोट पड़े थे और बिल 54 वोटों से लोकसभा में अटक गया था यानि लोकसभा में बजट सत्र वाली परिस्थिति में सरकार को केवल 54 वोटों का जुगाड़ करना है.तृणमूल कांग्रेस का बागी धड़ा जो अब एनसीपीआई है कि 20 सांसदों को इसमें जोड़ दें तो आंकड़ा पहुंच जाता है 318 यानि अभी भी 34 सांसद चाहिए.सरकार की डीएमके से बात चल रही है.
राजभर ने किया है बड़ा दावा
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री राजभर ने समाजवादी पार्टी की ओर इशारा किया है मगर यहां दिक्कत ये है कि सपा में सेंध लगाने के लिए बड़ी संख्या में सांसदों को तोड़ना होगा,इसलिए बीजेपी की नजर इंडिया गठबंधन के अन्य दलों पर होगी जो छोटी हैं क्योंकि उनको संख्या भी छोटी ही चाहिए.बीजेपी सूत्रों की मानें तो इंडिया गठबंधन के कुछ छोटे दलों के सांसदों के साथ बीजेपी संपर्क में है जिसमें से एक पार्टी तो महाराष्ट्र की है. जहां तक राज्यसभा की बात है एनडीए के पास 150 सांसद हैं यहां दो तिहाई बहुमत के लिए 164 सांसद चाहिए. डीएमके के 8 सांसद साथ आते हैं तो 158 सांसद हो जाएंगे.अब चाहिए 6 सांसद. यहां टीएमसी के 13 सांसदों में से 3 का इस्तीफा हो चुका है यानि यहां भी काम प्रगति पर है.एक राज्यसभा उपचुनाव और कुछ छोटी-छोटी पार्टियों के साथ मिलकर यहां भी एनडीए दो तिहाई बहुमत जुटा लेगा.और जब ये सारे काम हो जाएंगे तब सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक लेकर आएगी.
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